बग़दाद में ईसाई बहुल इलाक़े निशाने पर

इराक़ में धमाका

इराक़ की राजधानी बग़दाद के ईसाई बहुल इलाकों में दो बम धमाकों में कम से कम 35 लोगों की मौत हो गई है.

अधिकारियों का कहना था कि एक धमाका एक कैथोलिक गिरजाघर के नज़दीक उस वक्त हुआ जब श्रद्धालु क्रिसमस के मौके पर प्रार्थना सभा के बाद चर्च से बाहर निकल रहे थे. इस धमाके में 24 लोग मारे गए. एक बाज़ार में हुए दूसरे धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई.

दोनों धमाके बग़दाद के डोरा इलाके में हुए. अल-अथोरियन के मुख्यत: ईसाई इलाके के एक बाज़ार में धमाके के कुछ देर बाद ही सेंट जॉन कैथोलिक चर्च के बाहर खड़ी गाड़ी में दूसरा बम धमाका हुआ.

ईसाई नेताओं ने इस बात से इनकार किया है कि हमलों के निशाने पर श्रद्धालु थे. अभी तक किसी गुट ने भी हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

निशाने पर गिरजाघर

इराक़ के प्राचीन ईसाई समुदाय की तादाद, अनुमानित नौ लाख से घटकर हाल के सालों में आधे से कम रह गई है.

राजधानी के काराडा इलाके के सेंट जोसफ़ चैल्डियन चर्च में एक प्रार्थना सभा के दौरान पादरी साद सेरोब ने सभी इराकियों के लिए शांति और सुरक्षा की बात कही.

साल 2003 में सद्दाम हुसैन के अपदस्थ होने के बाद से इराक़ में गिरजाघरों को निशाना बनाया गया है.

बग़दाद के कैथोलिक कैथेड्रल पर 2010 में बंदूकधारियों ने हमला किया था जिसमें 50 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

'सीरियाई संघर्ष का असर'

इस साल जातीय हिंसा में सात हज़ार से ज़्यादा नागरिक मारे गए हैं. साल 2008 के बाद किसी भी साल में मरने वालों की ये सबसे ज़्यादा संख्या है.

अप्रैल में एक सरकार विरोधी सुन्नी शिविर पर सेना के हमले के बाद हिंसा में तेज़ी आई.

सीरिया में चल रहे संघर्ष से भी इराक़ में हमलों में तेज़ी आई है. इनमें से कई हमलों में अल-क़ायदा शामिल था.

रविवार को इराक़ी प्रधान मंत्री नूरी अल-मलिकी ने बीबीसी को बताया था कि सीरियाई संघर्ष ''क्षेत्र में आतंकवाद'' की वजह थी.

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