चर्च को बदलना होगा रवैया: पोप फ्रांसिस

पोप फ्रांसिस

कैथोलिक ईसाइयों के धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने अपने पहले अहम लेख में चर्च की सत्ता के केंद्र को वैटिकन से हस्तांरित करने की बात कही है.

इस दस्तावेज़ में उन्होंने पोप के पद से जुड़े अधिकारों में बदलाव के सुझाव भी मांगे हैं.

पोप ने ये भी चेतावनी दी है कि वैश्विक आर्थिक असमानता बढ़ने से संघर्ष ज़रूर होगा.

इस वर्ष मार्च में पोप बनने के बाद से उन्होंने कई मुद्दों पर पिछले पोप से बिलकुल अलग रवैया अपनाया है.

अपने धार्मिक उपदेश में पोप फ्रांसिस ने कहा कि उनकी पसंद ''एक ऐसा चर्च है जो चोटिल और मलिन हो क्योंकि वो सड़कों पर रहा है, ना कि ऐसा चर्च जो अपनी ही सुरक्षा से चिपकने और सीमित होने की वजह से बीमार हो.''

पोप फ्रांसिस ने ये भी कहा है कि चर्च को ''हमने हमेशा इसी तरह से काम किया है'' वाले रवैये को बदलना होगा. रोम में मौजूद बीबीसी संवाददाता डेविड वाइली के मुताबिक ये दस्तावेज़ बड़े बदलावों की ओर इशारा करता है.

गर्भपात का विरोध जारी

लेकिन दस्तावेज़ में महिला पादरियों की दीक्षा या नियुक्ति के विरोध को ये कहते हुए दोहराया गया है कि ''इस सवाल पर बातचीत नहीं हो सकती.''

साथ ही पोप फ्रांसिस के नए लेख में चर्च का गर्भपात का विरोध दोहराया गया है.

लेकिन साथ ही उसमें ये बात भी मानी गई है कि ''ये भी सच है कि बेहद मुश्किल हालातों से गुज़र रही महिलाओं का हमने बहुत कम साथ दिया है, ख़ासकर जब तब उनकी गर्भावस्था बलात्कार या बेहद ग़रीबी का नतीजा हो.''

पोप पूछते हैं, ''इन दर्दनाक हालातों का किस पर असर नहीं होगा?''

अंतर-धर्म संबंध

साथ ही लेख में अंतर-धर्म संबंधों की भी बात है जिसमें ईसाइयों को ''अपने देशों में मुस्लिम आप्रवासियों को उसी स्नेह और इज़्ज़त के साथ अपनाने की बात कही गई है जिस तरह हम इस्लामी परंपरा वाले देशों में मान्यता और इज़्ज़त की उम्मीद रखते हैं और मांग करते हैं.''

Image caption पोप फ्रांसिस का बहुत से मुद्दों पर पिछले पोप से बिलकुल अलग रवैया है.

पिछले महीने एक अख़बार के साथ इंटरव्यू में पोप फ्रांसिस ने कहा था कि वैटिकन या कैथोलिक चर्च अपने ही बारे में बहुत ज़्यादा सोचने लगा था और उसे दूसरों को शामिल करने की ज़रूरत है.

इस इंटरव्यू के बाद पोप ने वैटिकन की नौकरशाही में सुधार के तरीकों पर बातचीत के लिए कार्डिनल पादरियों के एक विशेष समूह के साथ पहली बैठक की थी.

अपने नए लेख में पोप ने कहा है कि ''ज़रूरत से ज़्यादा केंद्रीकरण से मदद होने की जगह चर्च का काम और धर्मप्रचार और ज़्यादा जटिल होता है.''

उन्होंने ये भी कहा है कि वे नहीं समझते कि ''पोप या चर्च से चर्च और दुनिया से संबंधित हर मुद्दे पर अंतिम या निर्णायक जवाब देने की उम्मीद करनी चाहिए.''

आर्थिक असमानता पर चिंता

इस महीने वैटिकन ने एक अभूतपूर्व सर्वेक्षण जारी किया जिसमें दुनिया भर के कैथोलिक ईसाइयों से आधुनिक पारिवारिक जीवन और यौन आचार पर उनकी राय मांगी गई है.

अपने लेख में पोप फ्रांसिस ने आर्थिक असमानता पर भी अपने चिंताएं व्यक्त की हैं.

पोप ने लिखा है, "आज हमें असमानता और बहिष्कार की अर्थव्यवस्था को ना कहना होगा. ऐसी अर्थव्यवस्था मारती है.'' पोप ने ''पैसे की नई मूर्तिपूजा'' की भी निंदा की है.

उन्होंने आगे लिखा है, "मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूं कि हमें और ऐसे राजनेता दें जो समाज के हालात, लोगों और ग़रीबों के जीवन से सच में चिंतित हों."

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