डब्ल्यूटीओ में व्यापार समझौते पर सहमति

  • 7 दिसंबर 2013
डब्ल्यूटीओ

विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने संबंधी अपनी तरह के पहले विश्व समझौते पर सहमत हो गया है.

ये समझौता इंडोनेशिया की राजधानी बाली में हुआ, जिसमें व्यापार प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ गरीब देशों के सामान बेचने की प्रक्रिया को और आसान बनाया गया है.

विश्लेषकों का कहना है कि इस समझौते से विश्व अर्थ व्यवस्था को करीब दस खरब डॉलर की उछाल मिल सकेगी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नए व्यापार समझौते को संघर्ष कर रहे विश्व व्यापार संगठन के लिए महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है.

हालांकि विकसित देशों के कुछ संगठनों ने पहले इसकी आलोचना की थी. उनका कहना था कि ये लंबे समय तक नहीं चल पाएगा.

अमरीकी चेतावनी

159 देशों के व्यापार मंत्रियों के बीच लंबी बातचीत के बाद शनिवार सुबह आख़िरकार रज़ामंदी हो गई. इंडोनेशिया के व्यापार मंत्री गीता विरजावन ने बैठक में कहा, ''इस पर सहमति बन गई.''

वर्ष 1995 में ड्ब्ल्यूटीओ की स्थापना के बाद से पहली बार संगठन समग्र समझौते तक पहुंचा है. डब्ल्यूटीओ के प्रमुख राबर्टो अज़ेवेदो ने कहा, '' .''

इस समझौते से गरीब देशों के निर्यात में आने वाली बाधाएं कम होंगी. ये विकासशील देशों को भी सब्सिडी इस्तेमाल के साथ सुरक्षित खाद्य आपूर्ति के अधिक मौके उपलब्ध कराएगा.

इस बैठक में भारत की ओर से पुरजोर मांग की गई कि सब्सिडी वाले अनाज को भी नए खाद्य सुरक्षा कानून में शामिल किया जाए.

अमरीका और दूसरे सदस्यों ने कहा कि ये कार्यक्रम डब्ल्यूटीओ के नियमों को तोड़ने वाले हैं. बाद में बीच का रास्ता निकालते हुए कहा गया कि इस मुद्दे पर चार साल के भीतर कोई हल खोज लिया जाएगा.

अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि माइकल फ्रामन ने डब्ल्यूटीओ सदस्यों से अतीत के मतभेद दूर करने की अपील की.

उन्होंने कहा कि बगैर समझौते के बाली से लौटना ड्ब्ल्यूटीओ के लिए बड़ा आघात होगा.

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