सऊदी सुल्तान पर फ़िल्म से आगबबूला शहज़ादे

सऊदी अरब फ़िल्म
Image caption 'किंग ऑफ़ द सैंड्स' इब्न सऊद के जीवन पर आधारित है.

सीरिया की राजधानी दमिश्क में आधुनिक सऊदी अरब के संस्थापक के जीवन पर आधारित एक फ़िल्म का प्रदर्शन किया गया. हालांकि ऐसा लगता है कि सऊदी अरब के एक शहज़ादे ने इस फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की थी.

दि अरेबियन बिज़नेस वेबसाइट की रिपोर्ट में कहा गया है कि 'किंग ऑफ़ द सैंड्स' नाम की इस फ़िल्म को बीते शुक्रवार को दमिश्क में दिखाया गया. हालांकि, सऊदी शहज़ादे तलाल बिन-अबद-अल-अजीज ने इस फ़िल्म को "एक महान ऐतिहासिक हस्ती की छवि बिगाड़ने वाला" बताते हुए इसकी निंदा की थी.

इस फ़िल्म में दिवंगत सुल्तान अब्द-अल-अजीज अल सऊद के उत्कर्ष और 20वीं सदी की शुरुआत में सऊदी राज्य की स्थापना की कहानी कही गई है.

सुल्तान अब्द-अल-अजीज अल सऊद को इब्न सऊद के नाम से भी जाना जाता है.

फ़िल्म के निर्देशक नजदात अंजौर सीरियाई हैं और फ़िल्म को पहली बार बीते सितंबर को लंदन में प्रदर्शित किया गया था.

पहली फ़िल्म

यह अपनी तरह की पहली फ़िल्म है जो इब्न सऊद की ज़िंदगी में झांकती है. इसमें बिन सऊद का किरदार इतालवी अभिनेता फैबियो टेस्टी ने निभाया है.

ईरानी प्रेस टीवी ने इस साल की शुरुआत में इस फ़िल्म के बारे में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सऊदी अरब की आपत्ति इसलिए है क्योंकि इस फिल्म में इब्न सऊद को एक बेईमान, जालिम व्यभिचारी के रूप में दिखाया गया है, जो ब्रिटिश सरकार के हाथों की कठपुतली है.

फ़िल्म के ट्रेलर में युवा इब्न सऊद को एक उत्साही नेता के रूप में दिखाया गया है जो ब्रिटेन के ख़ुफ़िया अधिकारी जॉन फ़िल्बी का धर्म परिवर्तन करा रहे हैं. एक अन्य दृश्य में उन्हें बेडरूम में अपनी युवा पत्नी के साथ दिखाया गया है.

फ़िल्म के निर्देशक का कहना है कि यह फ़िल्म ऐतिहासिक नज़रिए से काफी उपयोगी है, जो 100 साल पहले की घटनाओं के बारे में बताती है, और उस आधार पर अरब जगत में आज मची अराजकता को समझा जा सकता है.

विरोध की वजह

Image caption सऊदी अरब का कहना है कि इस फ़िल्म में दिवंगत सुल्तान के साथ न्याय नहीं किया गया है.

लेबनान के हिज़बुल्ला समर्थक समाचार पत्र अल-अख़बार के मुताबिक़ ये फ़िल्म बेरूत में पहले ही प्रदर्शित की जा चुकी है और सऊदी अरब की आपत्ति शायद इस वजह से है क्योंकि वो सीरिया में असद के विरोधी लड़ाकों को समर्थन कर रहा है.

शहज़ादे तलाल बिन-अब्द-अल-अजीज ने इस फ़िल्म की कड़ी आलोचना करते हुए अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा है, "यह फ़िल्म कचरे के डिब्बे में जाएगी." शहज़ादे तलाल बिन-अब्द-अल-अजीज दिवंगत सुल्तान के 18 बेटों में एक हैं.

शहज़ादे ने बताया कि उन्होंने अपने एक साझा दोस्त से सीरियाई राष्ट्रपति बसर-अल-असद के साथ बातचीत के लिए मध्यस्थता करने के लिए कहा था, ताकि सीरिया में फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाया जा सके.

हालांकि लगता है कि उनकी ये कोशिश नाकाम हो गई क्योंकि सीरियाई टीवी में दिखाया गया कि दमिश्क में बड़ी संख्या में लोग इस फ़िल्म को देखने के लिए पहुंचे थे.

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