टिंडर: 'इंसानियत की समस्याएं सुलझाने वाला' ऐप

  • 27 नवंबर 2013
ऑनलाइन, डेटिंग, रोमांस

ऑनलाइन डेटिंग ऐप टिंडर के बारे में लाखों लोग बात कर रहे हैं.

जिन्हें इसके बारे में नहीं पता उन्हें बता दें. आप इस ऐप पर किसी संभावित जोड़ीदार की तस्वीर देखते हैं, उनकी उम्र भी पता चलती है और उन्हें क्या पसंद और क्या नापसंद है ये पता चलता है. ये सब उस जानकारी के आधार पर है जो आपने फ़ेसबुक पर साझा की है.

अगर आपका दोस्त आपके संभावित जोड़ीदार का भी दोस्त है तो ये ऐप उस बारे में भी बताएगा. अगर आपको कोई पसंद नहीं आता तो आप स्मार्टफ़ोन पर लेफ़्ट स्वाइप कर सकते हैं और वो तस्वीर गायब हो जाएगी. लेकिन अगर पसंद है तो दाएं स्वाइप करना होता है.

अगर आपका संभावित जोड़ीदार भी दाएं स्वाइप करता है तो आप दोनों को इस बारे में बता दिया जाता है और सिर्फ़ तभी दोनों एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं.

और उसके बाद सच्चे प्यार का रास्ता, सही?

टिंडर के संस्थापकों में से एक शॉन रैड कहते हैं, "टिंडर से 150 से ज़्यादा शादियां हुई हैं जिनके बारे में हमें पता है."

वो कहते हैं, "हर रोज़ हमें सैकड़ों-हज़ारों ईमेल मिलते हैं जिनमें हमें टिंडर पर लोगों की दोस्ती या सगाई या लंबे समय के लिए बने रिश्तों के बारे में बताया जाता है."

ये बड़ा लुभावना प्रदर्शन है लेकिन ख़ास बात ये है कि टिंडर इस तरह के ऐप के बाज़ार में बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है.

'मानवता की समस्या'

Image caption शॉन रैड भी अपनी गर्ल फ्रेंड से टिंडर पर ही मिले थे.

इंटरनेट पर पारंपरिक डेटिंग साइट पर मुलम्मा चढ़ाकर प्रोफ़ाइल तैयार की जाती है ऐसे में टिंडर के "दाएं स्वाइप" करने के फ़ीचर को कुछ लोग ताज़गी भरा बदलाव मान रहे हैं.

ऑनलाइन डेटिंग पर कोचिंग देने वाली सूज़ैन क्विलियम कहती हैं, "तकनीक तेज़ी से बढ़ रही है; मुझे लगता है कि उद्योग बहुत बांट रहा है."

वो कहती हैं, "बाज़ार अलग-अलग हिस्सों में विकसित होगा, एक हिस्सा सेक्स की ज़रूरतों का होगा, दूसरा रिश्तों का और तीसरा प्रेम संबंधों का…"

इस बाज़ार में और भी ऐप हैं जैसे डाउन, जिसका पहले नाम बैंग विद फ़्रेंड्स था, ये सभी ऐप आपकी स्थिति और सोशल नेटवर्किंग डेटा के आधार पर संभावित जोड़ीदार बताते हैं.

बीबीसी ने 27 साल के शॉन रैड से बर्लिन के एक आलीशान होटल में मुलाकात की. रैड टिंडर को डेटिंग ऐप कहना पसंद नहीं करते.

रैड अपनी गर्लफ़्रेंड से भी टिंडर पर ही मिले थे. हालांकि रैड ये नहीं बताते कि उनकी साइट को हर रोज़ कितने लोग इस्तेमाल करते हैं लेकिन ये ज़रूर कहते हैं कि हर रोज़ 45 करोड़ टिंडर प्रोफ़ाइल देखी जाती हैं.

इस नेटवर्क का आकार हर हफ़्ते 15% की दर से बढ़ रहा है. ज़्यादातर सफल विचारों की तरह टिंडर की शुरुआत भी इसलिए हुई क्योंकि इसके बाज़ार को इसकी ज़रूरत थी.

