पारा शून्य से नीचे और 5,000 किमी पैदल यात्रा

पैदल चलना सेहत के लिए अच्छा है, लेकिन अगर कोई पैदल 5,000 किलोमीटर की यात्रा पूरी करे और वो भी दुर्गम रेगिस्तान से गुज़रते हुए, तो आप उस शख़्स के बारे में क्या कहेंगे?

इस रोमांचक यात्रा को ब्रितानी नागरिक रॉब लिलवॉल ने पूरा किया है. उन्होंने मंगोलिया में गोबी रेगिस्तान के रास्ते हॉंगकॉंग तक 5,000 किलोमीटर का सफ़र पैदल तय किया.

इस सफ़र के दौरान उनके साथ एक कैमरामैन लियोन मैककैरॉन भी थे. सफ़र के अनुभवों पर आधारित लिलवॉल की किताब 'वॉकिंग होम फ्रॉम मंगोलिया' हाल ही में प्रकाशित हुई है.

रॉब लिलवॉल ने अपने कैमरामैन साथी के साथ यह यात्रा नवंबर 2011 की भीषण सर्दियों में तय की थी.

ऐसे में सवाल यह है कि आख़िर उन्हें इतनी लंबी यात्रा पर पैदल जाने की सूझी क्यों?

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चीन को देखने की चाहत

रॉब लिलवॉल ने बीबीसी के कार्यक्रम आउटलुक में मैथ्यू बैनिस्टर के साथ बातचीत के दौरान बताया, "मेरी पत्नी हॉंगकॉंग की चीनी हैं और इसलिए मैं चीन को क़रीब से देखना चाहता था."

इससे पहले वो साइकिल से साइबेरिया से लंदन तक का सफ़र भी कर चुके हैं. इस सफ़र के दौरान उन्होंने क़रीब 50,000 किलोमीटर की यात्रा तय की और 28 छोटे-बड़े देशों को पार किया.

अपनी साइकिल यात्रा के बारे में रॉब लिनवाल बताते हैं कि, "इस सफ़र को पूरा करने में तीन साल का समय लगा और इस दौरान हॉंगकॉंग में मेरी अपनी पत्नी से पहली मुलाक़ात हुई और यात्रा पूरी होने के बाद मैं हॉंगकॉंग आ गया."

वो बताते हैं कि, "मुझे रोमांच पसंद है. मैं भूगोल का अध्यापक था और भूगोल के बारे में सीखने का ये एक बेहतरीन तरीक़ा है."

उन्होंने बताया कि इन यात्राओं के ज़रिए वो बच्चों की मदद के लिए कुछ धनराशि भी जुटा लेते हैं.

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भीषण सर्दी का सामना

जब उन्होंने गोबी रेगिस्तान से अपनी यात्रा शुरू की तो वहां काफ़ी सर्दी थी.

रॉब लिलवाल ने बताया कि, "वहां तापमान शून्य से 10 डिग्री सेल्सियस नीचे था, नवंबर का महीना था और सर्दी तेज़ी से बढ़ती जा रही थी."

रॉब लिलवाल बताते हैं कि जब उन्होंने यात्रा शुरू की तब साफ़ नीला आकाश था, लेकिन जल्द ही बर्फ़बारी शुरू हो गई. वह कहते हैं कि, "हम एकदम सुनसान रास्तों पर बेहद धीमे-धीमे आगे बढ़ रहे थे."

उन्होंने चीन की दीवार के साथ-साथ भी सफ़र किया और इसे वो एक यादगार अनुभव बताते हैं. इस दौरान उन्होंने पीली नदी को पार किया और चीन के ऐतिहासिक शहर शियान को बेहद क़रीब से देखा.

वो बताते हैं कि, "इस सफ़र के दौरान इंसानी बस्तियां काफ़ी दूर-दूर थीं और जब हम दूर कहीं धुआं उठते हुए देखते तो इस उम्मीद में ख़ुशी से उछल पड़ते थे कि ज़रूर आगे कोई गांव होगा."

उन्होंने बताया कि इस सफ़र के दौरान जो लोग मिले उन सभी का व्यवहार काफ़ी दोस्ताना था और वो सभी हमारे सफ़र के बारे में जानकार हैरान रह जाते थे.

स्थानीय लोगों के साथ बातचीत में आई दिक्क़तों के बारे में रॉब लिलवाल ने बताया कि, "मुझे थोड़ी बहुत मंदारिन आती थी, इसलिए काम चल गया. जब हम रात को किसी गांव में पहुंचते थे तो हमें वहां रुकने की अनुमति मिल जाती थी."

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औद्योगिक विस्तार

उन्होंने बताया कि चीन में औद्योगिक विस्तार अब दूर-दराज़ के इलाक़ों तक पहुंच रहा है. गोबी में कई नए औद्योगिक क़स्बे बसाए जा रहे हैं और शहरों का विस्तार काफ़ी तेज़ी से हो रहा है.

जनवरी 2012 आते-आते तापमान शून्य से 30 डिग्री सेल्सियस नीचे जा चुका था. इस दौरान उन्हें कई बार चोट लगी और एक बार तो उनका कैमरा भी टूट गया.

वह बताते हैं कि, "हमें हर क़दम पर मुसीबत का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन हमने आगे बढ़ना जारी रखा."

इस यात्रा को पूरा करने में उन्हें 193 दिन का समय लगा. वो सप्ताह में एक दिन आराम करते थे, लेकिन कभी कभी उन्हें एक ही जगह पर ज़्यादा दिनों तक भी रुकना पड़ा.

एक सुनसान रास्ते पर ज़रूरत का सारा सामान साथ लेकर चलना भी कम चुनौती भरा नहीं था.

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रोमांच और राहत

वो बताते हैं कि, "अपने साथ 25 किलो सामान लेकर रोज़ाना 10 से 12 घंटे पैदल चलना काफ़ी बड़ी बात है और इसलिए नियमित रूप से आराम करना काफ़ी ज़रूरी था."

रॉब लिलवाल खाने का इंतज़ाम आमतौर पर चीन के गांवों और क़स्बों में ही करते थे, हालांकि खाने का कुछ सामान उनके पास भी रहता था. इस दौरान उन्हें अक़्सर नूडल्स खाने को मिलते थे.

वह बताते हैं कि एक बार वो 12 दिनों तक बिना नहाए रहे.

रॉब लिलवाल के मुताबिक़ यात्रा पूरी होने पर छह महीने बाद अपनी पत्नी से मिलना उनके लिए काफ़ी भावुक क्षण था.

उनके मुताबिक़ यात्रा के दौरान मिले रोमांचक क्षणों की उन्हें ख़ुशी तो थी, लेकिन यह सोच कर भी राहत मिल रही थी कि चलो यात्रा ख़त्म हो गई.

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