पाकिस्तानः कैद ब्रितानी नागरिक ने की ब्रिटेन से अपील

पाकिस्तान की मस्जिद में नमाज

ईश निंदा के आरोप में पाकिस्तान की जेल में पिछले महीने से बंद अल्पसंख्यक अहमदिया संप्रदाय के एक ब्रितानी नागरिक मसूद अहमद ने ब्रिटेन से मदद की अपील की है.

पिछले महीने 72 वर्षीय मसूद अहमद को ईश निंदा के आरोप में लाहौर में उनकी होम्योपैथिक क्लीनिक से गिरफ्तार किया गया था.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्तान में जहां अहमदिया संप्रदाय को इस्लाम विरोधी माना जाता है और ईश निंदा क़ानून का इस्तेमाल इस समुदाय को परेशान करने के लिए किया जा रहा है.

मसूद अपनी आजादी से ज़्यादा अपने बच्चों के लेकर फिक्रमंद है जो ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया में रहते हैं. मसूद यह सोच कर दुखी है कि बच्चें उनकी सलामती को लेकर फिक्रमंद होंगे.

मसूद की क्लीनिक में दो लोग मरीज बन कर आए और मजहबी मामलों पर बात करने लगे. उन्होंने मसूद को कुरान की आयतें पढ़ते हुए अपनी मोबाइल से चुपके से रिकॉर्ड कर लिया और पुलिस बुलाकर गिरफ्तार करवा दिया.

क़ानून

पाकिस्तान का क़ानून अहमदिया समुदाय को गैर-इस्लामिक समुदाय मानता है इसलिए बड़े पैमाने पर वहां लोग इस समुदाय को शक की नज़र से देखते हैं.

अहमदिया समुदाय के लोगों की भी पवित्र किताब कुरान ही है लेकिन वो अपने संप्रदाय का प्रवर्तक मिर्जा ग़ुलाम अहमद को मानते हैं. वो उन्हें पैगम्बर का दर्जा देते हैं जो इस्लामिक मान्यता के ख़िलाफ़ है.

पाकिस्तान में अगर अहमदिया समुदाय के लोग मुसलमानों की तरह ही अपना नाम रखते हैं, उनकी तरह ही व्यवहार करते हैं और अपने धार्मिक स्थलों और रीति-रिवाजों के लिए इस्लामिक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें तीन साल तक की सज़ा हो सकती है.

Image caption मसूद अहमद के मुताबिक वो पहले से ही निशाने पर थे.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस क़ानून का इस्तेमाल दक्षिणपंथियों के द्वारा अहमदिया समुदाय के लोगों को क़ानूनी शिकंजे में फंसाने के लिए हो रहा है. अहमदिया समुदाय आए दिनों कट्टरपंथियों की हिंसा का भी शिकार हो रहा है.

अल्पसंख्यकों के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता असमां जहांगीर का कहना है कि अगर आप अल्पसंख्यकों के ऊपर होने वाले उत्पीड़न को औपचारिक रूप प्रदान करते हैं तो आप कट्टरपंथी ताकतों की मदद करते हैं.

मसूद अहमद बताते हैं, ''गिरफ़्तारी के पहले से ही उन पर नज़र रखी जा रही थी. कुछ दिन पहले मेरी कार पर और मेरे घर के बाहर एक काला निशान किसी ने लगाया था लेकिन गिरफ़्तारी का आभास नहीं था.''

दोहरी नागरिकता

Image caption मोहम्मद हसन मोआविया का कहना है कि अहमदियों के साथ होने वाला सलूक कानूनी है.

मसूद अहमद के पास पाकिस्तान और ब्रिटिश की दोहरी नागरिकता है. वह वापस लौट कर अपने बच्चों को पाकिस्तानी मूल्यों के साथ पालना चाहते हैं और चिकित्सा के माध्यम से लोगों की मदद करना चाहते हैं.

पुलिस के मुताबिक लगभग 10 पड़ोसियों ने उनके ख़िलाफ़ चश्मदीद गवाही दी है. उन्होंने कहा कि "उनमें से कई उनके लिए चिंतित है और जेल में उन्हें देखने आए थे. मैं धार्मिक बहस में हिस्सा नहीं लेता हूं. मैं एक डॉक्टर हूं, एक पेशेवर हूँ."

एक उभरते हुए दक्षिणपंथी धार्मिक समूह खत्तम-ए-नबुव्वत के साथ जुड़े मोहम्मद हसन मोआविया का कहना है कि अहमदियों के ख़िलाफ़ साहित्य बांटना उनका क़ानूनी और संवैधानिक अधिकार है. यह संगठन अहमदिया विरोधी साहित्य बांटने और आंदोलन चलाने का काम करता रहा है.

अहमदिया समूहों के अनुसार 20 से अधिक मामले सिर्फ इस साल उनके ख़िलाफ़ दर्ज किए गए है.

मसूद अहमद अपने फैसले के लिए इंतजार करते हुए कहते है कि " मैं अखबारों में निशाना बनाए जा रहे अल्पसंख्यकों के बारे में पढ़ा करता था, अब मैं खबर में हूँ."

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