रैड कहते हैं, "ये एक सामान्य समस्या थी जो मुझे लोगों को मिलने में आती थी."

रेड का कहना है, "एक बात हम अक्सर महिलाओं से सुनते हैं कि असल ज़िंदगी में जब कोई उनके पास आता है तो वो आसपास मौजूद सबसे आकर्षक व्यक्ति हो सकता है, ऐसा महसूस होता है कि वो पूरी तरह से अभिभूत हो गई हैं. नतीजा ये होता है कि जो लोग असल में दिलचस्पी लेने वाले होते हैं वो पीछे रह जाते हैं, अंतर्मुखी हो जाते हैं और रिश्तों को लेकर आगे नहीं बढ़ते."

रैड भी ऐसे ही अंतर्मुखी लोगों में से थे. वो कहते हैं, "हमारा मकसद ऐसी ही बड़ी, महत्वपूर्ण कंपनी बनाने का है जो मानवता की ये समस्या हल कर सके."

असली दुनिया

ये सब तो ठीक है लेकिन 27 कर्मचारी और इस्तेमाल करने वालों की बड़ी संख्या वाली एक कंपनी सिर्फ़ उत्साह पर कायम नहीं रह सकती.

टिंडर को आईएसी का आर्थिक समर्थन है, आईएसी के पास मैच डॉटकॉम और ओकेक्यूपिड जैसी डेटिंग साइट हैं.

अभी टिंडर की शुरुआत है लेकिन इसे भी जल्दी ही अपने ऐप के लिए पैसे वसूलने की नौबत आ सकती है.

लेकिन टिंडर के सामने और चुनौतियां भी हैं. इस साल की शुरुआत में आई ख़बरों में इस बात का ज़िक्र हुआ था कि टिंडर कितनी जानकारी का इस्तेमाल कर रही है, ख़ास तौर पर स्थिति संबंधित.

किसी और लोकप्रिय सेवा की तरह ही धोखेबाज़ लोग इस पर ध्यान दे रहे हैं. ख़ूबसूरत महिला होने का ढोंग कर रहे बॉट फैल रहे हैं ताकि निजी जानकारी हासिल की जा सके.

Image caption टिंडर का काम लॉस एंजेलिस से होता है जहां एक और मशहूर ऐप स्नैपचैट का मुख्यालय भी है.

फ़ेसबुक से इसके नज़दीकी संबंध को लेकर भी कुछ लोगों को चिंता है कि टिंडर दूसरी डेटिंग साइट के मुकाबले लोगों के बारे में पता करना आसान बना रही है, हालांकि इस चिंता को रैड खारिज करते हैं.

प्रोफ़ाइल देखने की थकान

टिंडर की कामयाबी से ऑनलाइन डेटिंग की नई लहर की शुरुआत हो रही है.

एक तो प्रोफाइल देखने की थकान है, जब लोगों के पास किसी चीज़ के लिए वक़्त नहीं है. क्विलियम बताती हैं, "इन दिनों समस्या ये है कि हमारे पास डेट करने के कई पड़ाव हैं."

उनका इशारा किशोरावस्था, छात्र जीवन, कामकाजी जीवन और पति या पत्नी को खो देने के बाद के जीवन की ओर है.

सौ साल पहले 15-16 या 20 के आसपास शादी हो जाती थी.

वो कहती हैं, "हम इतने व्यस्त और तनाव में हैं कि लोगों से मिलते नहीं. हम जगह बदलते हैं, नौकरी बदलते हैं. पहले से पांच गुना ज़्यादा डेटिंग के पड़ाव हैं लेकिन अवसर नहीं हैं."

टिंडर और इससे प्रतिस्पर्धा करने वाली कंपनियों का सोचना है कि वो कुछ हद तक इस समस्या से निपट सकती हैं, कम से कम लोगों को एक दूसरे के पास लाकर ताकि वो एक दूसरे पर ध्यान दे सकें.

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