महिला जिसने डॉक्टरों को ग़लत साबित किया

बेस जंपर

रोमांच की तलाश हर किसी को रहती है. यही तलाश नार्वे की जुनूनी शख्सियत करीना होलकिम को भी थी. उन्हें जुनून था बेस जंपिंग का.

बेस जंपिंग यानि शरीर को हवा में उछालने का एक जबरदस्त जोखिम भरा खेल. इसमें खिलाड़ी पर्वतों, ऊंचे ब्रिजों और गगनचुंबी इमारतों से छलांग लगाते हैं और जमीन पर पहुंचने के ठीक पहले पैराशूट खोल देते हैं.

नार्वे की 35 साल की करीना होलकिम दुनिया के महानतम बेस जंपर्स और फ्री स्केयर्स में से एक हैं. वे स्काई बेस जंप पूरा करने वाली दुनिया की पहली महिला हैं. और अपने दुस्साहसों के लिए जानी जाती हैं.

मगर साल 2006 में दुस्साहसी करीना होलकिम का मौत से सामना हुआ.

एक खास स्काई डाइविंग के दौरान करीब-करीब जमीन के पास पहुंचने और पैराशूट ढंग से नहीं खुलने के कारण वे जमीन से टकरा गईं. डॉक्टरों ने कहा कि वे आजीवन अपने पैरों से नहीं चल पाएंगीं.

मगर करीना ने हिम्मत नहीं हारी. नतीजन पिछले साल एक बार फिर से वह पहाड़ की चोटी पर थीं. उन्होंने फ्रांस और स्विट्जरलैंड के बीच ते आल्पस पर्वत पर 10 हजार फुट वाला छह दिन का थका देने वाला कठिन अभियान पूरा किया.

रोमांच का पहला चस्का

करीना होलकिम की इस जिंदादिली और दिलेरी की कहानी उनके पिता से शुरू हुई.

करीना के पिता रॉक माउंटेनियरिंग और स्कीइंग के दीवाने थे.

करीना तब मात्र दो साल की थी. एक दिन पिता ने अपनी नन्हीं जान को पीठ पर लिया और चढ़ाई पर निकल गए. शायद रोमांच का चस्का करीना को तभी लग गया था.

उनका बाद का जीवन बेहद उतार-चढ़ावों से भरा रहा. वे 4 साल की ही थीं कि उनकी मां एक भयंकर कार दुर्घटना में अपनी याददाश्त खो बैठीं. वे चार महीने तक कोमा में भी रही.

जीवन में आए इन हादसों ने उन्हें सिखाया कि जीवन अनिश्चित है. अनिश्चितता के इस अहसास ने उन्हें दुस्साहसी बना दिया.

पहली मुलाकात

Image caption बेस जंपिंग शरीर को हवा में उछालने का जोखिम भरा खेल है.

जब करीना होलकिम 18 साल की थी उन्होंने एक स्पोर्ट इंवेंट के दौरान दो रॉक क्लाइबंर्स को अलकैपिटानो पहाड़ पर चढ़ाई करते देखा.

करीना बताती हैं, "वे दोनों चढ़ाई करते हुए जब चोटी पर पहुंचे तो वहां से नीचे छलांग लगा दी. थोड़ी देर बाद उनका पैराशूट खुला."

होलिकिम को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ. जीवन में पहले कभी उन्होंने इस तरह का रोमांचक खेल नहीं देखा था.

वे कहती हैं, "पंछी की तरह आसमान में उड़ने का मेरे बचपन का सपना हकीकत में बदलता दिखा."

उन्होंने तभी बेस जंपिंग को अपना लक्ष्य बना लिया. फिर वे पेशेवर बेस जंपर जैब क्वेयरलेस से मिलीं.

जैब क्वेयरलेस ने बेस जंपिंग की कलाबाजियां सिखाने के अलावा उन्हें इसके खतरों से भी आगाह किया. मगर करीना पीछे नहीं हटी.

