देवयानी केस: 'मेड से मर्डर तक इम्यूनिटी'

देवयानी खोबरागड़े

अमरीका में तैनात भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी देवयानी खोबरागड़े के मामले में कूटनीतिक इम्यूनिटी या राजनयिकों को मिलने वाले विशेषाधिकार को लेकर असमंजस बरकरार है.

क्या देवयानी खोबरागड़े राजनयिक इम्यूनिटी का दावा कर सकती हैं, विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें कई पेंच हैं. अक्सर होता है यह है कि यदि आप विदेश में राजनयिक हैं तो हत्या जैसे संगीन अपराध के बाद भी आप छूट जाते हैं.

(बातचीत ही विकल्प)

विएना संधि में इस तरह के प्रस्ताव हैं. कूटनीतिक संबंधों पर विस्तार से रोशनी डालने वाली 1961 की विएना संधि के अनुसार, विदेश में तैनात राजनयिकों पर मेज़बान देश का क़ानून लागू नहीं होगा और यदि कोई राजनयिक मेजबान देश का क़ानून तोड़ता है तो अभियोग चलाए जाने को लेकर उन्हें इम्यूनिटी हासिल होती है.

उन्हें यह 'इम्यूनिटी ऑफ़ ड्यूटी' भी हासिल होती है. हालांकि स्वदेश वापसी पर अभियोग चलाया जा सकता है. अगर कोई राजनयिक काउंसल के पद पर तैनात है, तो उसे यह कवच केवल ड्यूटी के दौरान ही हासिल होता है. विशेषज्ञों की राय है कि डिप्टी काउंसल के रूप में खोबरागड़े पर अपराध के लिए अभियोग चलाया जा सकता है.

काउंसलर जनरल को राजनयिक इम्यूनिटी के बजाय काउंसलर इम्यूनिटी हासिल है. 'काउंसलर रिलेशन्स' पर साल 1963 के विएना समझौते के अनुसार, राजनयिक को मेजबान देश के क़ानूनों से उसी स्थिति में छूट हासिल होती है जब यह मामला काउंसल ड्यूटी से संबंधित हो.

घरेलू नौकर

ज़िम्मेदारियों के हिसाब से राजनयिकों के लिए अलग क़ानून हैं. काउंसल जनरल अपने देश के लोगों की वीज़ा, कारोबार और अन्य मामलों में मदद करता है जबकि राजनयिक मेज़बान देश के लोगों के साथ सीधे जुड़कर काम करता है.

संधियों के मामले के ऑक्सफ़ोर्ड गाइड के संपादक डंकन होलिस कहते हैं, ''यदि कोई राज्य राजनयिक को गिरफ़्तार कर सकता है तो वह आगे की कार्रवाई भी कर सकता है.''

(देवयानी के खिलाफ़ न्यूयॉर्क में प्रदर्शन)

संघीय अदालत के दस्तावेज़ों के अनुसार, खोबरगाड़े ने वीज़ा आवेदन में दावा किया था कि वो अपनी नौकरानी संगीता रिचर्ड को 4,500 डॉलर (करीब पौने तीन लाख रुपये) प्रतिमाह का वेतन देंगी. श्रम क़ानूनों के मुताबिक यहां यह न्यूनतम मज़दूरी है.

अमरीकी जांचकर्ताओं के अनुसार, संगीता रिचर्ड को 573 डॉलर प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान किया गया.

होलिस कहते हैं कि नौकरानी रखना काउंसल की ड्यूटी के अंतर्गत नहीं आता. इसलिए खोबरगाड़े पर घरेलू नौकर को निर्धारित वेतन से कम मज़दूरी देने पर मुक़दमा चलाया जा सकता है.

खोबरागड़े का तबादला

उन्होंने कहा, ''राजनयिकों को मेड से लेकर मर्डर तक पर इम्यूनिटी हासिल है लेकिन अगर कोई काउंसल जनरल है तो आप इस छूट के दायरे से बाहर हैं.''

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि खोबरगाड़े का तबादला संयुक्त राष्ट्र मिशन में कर दिया गया है.

(समाधान तलाश रहा है भारत)

लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों की ओर से इस पर मुहर लगाया जाना अभी बाकी है.

इसके अलावा अमरीका के विदेश मंत्रालय की भी इस पर सहमति ज़रूरी है.

वॉशिंगटन के अटलांटिक काउंसिल में साउथ एशिया सेंटर के निदेशक शुज़ा नवाज़ कहते हैं कि खोबरबाड़े भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी हैं. वह नौकरशाही में मध्यक्रम में आती हैं.

शुज़ा नवाज़ का कहना है कि जिस तरह उनके साथ व्यवहार किया गया, उस रूप में यह दोनों देशों के बीच एक प्रतीकात्मक मुद्दा बन गया है.

सोचने का वक़्त

होलिस कहते हैं कि एक तरह से भारत में ग़ुस्से की लहर ऐसे समय पैदा हुई है जब आईएमएफ के मुखिया स्ट्रॉस कॉन पर बलात्कार और अन्य मामलों में अभियोग चलाया गया.

हालांकि यह मामला अगस्त में खारिज़ हो गया.

(आदर्श मामले में देवयानी का नाम)

नवाज़ कहते हैं, ''जिस तरह स्ट्रॉस कॉन के साथ व्यवहार किया गया, उससे फ्रांस में बेहद नाराज़गी थी. भारत में भी ऐसा ही कुछ हो रहा है. यहां लोग कह रहे हैं कि यह डिप्टी काउंसल जनरल हैं और आप कैसा व्यवहार कर रहे हैं?''

नवाज़ के मुताबिक़ खोबरगाड़े का मामला दोनों देशों के रिश्तों में सबसे बड़ी बाधा बन गया है. दोनों पक्षों को ठहरकर सोचना चाहिए और कोई समाधान निकालना चाहिए.

हालांकि इस बारे में अभी तक दोनों पक्ष अड़े हुए हैं.

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