मिस्र: मुस्लिम ब्रदरहुड 'आतंकी संगठन' घोषित

मुस्लिम ब्रदरहुड, मोरसी

मिस्र में सेना समर्थित अंतरिम सरकार ने मुस्लिम ब्रदरहुड को 'आतंकी संगठन' घोषित कर दिया है. सरकार का कहना है कि इस हफ़्ते की शुरुआत में एक पुलिस मुख्यालय पर किए गए हमले में मुस्लिम ब्रदरहुड का हाथ है.

मुस्लिम ब्रदरहुड को पहले ही ग़ैरक़ानूनी घोषित किया जा चुका है. ब्रदरहुड के नेता मोहम्मद मुर्सी पिछले साल हुआ राष्ट्रपति चुनाव जीते थे और उन्हें पद से हटाया जा चुका है.

ब्रदरहुड के हज़ारों समर्थक गिरफ़्तार हो चुके हैं. लेकिन अब मुस्लिम ब्रदरहुड को 'आतंकी संगठन' घोषित किए जाने से प्रशासन को और ज़्यादा ताकत मिल गई है.

मिस्र के उप प्रधानमंत्री होसाम ऐस्सा ने सरकार के इस कदम का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्यों या इसकी गतिविधियों के लिए पैसा देने वाले या इसका प्रचार करने वालों को सज़ा मिलेगी.

'मिस्र डरा हुआ है'

Image caption मिस्र के मंसूरा में मंगलवार को हुए धमाके में 16 लोगों की मौत हो गई.

उन्होंने कहा कि ये फ़ैसला मंगलवार मंसूरा में पुलिस हेडक्वार्टर पर आत्मघाती धमाके के जवाब में लिया गया है. इस धमाके में 16 लोगों की मौत हुई और 100 से ज़्यादा ज़ख़्मी हो गए थे.

ऐस्सा ने कहा, "उत्तर से लेकर दक्षिण तक मिस्र, मुस्लिम ब्रदरहुड के इस भयानक अपराध से डरा हुआ है."

उन्होंने कहा, "मिस्र और देश के लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा और मुस्लिम ब्रदरहुड के इस साफ़ ऐलान के बाद कि ये सिर्फ़ हिंसा जानता है, ये फ़ैसला लिया गया है. न मिस्र और न उसके लोगों के लिए ये संभव है कि वो मुस्लिम ब्रदरहुड के आतंकवाद के आगे झुकें."

हालांकि मुस्लिम ब्रदरहुड इस हमले में हाथ होने से इनकार कर चुका है और एक अल-क़ायदा समर्थक समूह ने इसकी ज़िम्मेदारी ली है.

मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थक 3 जुलाई से ही प्रदर्शन कर रहे हैं. मोहम्मद मुर्सी की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को मुस्लिम ब्रदरहुड के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के बाद 3 जुलाई को हटा दिया गया था.

पाबंदी

सरकार के अफ़सर मिस्र में चरमपंथी हमलों के लिए मुस्लिम ब्रदरहुड को ज़िम्मेदार ठहराते हैं हालांकि मुस्लिम ब्रदरहुड इन आरोपों से इनकार करता है.

मिस्र में इससे पहले साल 1954 में मुस्लिम ब्रदरहुड पर पाबंदी लगाई गई थी. मुस्लिम ब्रदरहुड की एक राजनीतिक शाखा, फ़्रीडम एंड जस्टिस पार्टी भी है, जिसकी स्थापना साल 2011 में हुई थी जब राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को सत्ता से हटा दिया गया था.

मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से हटाए जाने और 2012 के संविधान के निलंबन के बाद काहिरा की प्रशासनिक अदालत और सामाजिक एकता मंत्रालय को मुस्लिम ब्रदरहुड के क़ानूनी दर्जे की समीक्षा का काम दिया गया था.

इसी साल सितंबर में काहिरा की अदालत ने मुस्लिम ब्रदरहुड और इसके किसी भी संगठन या इससे आर्थिक समर्थन पाने वाली संस्था पर पाबंदी लगा दी थी.

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