मिखाइल ख़दूरकोफ़्स्की जर्मनी पहुंचे

मिखाइल ख़दूरकोफ़्स्की

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से माफ़ी मिलने के बाद एक दशक जेल में बिताकर रिहा हुए देश के पूर्व उद्योगपति मिखाइल ख़दूरकोफ़्स्की जर्मनी पहुंच गए हैं.

एक बयान में पचास वर्षीय मिखाइल ख़दूरकोफ़्स्की ने पुष्टि की है कि पारिवारिक कारणों की वजह से उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन से माफ़ी की गुहार लगाई थी.

मिखाइल ख़दूरकोफ़्स्की की मां कैंसर से पीड़ित हैं.

मिखाइल ने अपना जुर्म कुबूल नहीं किया है और कहा है कि उन्हें गलत तरीके से सज़ा दी गई.

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने इससे पहले कहा कि उन्होंने 'मानवीयता के आधार पर' मिखाइल के माफ़ीनामे पर दस्तख़त किए हैं.

मिखाइल ख़दूरकोफ़्स्की, युकोस नामक बड़ी तेल कंपनी के प्रमुख हुआ करते थे, ये कंपनी अब बंद हो चुकी है.

एक समय ऐसा भी था जब वे रूस के सबसे धनी व्यक्ति थे और वे विपक्षी दलों को वित्तीय मदद देते थे.

उन्हें कर चोरी और अन्य मामलों में जेल की सज़ा सुनाई गई थी.

जर्मन चांसलर ख़ुश

जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल का कहना है कि वे मिखाइल ख़दूरकोफ़्स्की की रिहाई से ख़ुश हैं.

मिखाइल ख़दूरकोफ़्स्की को उत्तर-पश्चिमी रूस के करेलिया क्षेत्र में बंधक बनाकर रखा गया था जहां से उन्हें शुक्रवार दोपहर छोड़ दिया गया.

समाचार एजेंसी इंटरफ़ैक्स के हवाले से रूस की फ़ेडरल पैनल सर्विस का कहना है, ''ख़दूरकोफ़्स्की ने विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट की मांग की थी जिसे पूरा कर दिया गया. जेल से रिहा होने के बाद वे जर्मनी रवाना हो गए. उनके आग्रह पर विमान की व्यवस्था की गई और ज़रूरी कागज़ी कार्रवाई पूरी की गई.''

जर्मन विदेश मंत्रालय ने बाद में पुष्टि करते हुए कहा कि मिखाइल ख़दूरकोफ़्स्की सेंट पीटर्सबर्ग से बर्लिन पहुंच गए हैं.

उनसे मिलने के लिए जर्मन विदेश मंत्रालय का एक प्रतिनिधि भी हवाई अड्डे पर मौजूद था.

ख़दूरकोफ़्स्की की मां मरीना की उम्र 79 वर्ष है.

लेकिन ख़दूरकोफ़्स्की के पिता बोरिस ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि वे और उनकी पत्नी अभी मॉस्को में ही हैं और शनिवार को जर्मनी पहुंचेंगे.

ख़दूरकोफ़्स्की वर्ष 2003 से ही रूस की जेल में बंद थे और तय कार्यक्रम के मुताबिक उन्हें अगले वर्ष अगस्त में रिहा किया जाना था.

रूस के राष्ट्रपति ने ख़दूरकोफ़्स्की को माफ़ी तब दी है जब देश सांसदों ने कम से कम बीस हज़ार क़ैदियों को रिहा करने का समर्थन किया है.

पुतिन ने पुष्टि की है कि ये माफ़ी पूसी रॉयट बैंड के दो सदस्यों और ग्रीनपीस के कार्यकर्ताओं पर भी लागू होगी.

विश्लेषकों का कहना है कि पुतिन इस पूरी कवायद के ज़रिए मानवाधिकारों के मामले में रूस के ख़िलाफ़ बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आलोचना को कम करने की कोशिश कर रहे हैं.

रूस में अगले वर्ष फ़रवरी में शीतकालीन ओलंपिक खेलों का आयोजन होना है.

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