बांग्लादेशः प्रदर्शनकारियों और पुलिस में टकराव, दो की मौत

  • 30 दिसंबर 2013
बांग्लादेश, चुनाव, विरोध प्रदर्शन

बांग्लादेश में अगले हफ़्ते होने वाले चुनाव के विरोध में जारी प्रदर्शनों के दौरान बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी के समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हुआ है.

पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने रैली करने पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन किया, जिसके चलते दो लोगों की मौत हो गई है.

मुख्य विपक्षी दल की माँग है कि चुनाव से पहले वर्तमान प्रधानमंत्री शेख़ हसीना इस्तीफ़ा दें और 'चुनाव से पहले एक निष्पक्ष सरकार बने'.

सरकार ने विपक्षी दल की माँग यह कहकर ठुकरा दी कि चुनाव संवैधानिक ज़रूरत है.

हिंसा की आशंका के बीच बांग्लादेश में सेना तैनात

ख़बरों के अनुसार पुलिस ने ईंट-पत्थर और देशी बम फेंक रहे प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछार की और रबड़ की गोलियाँ चलाईं.

मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की नेता ख़ालिदा ज़िया ने इस चुनाव को 'हास्यास्पद' बताते हुए राजधानी ढाका में पुलिस की पाबंदी के विरोध में एक मार्च का आह्वान किया था.

घर में नज़रबंद

पुलिस ने रविवार को ज़िया के घर को घेर लिया ताकि वह प्रदर्शनकारियों को संबोधित न कर सकें. पुलिस ने इस बात से इनकार किया कि ख़ालिदा ज़िया को एक तरह से घर में नज़रबंद कर दिया गया है.

बांग्लादेश की पूर्व-प्रधानमंत्री ज़िया ने अपने घर के बाहर पत्रकारों से कहा, "यह सरकार अलोकतांत्रिक और अवैध है. इसे तत्काल हट जाना चाहिए."

पुलिस ने बताया कि एक आदमी की मृत्यु उस वक़्त हुई जब पुलिस ने शहर के मध्य में प्रदर्शकारियों पर गोली चला दी. इसके अलावा एक ट्रेन स्टेशन पर हुए विस्फोट में एक गार्ड की मृत्यु हो गई.

बांग्लादेश में आज भी जिंदा है 1971 की त्रासदी

बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट के सामने लाठी-डंडे से लैस सत्ताधारी पार्टी अवामी लीग के समर्थकों का विपक्षी दल के समर्थकों के साथ टकराव हुआ.

स्थानीय मीडिया के अनुसार पाँच जनवरी को होने वाले चुनाव के मद्देनज़र सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है. विपक्षी दल इस चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं.

हड़ताल और बंद

बीएनपी और उसके सहयोगी विपक्षी दल पिछले कई हफ़्तों से विरोध प्रदर्शन, हड़ताल और यातायात बंद कर रहे हैं ताकि प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा देने को मजबूर कर सकें. इस दौरान कई लोगों की मौत हो चुकी है.

विपक्षी दल को आशंका है कि यदि वर्तमान सरकार के रहते चुनाव हुए तो सरकार उसमें धांधली कर सकती है.

कादर मुल्ला की फाँसी के बाद हुए प्रदर्शन

इसके पहले चुनाव में कार्यवाहक सरकार चुनाव की देखरेख करती थी लेकिन शेख़ हसीना ने साल 2011 में इस व्यवस्था को ख़त्म कर दिया.

बीएनपी की इस्लामी सहयोगी जमात-ए-इस्लामी के ख़िलाफ़ आए कई फ़ैसलों के कारण भी कई हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें कई लोग मारे गए हैं.

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