जंपिंग की शुरुआत हुई. पहले ही बेस जंपिंग में उनके घुटनों में चोट आई. फिर भी वे नहीं रुकीं.

दुर्भाग्य का वो दिन

तारीख थी 20 अगस्त 2006. इस दिन करीना होलकिम के साथ ना भूलने वाला हादसा हुआ.

इसे विडंबना ही कहिए कि जिस होलकिम ने दुनिया भर की कई पहाड़ों की ऊंची चोटियों और गगनचुंबी इमारतों से खतरनाक बेस जंपिंग की थी उन्हें स्काई डाइविंग के सबसे बड़े हादसे का सामना करना पड़ा.

स्विट्जरलैंड में पैराग्लाइडिंग विश्व कप चल रहा था. करीना बेस जंपिंग के लिए आमंत्रित थीं.

वे हवाईजहाज में बैठी एक छोटी सी खिड़की से बाहर का नजारा भांप रही थीं. स्विट्जरलैंड को बेहद खूबसूरत कुदरती नजारों का देश माना जाता है.

होलकिम सोच रही थीं, " वाह, मैं कितनी खुशकिस्मत हूं कि मुझे यहां आने का मौका मिला."

उन्होंने हवाईजहाज से नीचे हवा में गोता लगाया. वे 100 किमी/घंटे की रफ्तार से नीचे की ओर जा रही थीं.

होलकिम बताती हैं, "जमीन पर उतरने के लिए जैसे ही मैंने पैराशूट खोलना शुरू किया इसमें गड़बड़ी आ गई. एक ओर खिंच जाने के कारण यह बुरी तरह घूमने लगा"

होलकिम उस लम्हे को याद करते हुए कहती हैं, "ओह, मैं तो गई! जमीन पर एक बड़े पत्थर से मैं जा टकराई. चारों ओर गहरा अंधेरा छा गया था."

जिजीविषा काम आई

Image caption होलकिम 100 किमी/घंटे की रफ्तार से नीचे की ओर जा रही थीं.

डॉक्टर ने होलकिम को बताया, "आपकी जान भाग्य से बच गई है. मगर अफसोस कि अब आप अपने पैरों पर फिर से कभी खड़ी नहीं हो पाएंगीं.

उनके पांव में घुटनों के पास चार और शरीर के दाहिने हिस्से में 21 जगह फ्रैक्चर हुए थे. शरीर से करीब तीन लीटर खून बह गया था.

करीना कहती हैं, "ये चमत्कार ही था कि पीठ और सिर में कोई चोट नहीं आई थी. और यही वजह है कि मैं जिंदा बच गई."

यह सुनकर करीना को लगा मानो किसी ने उन्हें जबरदस्त घूंसा मारा हो. खुद को संभालते हुए उन्होंने सोचा, "तुम कौन हो मुझे बताने वाले कि मैं अब किसी लायक नहीं रही."

इसके बाद शुरू हुआ शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षणों और इलाज का सिलसिला. आख़िरकार उन्होंने डॉक्टरों को गलत साबित कर दिया.

करीना कहती हैं, "मैं नहीं चाहती कि मेरे बुरे से बुरे दुश्मन को भी इन सबसे गुजरना पड़े. 20 सर्जरी हुई. तीन साल लगे पैरों पर खड़े होने और फिर से चलने में."

उन्होंने हार नहीं मानी. ट्रेनिंग, सर्जरी और अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत वे व्हीलचेयर से उठ खड़ी हुईं और केवल खड़ी नहीं हुईं बल्कि खुद को फिर से नई चुनौतियों के लिए तैयार किया.

और जर्मनी, फ्रांस से शुरू होकर स्विट्जरलैंड पहुंचने वाले 140 किमी के छह दिन के स्कीइंग अभियान पर निकल पड़ीं.

वे कहती हैं, "जब छोटी थी तब से स्कीइंग और माउंटेनियरिंग मेरे जीवन का हिस्सा था. मुझे इससे प्यार था."

(बीबीसी आउटलुक के कार्यक्रम पर आधारित)

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