पाकिस्तान में एक टीवी शो पर क्यों मचा बवाल?

  • 27 दिसंबर 2013
पाकिस्तान में मीडिया

पाकिस्तान के एक निजी टीवी चैनल पर प्रसारित हुए एक कार्यक्रम को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों ने कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की है.

'ख़ुफ़िया' शीर्षक से प्रसारित हुए इस कार्यक्रम पर ट्विटर पर लोगों ने अनैतिकता का आरोप लगाते हुए कहा, सड़कों पर लोगों को छेड़कर कार्यक्रम की मेज़बान नैतिकता और मानवाधिकार का उल्लंघन कर रही थी.

ताजा विवाद कुछ विश्लेषकों को 2010 की इसी तरह की एक घटना की याद दिलाता है जब एक टीवी होस्ट के नेतृत्व में महिलाओं के एक समूह के बर्ताव पर मीडिया में काफ़ी कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी.

वे 'नैतिक मामलों पर नज़र रखने' की इस तरह की घटनाओं को देश में तेजी से बढ़ते निजी मीडिया उद्योग में रेटिंग के लिए प्रतिस्पर्धा का परिणाम मानते है.

'ख़ुफ़िया' शीर्षक से चलने वाला यह कार्यक्रम 15 दिसंबर से एक नए चैनल 'अब तक' पर प्रसारित किया जा रहा है. इसकी मेज़बानी एक युवती कर रही है जो कराची में समलैंगिकों और हिजड़ों का पीछा करते हुए उनके घर तक जा पहुँचती हैं और उन्हें अनैतिक होने का आरोप मढ़ देती हैं.

कार्यक्रम में एक समय तो वह उन लोगों को ये स्वीकार करने के लिए मजबूर करती हैं कि वे समलैंगिक हैं और फिर उन्हें अपराधी घोषित कर देती हैं.

शो के दौरान वह लगातार अपने दर्शकों को यह बताती रहती हैं कि देश में एड्स और हेपेटाइटिस बढ़ाने के लिए ऐसे लोग ही ज़िम्मेदार हैं.

मेज़बान महिला पीड़ित से पूछती हैं कि 'एक पुरुष होकर दूसरे पुरूष के साथ संबंध रखने के क्या मायने हैं?' वह हिजड़ों से उनके सेक्सुएलिटी यानी लैंगिकता का प्रमाण भी माँगती दिखती हैं.

कार्यक्रम के एक दूसरे सीन में दिखाया जाता है कि कैसे कार्यक्रम की मीडिया टीम पुलिस की मदद से समलैंगिकों के घर पर धावा बोलती है. शो की मेज़बान सड़क पर 'इसे पकड़ो, पकड़ो' चिल्लाते हुए उनका पीछा करती हैं.

पीछा करके पकड़ने के बाद वह उनका साक्षात्कार लेती हैं. आँसुओं से भरा पीड़ित मानता है कि वह एक पुरुष ही है (न हिजड़ा है और न ही नपुंसक है) लेकिन 'अनैतिक कार्यों में लगे' होने की वजह से लड़कियों जैसे कपड़े पहनकर घूम रहा है.

मानवाधिकार मामलों के पूर्व मंत्री कार्यक्रम में अतिथि के रूप में मौजूद रहे. वे यह खतरा भी जताते हैं कि ये लोग 'जिस तरह हर चौराहे पर मौजूद हैं उससे लगता है कि वे आतंकवादी या जासूस भी हो सकते हैं'.

निजता का हनन

पाकिस्तान के प्रमुख पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में इस कार्यक्रम को लेकर काफ़ी गुस्सा है. उन लोगों ने पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पेमरा) से इस मामले में दखल देने को कहा है.

पाकिस्तान की प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता बीना सरवर ने ट्वीट किया है, "मैंने #अबतक चैनल के खिलाफ निजता के हनन के मामले में पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण के पास शिकायत दर्ज की है."

उन्होंने अपने ब्लॉग पर भी इस शो के खिलाफ लिखा है. दैनिक डॉन के पूर्व संपादक सलीम आसमी ने पेमरा से मांग की है कि इस मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ 'सख्त कार्रवाई' करें.

पेमरा की वेबसाइट पर दर्ज शिकायत में उन्होंने कहा है कि 'किसी की व्यक्तिगत ज़िन्दगी में दख़ल देने का हक़ किसी को भी नहीं है. अब तक की मीडिया टीम का किसी के घर में इस तरह घुसना बिल्कुल बर्दाशत के लायक नहीं है."

2013 की शुरूआत में इसी तरह मारिया ज़ुल्फ़िकार ख़ान ने इस तरह के शो की मेजबानी की थी जिस में एक चीनी मसाज सेंटर में काम करने वाले लोगों की पहचान को उजागर किया गया था.

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