'दक्षिण अफ्रीका ना जाते, तो गांधी गांधी न होते'

महात्मा गाँधी

महात्मा गाँधी से एक बार एक ब्रितानी पत्रकार ने सवाल पूछा, " आप आधुनिक सभ्यता के बारे में क्या सोचते हैं?" उन्होंने जवाब दिया, "मैं सोचता हूँ कि यह एक अच्छा विचार होगा."

महात्मा गाँधी पश्चिम के बैरी नहीं थे. उन्होंने तीन गोरों पर अपने परामर्शदाता के तौर पर विश्वास किया. ये थे हेनेरी साल्ट, जॉन रस्किन और लियो टॉल्स्टॉय. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब लंदन पर बम गिराए गए तब वह रोए थे, और यहाँ तक कि पहले विश्वयुद्ध में लड़ने के लिए उन्होंने भारतीयों की भर्ती में सहयोग दिया.

साल 1893 से 1914 तक अपने शुरूआती जीवन के लगभग दो दशक उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में बिताए. दक्षिण अफ्रीका में उनका अधिकतर समय एक वक़ील और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर गुज़रा.

गाँधी ऐसे दक्षिण अफ्रीका पहुँचे थे जो भीतर से बँटा हुआ था, जहाँ अन्याय हो रहा था, जहाँ ब्रितानी और डच मूल के अफ्रीकियों के ही अलग- अलग उपनिवेश थे. यहाँ मूल अफ्रीकियों के साथ ही भारत से लाए गए मजदूर और पेशेवर कर्मचारी रहते थे.

इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा ने लिखा है कि कैसे इस 'विचित्र परिदृश्य' में गाँधी के व्यक्तित्व के अहम पहलूओं - 'स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, धार्मिक बहुलतावादी और महात्मा' का निखार हुआ.

रामचंद्र गुहा की हाल ही में प्रकाशित हुई किताब 'गाँधी बिफ़ोर इंडिया' बताती है कि कैसे दक्षिण अफ्रीका ने 'जोशीले भोले वक़ील' को एक 'चतुर, दूरदर्शी और केंद्रीकृत विचारों वाले कार्यकर्ता' में बदल दिया. बीबीसी संवाददाता शौतिक बिस्वास ने रामचंद्र गुहा से बात कर जाना कि आज की दुनिया में गाँधी कितने प्रासंगिक हैं.

आपने लिखा है कि गाँधी के विचार आज भी ज़िंदा हैं. आप हाल ही के कुछ उदाहरण दे सकते हैं?

Image caption 1914 में सफ़ेद कपड़े पहन शोक प्रकट करते गांधी.

भारत में गाँधी के विचारों में सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली है भाषाई बहुलता और विविधता के प्रति हमारी संवैधानिक प्रतिबद्धता. हम हर दिन इसे स्वीकारते हैं.

यह सच है कि बहुत से राजनेता अपने व्यवहार में गाँधी को नकार देते हैं.

लेकिन राजनीति के बाहर, एक उदाहरण के तौर पर सामाजिक आंदोलन में गाँधी एक प्रेरणा के तौर पर रहते हैं.

ऐसे सैकड़ों लोग और समूह हैं जो दुनिया की नज़रों से दूर ग्रामीण स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करते रहते हैं. यह सभी कहीं न कहीं गाँधी से कम या ज्यादा प्रभावित हैं.

लेकिन अगर सच में गाँधी के विचार बचे हैं तो क्या वो आज के ज़माने में प्रासंगिक हैं? अगर हैं तो कैसे?

मेरे विचार में, गाँधी की विरासत के चार पहलू केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं.

पहला - अन्यायपूर्ण क़ानूनों या सत्तावादी सरकारों का अहिंसक विरोध.

दूसरा - दो धर्मों के बीच आपसी समझ को बढ़ावा और धार्मिक सहिष्णुता.

तीसरा - एक ऐसा आर्थिक ढाँचा जो प्रकृति के साथ खिलवाड़ ना करे.

चौथा- सार्वजनिक बहस में शालीनता और सार्वजनिक लेन-देन में व्यक्तिगत पारदर्शिता.

आप उनके साफ़ तौर पर दिखते विरोधाभासों को कैसे स्पष्ट करेंगे? वह एक महात्मा थे और साथ ही एक पक्के नेता भी थे. पश्चिम के विरोधी थे लेकिन शासकों के लिए उनमें कड़वाहट नहीं थी. हिंदू मान्यताओं को मानते थे लेकिन मानवाधिकारों के संरक्षक भी थे. उन्होंने अहिंसा को अपनाया लेकिन प्रथम विश्वयुद्ध लड़ने के लिए भारतीयों की भर्ती भी की. क्या उन्हें नहीं पता था कि उन्हें क्या करना है?

गाँधी ने एक लंबा जीवन जिया और वह राजनीति और सामाजिक कामों में पाँच दशक से ज्यादा सक्रिय रहे.

