देश जहां प्रेतों और ईश्वर में चल रहा है युद्ध

मेक्सिको

क्या ईश्वर है? क्या भूत-प्रेत होते हैं? कैथोलिक चर्च मानता है कि दोनों का अस्तित्व है और कुछ धर्मगुरु यह भी कहते हैं कि मैक्सिको में इस वक़्त दोनों के बीच भयंकर युद्ध चल रहा है.

कुछ लोगों के लिए यह असाधारण बात हो सकती है लेकिन धर्मगुरु कहते हैं कि मैक्सिको पर शैतान ने हमला कर दिया है और इससे लड़ने की ज़रूरत है.

वे कहते हैं कि मैक्सिको में ड्रग्स से जुड़ी वीभत्स हिंसा और मानवीय बलि इस हमले की पहचान हैं और मैक्सिको साल 2006 से ही इसकी गिरफ़्त में है.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बीच कम से कम 70,000 लोग मारे जा चुके हैं. इसमें बेगुनाह नागरिक, हथियारबंद गिरोहों के सदस्यों सहित सुरक्षाबलों के जवान तक शामिल हैं.

लेकिन धर्मगुरु कहते हैं कि यह महज आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि यह बर्बरता का भी मसला है.

हाल के वर्षों में सड़क के किनारे बुरी तरह विकृत हालत में किसी स्कूल जाते बच्चे की लाश मिलना अपवाद नहीं रह गया है.

व्यस्त सड़कों पर चलते हुए लोगों को पुल के किनारे क्षत विक्षत शव लटके दिखते हैं.

ड्रग माफिया और शैतान

मैक्सिको के एक धर्मगुरु और ओझा फादर कार्लोस ट्रायना कहते हैं, ''इन बड़ी और संस्थागत बुराइयों के पीछे शैतान है. एडॉल्फ हिटलर के पीछे भी शैतान था. ड्रग माफिया के पीछे भी शैतान है.''

मैक्सिको सिटी में रहने वाले एक और ओझा फादर फ्रांसिस बाउटिस्टा कहते हैं, "इन दिनों झाड़-फूंक की मांग बढ़ गई है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था."

वो कहते हैं कि ज़्यादातर मामलों में मामूली झाड़-फूंक से काम चल जाता है.

बहुत कम ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति शैतान की पूरी गिरफ़्त में आ गया हो. ऐसे में किसी बड़े पादरी के हस्तक्षेप की जरूरत होती है.

मैक्सिको में 'सेंट डेथ' संप्रदाय के अनुयायियों की बढ़ती संख्या से भी झाड़-फूंक में आई बढ़ोत्तरी का पता चलता है.

इस संप्रदाय के अनुयायी शादी के जोड़े वाली स्त्री के कपाल की पूजा करते हैं. देश में इसके 80 लाख अनुयायी हैं. इसके अलावा मध्य अमरीका (अमरीका और कनाडा) में भी अनुयायी हैं.

मानव बलि

दिलचस्प है कि ड्रग्स तस्कर भी गिरफ़्तारी से बचने और अधिक से अधिक पैसा बनाने के लिए इस देवी की पूजा करते हैं और मानव बलि देते हैं.

इस कारण मैक्सिको में हिंसा में बढ़ोत्तरी हुई है.

फादर फ्रांसिस का कहना है, "अंधविश्वास में इज़ाफ़े का एक और कारण है साल 2007 में गर्भपात को क़ानूनी बनाना. इस संप्रदाय और गर्भपात, दोनों ने देश में बुरी आत्माओं को जमने में मदद की है."

देश के उत्तरी क्षेत्र में जादू टोने का ज़्यादा प्रचलन है, जहां मैक्सिको की सेना अत्याधुनिक हथियारों से लैस और धनी ड्रग्स तस्करों के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़े हुए है.

इसके समानांतर धर्मगुरुओं ने भी बुराई के ख़िलाफ़ आध्यात्मिक लड़ाई छेड़ रखी है.

इन्हीं में से एक धर्मगुरु हैं फादर अर्नेस्टो कैरो. कैरो मांटेरी शहर के हैं जहां गोलीबारी और अपहरण की घटनाएं आम हैं.

उन्होंने कई ड्रग तस्करों की झाड़-फूँक की है. एक घटना उन्हें आज भी नहीं भूलती. वह एक गिरोह का सदस्य था, जिसने बड़े ही डरावने अपराधों को क़ुबूल किया.

