फ़िलीपींस को चीनी मदद पर गर्मागर्म बहस

फ़िलीपींस चीन मदद विवाद

दुनिया फ़िलीपींस में तूफ़ान के कहर को देखकर सकते में है और चीन समेत कई देशों ने उसकी मदद का ऐलान किया है. मगर चीनी सहायता चीनी सोशल मीडिया में विवादों में घिरी है और दोनों देशों के बीच तनाव की ख़बरों को प्रमुखता मिल रही है.

फ़िलीपींस के समुद्र से लगा चीन क्षेत्रीय महाशक्ति है. मगर बीज़िंग को तूफ़ान पीड़ितों की जिस स्तर की मदद करनी चाहिए वह वहां एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है.

चीन अब अपने योगदान को एक लाख डॉलर से बढ़ाकर एक लाख 60 हज़ार डॉलर तक कर रहा है.

सोशल मीडिया पर मदद के पैसे को लेकर कटु राजनीतिक बहस चल रही है – कुछ चीनी लोग इसे काफ़ी कम मान रहे हैं और दूसरे सवाल उठा रहे हैं कि एक दुश्मन की मदद करना कितना जायज़ है.

सिना वीबो पर मौजूद ख़बरों पर हज़ारों टिप्पणियां की गईं हैं, जिनमें से बहुत सी अनुदारवादी हैं.

एक यूज़र ने वीबो पर लिखा है, ''चीनी पैसा भी पैसा ही है’’ और तर्क दिया है कि फ़िलीपींस को मदद का छोटा सा हिस्सा भी ऐसे है जैसे ''किसी के चोट देने पर मुस्कराना.’’ एक और व्यक्ति कहते हैं कि ऐसे देश को पैसा भेजने की कोई तुक नहीं ''जो धन्यवाद का मतलब नहीं जानता''.

उदारवाद बनाम राष्ट्रवाद

चीनी सोशल मीडिया पर नज़र रखने वाली संस्था डानवेई के निदेशक और संस्थापक जेरेमी गोल्डकॉर्न कहते हैं, ''चीनी इंटरनेट को लोग उदारवादी मानते हैं मगर इसका दूसरा पक्ष भी है जो राष्ट्रवादी है.''

इस वक़्त चीन और फ़िलीपींस के बीच दक्षिण चीनी समुद्र में कुछ द्वीपों को लेकर विवाद चल रहा है. उनका कहना है कि ''राष्ट्रवादी भावनाएं बुरे ढंग से भी निकल सकती हैं.''

हालांकि गोल्डकॉर्न कहते हैं कि यह ''चीन की असल सोच का प्रतिनिधित्व करता है'' जब सीमा विवादों पर ''उदारवादी और शहरी लोग भी कट्टरता के साथ सोचने लगते हैं.''

इससे कई लोग असहमत हैं. मदद की राशि बढ़ाने के बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर चीनी रुख़ का समर्थन भी किया. कुछ ने यहां तक कहा, ''चीनी सरकार के अतिमानवतावादी पैसे का समर्थन करो.''

नाइन फ़्लेवर्स काम टी नाम के हैंडल से ट्वीट करने वाले एक यूज़र ने कहा, ''राष्ट्रवाद ने लोगों के उसूलों को तोड़मरोड़ दिया है, जो एक अच्छी चीज़ नहीं है.''

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