सुनील जेम्स ने दिया रोंगटे खड़े करने वाला ब्यौरा

सुनील जेम्स

भारतीय नाविक सुनील जेम्स को उनके जहाज़ 'एमटी ओसियन सेंचुरियन' पर टोगो के निकट हुए समद्री लुटेरों के हमले के दौरान लुटेरों की मदद करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया था.

सुनील जेम्स का जहाज़ टोगो के निकट समुद्री लुटेरों का शिकार हो गया था. इधर सुनील के 11 महीने के बेटे विवान की इस महीने सेप्टीसीमिया से मृत्यु हो गई थी.

सुनील जेम्स का परिवार इस साल जुलाई से ही उनकी रिहाई के लिए संघर्ष कर रहा था. रिहाई के बाद बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य से बातचीत में सुनील ने बताई अपने पिछले पाँच महीनों की आप बीती.

आपको वहाँ किन परिस्थितियों में रखा गया था?

टोगो में पहले 47 दिन हमें अच्छी परिस्थितियों में नहीं रखा गया था. हमें बड़े अपराधियों के साथ रखा गया था. हमें जिस कमरे में रखा गया था वह 200 वर्ग फीट का था. उसमें केवल 20 लोग आ सकते थे लेकिन उसमें 80 लोगों को रखा गया था. उसमें इतनी जगह भी नहीं थी कि हम अपने पैर सीधे कर सकें. हमें 12 घंटे सिर्फ बैठाकर रखा जाता था. वहाँ साफ़ सफ़ाई भी अच्छी नहीं थी. स्वास्थ्य सेवाएं अच्छी नहीं थीं. 2000 अपराधियों के लिए एक ही टॉयलेट था.

आपको वहाँ खाने को क्या मिलता था?

ज्यादा कुछ मिलता नहीं था. हम सुबह ब्रेड का एक पीस खाते थे. सरकार की तरफ से हर दूसरे दिन खाना मिलता था. लेकिन वो खाना हमारे लिए नहीं होता था. हम वो खाना नहीं खा सकते थे.

आप ख़ुद समुद्री डाकुओं का निशाना बने थे. फिर भी आपको गिरफ्तार किया गया और जेल में रखा गया. आपकी हालत कैसी थी?

Image caption सुनील जेम्स का जहाज़ टोगो के निकट समुद्री लुटेरों का शिकार हो गया था.

समुद्री डाकुओं का निशाना बनने के बाद मैं जहाज लेकर टोगो गया था और मैंने टोगो की नौसेना और सरकार से सहायता माँगी थी. लेकिन उन्होंने सोचा कि मैं ही डाकुओं का सरदार हूँ. उन्होंने मुझे गिरफ़्तार कर लिया और कहा कि जब तक जाँच पूरी होगी तब तक आप हमारी गिरफ्त में रहेंगे. वह हमसे कहते थे कि आपके खिलाफ कोई सबूत नहीं है. आपको जल्दी छोड़ा जाएगा. इसके बाद भी उन्होंने जाँच के लिए मुझे पाँच महीने क़ैद में रखा. हमारे साथ अन्याय हुआ. पिछले 17 साल से मैं गहरे समुद्र में जहाज़ ले जाता रहा हूँ लेकिन ऐसा होते हुए मैंने कभी नहीं देखा.

जब आपको गिरफ्तार किया गया तो आपकी कैसी हालत थी?

समुद्री डाकुओं ने हमें 24 घंटे के लिए बंदी बनाने के बाद छोड़ दिया था. उन्होंने मेरी नाक तोड़ दी थी. मेरे हाथ में ज़ख्म था. उसमें से लगातार ख़ून निकल रहा था. मेरे चालक दल का साहस बहुत कम हो गया था. उन्हें यह समझाना बहुत मुश्किल था कि हमें यहाँ से एंकर उठाकर जल्दी से जल्दी निकलना पड़ेगा क्योंकि वहाँ आस-पास और भी कई छोटे-छोटे जहाज़ थे उनमें कोई भी छिपा हो सकता था. हमें यह डर था कि हमें कोई और समुद्री डाकू ना पकड़ ले. इसलिए हम सुरक्षित स्थान पर जाना चाहते थे. हमने नेवी को बुलाया और उनसे सहायता माँगी. मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि मुझे पाँच महीने जाँच के लिए कैद में रखा जाएगा.

यह पाँच महीने आपकी निजी ज़िंदगी के लिए भी बहुत मुश्किल रहे?

Image caption सुनील कहते हैं कि समुद्र उनकी ज़िंदगी है और फिर से समुद्र में जाएँगे

इन पाँच महीनों में मेरा और मेरी बीवी का सब कुछ बर्बाद हो गया. अब हमारे जीवन में भविष्य के लिए कुछ नहीं बचा है. हमारे लिए सब कुछ विवान था और आज वो हमारे साथ नहीं है. मैं कभी नहीं चाहूँगा कि किसी के भी जीवन में ऐसा मौका आए. किसी के जीवन में ऐसा नहीं होना चाहिए कि सब कुछ होते हुए भी कोई अपने बच्चे को बचाने की कोशिश भी न कर सके. हम पहले ही बुरी स्थिति में थे. हम रोज़ दुआ करते थे कि हमें जल्दी छोड़ा जाए.ऐसे में जब मेरे बच्चे के साथ ऐसा हो गया तो एक समय तो भगवान के ऊपर से भी भरोसा उठ गया. इस झटके का ज़ख्म इस जन्म में तो भरा नहीं जाएगा.

क्या आपको टोगो की सरकार से कोई नाराज़गी है?

मुझे नाराज़गी नहीं है. मेरा केवल इतना ही कहना था कि आपको जो भी करना है जल्दी कीजिए. अगर वो जांच प्रक्रिया कुछ जल्दी पूरी कर लेते तो यह मेरे और मेरे चालक दल के परिवारों के लिए अच्छा रहता. हम कोई अपराधी नहीं थे, आम इंसान थे. 17 साल में मेरे साथ किसी भी देश में ऐसा नहीं हुआ.

क्या आप दोबारा समुद्र में जाएंगे?

समुद्र मेरी ज़िंदगी है. मैं हमेशा समुद्र में जहाज़ लेकर गया हूँ. पिछले साल तक मेरी पत्नी भी जहाज़ पर मेरे साथ जाती थी. बेटा होने के बाद वह नहीं जा सकी. लेकिन कुछ बेवकूफ़ समुद्री लुटेरों की वजह से हम समुद्र में जहाज़ ले जाना नहीं छोड़ सकते. चाहे कुछ भी हो जाए. मैं, मेरी पत्नी और मेरा परिवार यह दिखाना चाहता हैं कि हम डरने वाले नहीं हैं. मेरा हमेशा यह विश्वास रहा है कि सच की जीत होती है और न्याय मिलता है.

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