चीख से खुशी

फादर कैरो बताते हैं, ''वह लोगों को टुकड़ों में काटने वाले गिरोह का मुखिया था. उसने बताया कि मरने वाले की चीख सुनकर उसे खुशी मिलती थी. वह लोगों को जिंदा जला देता था.''

फादर ने बताया कि उस व्यक्ति ने अपनी पूरी जिंदगी 'सेंट डेथ' को समर्पित कर दी थी.

संप्रदाय में शामिल होना पहला कदम होता है और उसके बाद वे ड्रग तस्करों के गिरोह में शामिल हो जाते हैं.

फादर कैरो कहते हैं, "बर्बर हत्याओं से जुड़े ड्रग तस्कर इस संप्रदाय का इस्तेमाल कर रहे हैं. हमने इन सभी को इसी संप्रदाय से जुड़ा पाया."

इसके अलावा इस संप्रदाय में अपराधी, पुलिसकर्मी और कलाकार भी शामिल हैं.

'सेंट डेथ' संप्रदाय पर दो क़िताबें लिखने वाले पत्रकार जोस गिल ओल्मास कहते हैं, ''मैक्सिको के सबसे ग़रीब समुदाय में इस संप्रदाय के अनुयायी ज़्यादा हैं.''

उनके अनुसार, "यह संप्रदाय 18वीं शताब्दी में अस्तित्व में आया."

भूतों का मेला

1990 के दशक में शुरू हुई मंदी के बाद तो इस संप्रदाय के अनुयायियों की संख्या में भारी इज़ाफ़ा हुआ.

इस दौर में मध्यवर्ग को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. हताशा में उन्होंने 'सेंट डेथ' संप्रदाय में शामिल हो गए.

ओल्मास कहते हैं, ''आठ साल पहले हमने पाया कि ड्रग्स गिरोह के ज़्यादातर सदस्य 'सेंट डेथ' के अनुयायी थे. ऐसा क्यों हुआ? वे कहते हैं कि जीसस और वर्जिन मैरी उन्हें वो सब नहीं दे सकते जो उन्हें चाहिए यानी पुलिस और सेना से राहत.''

मैक्सिको सिटी के नजदीक टेपिटो में संप्रदाय का वार्षिक समारोह होता है. यह जगह ड्रग तस्करों और अपराधियों का गढ़ है. यहां 'सेंट डेथ' संप्रदाय का सबसे बड़ा संग्रहालय भी है.

हर 31 अक्टूबर को मैक्सिको के 'डेड फैस्टिवल' के उपलक्ष्य पर इस संप्रदाय के हज़ारों लोग इकट्ठा होते हैं. मैं वहां समारोह को देखने गया था.

तस्करों की देवी

एक बुजुर्ग महिला रोमेरो बताती है, ''लोग यहां हर तरह के लोग मदद मांगने के लिए आते हैं.''

मुझे एक व्यक्ति मिला जो धर्मस्थल पर घुटनों के बल चलकर अपनी 20 दिन की बेटी को कपाल के दर्शन कराने लाया था.

मैंने देखा कि एक गर्भवती महिला अपने होने वाले बच्चे की सुरक्षा की प्रार्थना करने आई थी. अपने शरीर पर महिला कपाल का टैटू करवाए लोगों की वहां भरमार थी.

अधिकांश अनुयायी जीसस और वर्जिन मैरी में विश्वास रखते हैं लेकिन उनका झुकाव 'सेंट डेथ' के प्रति ज़्यादा है.

रोमेरो कहती हैं, "चर्च ने बाल यौन शोषण की विश्वव्यापी घटनाओं से ख़ुद इस संप्रदाय को बढ़ने का मौक़ा दिया है."

वो कहती हैं, ''धर्मगुरुओं ने हमारे विश्वास को ख़त्म कर दिया है. अब वे किस बात की आलोचना कर रहे हैं? हम जो कर रहे हैं वह बुरा नहीं है, बुरा वो है जो उन्होंने किया है.''

साल 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति फिलिप काल्डेरॉन ने मैक्सिको में ड्रग तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए सैन्य अभियान चलाया.

जादू-टोने से मैक्सिको को वीभत्स हत्याओं से मुक्ति मिल पाएगी या नहीं, यह बहस का विषय हो सकता है. लेकिन मैक्सिको में अधिकांश लोग शांति की कोशिशों का स्वागत ज़रूर करेंगे.

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