थाईलैंड में आखिर प्रदर्शन क्यों

थाईलैंड, प्रदर्शन

तीन साल की शांति के बाद थाईलैंड की सड़कों पर प्रदर्शनकारी एक बार फिर उतर आए हैं. आइए जानते हैं कि क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन और क्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी.

क्यों शुरू हुए प्रदर्शन?

थाईलैंड की संसद के निचले सदन ने नवंबर में एक विवादास्पद क्षमादान विधेयक पारित किया था. इसके आलोचकों का कहना है कि इसकी वजह से पूर्व नेता ताकसिन चिनावाट के लिए जेल की सज़ा पूरी किए बिना वापसी करने का रास्ता साफ़ हो सकता है. इसके बाद से प्रदर्शन शुरू हो गए थे.

साल 2006 में सैन्य तख्तापलट में थाईलैंड के प्रमुख नेता ताकसिन चिनावाट को हटा दिया गया था.

अब वे स्वत: निर्वासन में विदेश में रह रहे हैं. इसके बाद भी वे बहुत से ग्रामीण मतदाताओं में लोकप्रिय हैं.

इस क्षमादान विधेयक को ताकसिन चिनावाट की बहन यिंगलक चिनावाट की फ़ियु थाई पार्टी ने पेश किया था. इसे सीनेट ने अस्वीकार कर दिया था. इसके बाद भी सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी रहे.

प्रदर्शनकारी कौन हैं?

प्रदर्शनकारी ताकसिन का विरोध करने के लिए एकजुट हुए हैं, उनका मानना है कि फ़ियु पार्टी की सरकार को अब भी ताकसिन ही नियंत्रित कर रहे हैं.

प्रदर्शन का नेतृत्व देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री सुथेप थागसुबेन कर रहे हैं, जिन्होंने रैलियों का नेतृत्व करने के लिए विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था.

प्रदर्शनकारी शहरी और मध्य वर्ग के लोग हैं.

बैंकॉक में क़रीब एक लाख विपक्ष समर्थकों ने 24 नवंबर को प्रदर्शन किया था. हालांकि तब से संख्या में गिरावट आई है.

पहले हफ़्ते में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन शनिवार को सरकार समर्थक लाल शर्टधारियों के प्रदर्शनस्थल के पास हिंसा भड़क उठी. इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई.

क्या चाहते हैं समर्थक?

Image caption थाईलैंड की प्रधानमंत्री यिंगलक चिनावाट का कहना है कि वो जल्द चुनाव के बारे में नहीं सोच रहीं.

सरकार को परेशान करने और फ़ियु पार्टी की सरकार को इस्तीफ़े के लिए मज़बूर करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों को घेरकर उन पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

सुथेप थागसुबेन और उनके समर्थकों का कहना कि वे “ताकसिन के राजनीतिक संगठन” को हटाकर जनता की परिषद स्थापित करना चाहते हैं जो देश के नेताओं को चुनेगी.

उनका आरोप है कि पिछले चुनाव में सरकार ने ग़ैरज़िम्मेदार वादे करके ''वोट ख़रीदे'' थे.

अब आगे क्या?

प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि वो अपनी रैलियां जारी रखेंगे. हालांकि ये साफ़ नहीं है कि इसका अंत क्या होगा.

यिंगलक की फ़ियु थाई पार्टी को अब भी अहम समर्थन हासिल है, ख़ासतौर पर ग्रामीण मतदाताओं में.

इसके अलावा फ़ियु थाई पार्टी थाईलैंड की संसद के निचले सदन में बहुमत में है, जहां यिंगलक के ख़िलाफ़ गुरुवार को विपक्ष का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका था.

ऐसा समझा जाता है कि अगर अभी आम चुनाव हों तो फ़ियु थाई पार्टी जीत सकती है. हालांकि यिंगलक ने बीबीसी से कहा है कि वो मौजूदा संकट से निपटने के लिए जल्दी चुनाव नहीं करवाना चाहतीं.

Image caption थाईलैंड सरकार प्रदर्शनकारियों पर सशस्त्र बलों के इस्तेमाल से इनकार कर रही हैं.

उन्होंने ये भी कहा है कि वो प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सशस्त्र बलों के इस्तेमाल को मंज़ूरी नहीं देंगी.

कुछ ख़बरों में कहा गया था कि प्रदर्शनकारियों को 5 दिसंबर से पहले हटना पड़ेगा. पांच दिसंबर को थाईलैंड के सम्राट का जन्मदिन है.

प्रदर्शनों का असर?

यिंगलक ने चेतावनी दी है कि और प्रदर्शन होने पर "अर्थव्यवस्था की हालत बिगड़" सकती है.

साल 2008 और साल 2010 में हुए प्रदर्शनों ने थाईलैंड की अर्थव्यवस्था, ख़ास तौर पर कारोबार और पर्यटन क्षेत्र, पर बुरा असर डाला था.

अभी यह साफ़ नहीं है कि ताज़ा प्रदर्शनों का क्या असर होगा. हालांकि कई देशों ने थाईलैंड के लिए अपने नागरिकों को यात्रा संबंधी चेतावनी दी है.

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