इस्राइल की गुप्त हिरासत में अल कायदा संदिग्ध

समीर अब्दुल लतीफ अल-बराक़
Image caption समीर अब्दुल लतीफ अल-बराक़ कथित तौर पर वर्ष 2001 में अल-क़ायदा में भर्ती हुए थे.

इसराइल की सैन्य अदालत के अनुसार पाकिस्तान में माइक्रोबॉयल्जी की पढ़ाई कर चुके अल-क़ायदा के संदिग्ध सदस्य समीर अब्दुल लतीफ अल-बराक़ जुलाई, 2010 से ही गुप्त "प्रशासनिक हिरासत" में हैं.

बराक़ के हिरासत में होने की जानकारी सोमवार को उस वक़्त पता चली जब वकीलों ने इसराइल की उच्चतम अदालत में उनकी रिहाई के लिए अर्ज़ी दी.

इसराइल में प्रशासनिक हिरासत के तहत किसी व्यक्ति को आरोप तय किए बिना और मुक़दमा चलाए बिना अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखा जा सकता है.

सैन्य अदालत के दस्तावेजों के अनुसार बराक़ जैव हथियारों का विशेषज्ञ है.

इसराइल के वकीलों के अनुसार अभियुक्त फ़लस्तीनी बराक़ इसराइल के लोगों पर हमले की योजना बना रहा थे.

इसराइल के सरकारी वकील ने दावा किया कि बराक़ पूरे मध्य-पूर्व को ख़तरे में डाल सकते हैं.

लेकिन बराक़ के वकीलों ने इसराइल के वकीलों के दावे को यह कहकर चुनौती दी कि अगर बराक़ के ख़िलाफ़ कोई सबूत हो तो उसे पेश किया जाए.

पाकिस्तान में पढ़ाई

सोमवार को सार्वजनिक हुए अदालती दस्तावजों के अनुसार बराक़ का जन्म वर्ष 1974 में कुवैत में हुआ था. वे वर्ष 1997 में माइक्रोबॉयल्जी की पढ़ाई करने के लिए पाकिस्तान चले गए. अगले ही वर्ष उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के एक सैन्य शिविर में हिस्सा लिया.

इन दस्तावेज़ों के अनुसार अल-क़ायदा के वर्तमान प्रमुख आयमन अल-ज़वाहिरी ने वर्ष 2001 में उन्हें अल-क़ायदा में भर्ती कराया था.

इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर ग़ैर-परंपरागत हथियारों का "अनुभव और ज्ञान" लिया.

इसराइली अभियोजकों के अनुसार बराक़ को वर्ष 2003 में ग्वंतनामो बे स्थित बंदी शिविर में तीन महीने हिरासत में रखा गया था.

उसके बाद वर्ष 2003 से वर्ष 2008 के बीच उन्हें जॉर्डन में "चरमपंथी गतिविधियों" और अल-क़ायदा के जैव-हथियार परियोजना में शामिल होने के आरोप में जेल में रखा गया था.

सीमा में प्रवेश

Image caption इसराइली सुरक्षा बलों ने बराक़ को कथित तौर पर उस समय हिरासत में लिया था जब वो पश्चिमी तट में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे.

11 जुलाई, 2010 को उन्हें जॉर्डन से निकाल दिया गया जिसके बाद इसराइली सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर उन्हें एलेनबाई ब्रिज सीमा पर उस समय गिरफ़्तार किया था जब वो पश्चिमी तट में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे.

उसके बाद से बराक़ प्रशासकीय हिरासत में हैं. इस हिरासत को हर छह महीने पर एक सैन्य अदालत से फिर से बढ़वाना होता है.

इसराइल सेना का कहना है कि वो प्रशासकीय हिरासत का प्रयोग तभी करती है जब सुरक्षा व्यवस्था को आसन्न ख़तरा हो या फिर किसी गुप्तचर की रक्षा करनी हो.

इसराइल के मानव अधिकार समूह बीटीसलेम के अनुसार सितंबर, 2013 में 135 फ़लस्तीनी प्रशासकीय हिरासत में लिए गए थे.

इसराइली के न्याय मंत्रालय बराक़ की हिरासत अवधि को यह कहकर बढ़ाने का अनुरोध किया कि उन्हें मुक्त करना, "इस इलाके में जेहादी गतिविधियों में एक ऐसा विकास होगा जहाँ से वापसी संभव नहीं होगी."

बराक़ के वकील महमिद सालेह ने इसराइली के सैन्य रेडियो से कहा, "अगर वो इतने ही वरिष्ठ चरमपंथी है तो उन पर मुक़दमा क्यों नहीं चलाया जा रहा ? उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं है."

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