इसलिए गाँधी को अपने ही ख़िलाफ़ प्रस्तुत करना आसान है. ऐसा अन्य महान लेखकों विंस्टन चर्चिल और जॉर्ज बर्नाड शॉ के साथ भी है.

जाति और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर वह संकुचित धारणा छोड़कर और प्रगतिशील विचारों को अपनाकर लगातार बेहतर होते गए हैं.

लेकिन उनकी बौद्धिक निरंतरताओं की कमी की व्याख्या करना और खाने या ब्र्ह्मचर्य को लेकर उनकी निजी का विश्लेषण अभी बाक़ी है. 'गाँधी बिफ़ोर इंडिया' और उसका लिखे जा रहे दूसरे भाग में यही करने की कोशिश की गई है.

क्या आपको लगता है कि अगर गाँधी अपने रूढ़ीवादी जन्मस्थान से निकल कर एक विकासशील देश में नहीं जाते तो वह उतने बड़े नेता नहीं बन पाते जितने बड़े वह बने?

अगर गाँधी एक वक़ील के तौर पर राजकोट या बॉम्बे में सफल हो जाते तो आज हम यह बात नहीं कर रहे होते. अगर वह भारत में रहते तो उनके क्लाइंट मध्यवर्गीय हिंदू होते या अधिकतर गुजराती होते.

दक्षिण अफ्रीका से न्यौता मिलने की वजह से वह पेशेवर असफलता और रूढ़ीवादी आदतों और विचारों से बच गए.

वहाँ क्योंकि उनके क्लाइंट गोरे लोगों की सामजिक असमानता का सामना करने वाले होते थे इसलिए उन्होंने एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी अपना सामानांतर करियर शुरू किया.

Image caption 1901 में गाँधी की पत्नी कस्तूरबा अपने बच्चों के साथ.

गाँधी दक्षिण अफ्रीका में केवल एक पेशेवर ही नहीं बने बल्कि एक विचारक और नेता भी और यहाँ भारत में वह सच्चे भारतीय भी बने.

आपने गाँधी के दक्षिण अफ्रीका के अभियान को "दक्षिण अफ्रीका में रह रहे भारतीयों का राष्ट्रवाद" का शुरूआती उदाहरण बताया है. क्या आपको लगता है कि अब किसी विशेष जगह के भारतीयों का राष्ट्रवाद विवादस्पद हो गया है, क्योंकि इसे अक्सर दक्षिण पंथी भारतीय राष्ट्रीयता से जोड़कर देखा जाता है?

दक्षिण अफ्रीका में भारतीय अलग अलग पृष्ठभूमियों से आए थे. आज से लगभग 100 साल पहले गाँधी ने जो संघर्ष शुरू किया, शुरुआत में उसे व्यापारियों से सहारा मिला था लेकिन बाद में यह मजदूरों और खोमचे वालों का संघर्ष बन गया.

दूसरी तरफ जिन भारतीय प्रवासियों की आप बात कर रहे हैं, वह अमरीका में हैं और वह उच्च मध्यम वर्ग है. यह हिंदुत्व के लिए मज़बूत आधार प्रदान करता है.

यह स्पष्ट नहीं है कि केवल आर्थिक लाभ राजनैतिक प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है या नहीं. हालांकि या फिर यहाँ पर और भी जटिल मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाएं चल रही हैं.

आप कहते हैं कि गाँधी जब 1915 में भारत लौटे तब पूरी तरह से तैयार और एक बृहत सामाजिक और ऐतिहासिक पैमाने पर विभिन्न काम करने के लिए सभी तरह से दुरुस्त थे. उसी समय, आप कहते हैं कि उस समय गाँधी अवश्य ही एक सामुदायिक नेता थे जो दक्षिण अफ्रीका में लगभग एक लाख भारतीयों के हितों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. तो गाँधी इससे ऊपर कैसे उठे?

वह 1901 में बॉम्बे बार में नए सिरे प्रयास करने भारत लौटे थे. एक साल बाद ही वह दक्षिण अफ्रीका लौट गए. उन्होंने यह उम्मीद की थी कि जब दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकार सुरक्षित हो जाएंगे तब वह भारत वापस लौट सकेंगे.

1914 उन्होंने इसका इंतज़ार किया। 1914 से कुछ समय पहले ही उनके सबसे क़रीबी मित्र प्रांजीवन मेहता ने उनसे भारत में राजनीतिक करियर शुरू करने की अपील की थी.

अगर हम पीछे मुड़ कर देखें तो शायद वो और हम सौभाग्यशाली रहे कि वह अफ्रीका उतने समय तक रुके जितने समय तक वह रुक सकते थे. क्योंकि इसी की वजह से उन्हें अपने सामजिक और राजनीतिक विचारों का विकास करने का और एक स्वतंत्र नेता के तौर पर उभरने का मौका मिला.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार