सीरियाः रासायनिक हथियार लेने गया नार्वे का पोत लौटा

Image caption संयुक्त राष्ट्र के मिशन में शामिल नार्वेजियाई पोत ने रास्ता बदला

सीरिया के रासायनिक हथियारों के जख़ीरे को इकट्ठा करने के मिशन में हिस्सा लेने वाले नार्वे के पोत को वापस लौटना पड़ा है.

संयुक्त राष्ट्र द्वारा रासायनिक जखीरे को सीरिया से हटाने के लिए तय की गई अंतिम समय सीमा मंगलवार को खत्म हो रही है.

नार्वेजियाई पोत सीरिया के लताकिया बंदरगाह पर जब पहुंचा तब तक कंटेनर तैयार नहीं थे,इसलिए यह पोत साइप्रस में ईंधन भरने के लिए रवाना हो गया.

इस मिशन को संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव के तहत अंजाम दिया जा रहा है जिसे रूस और अमरीका के बीच समझौते के बाद पारित किया गया था.

देरी तय

ऐसे में तय समय सीमा में रासायनिक हथियारों को हटाना अब मुश्किल जान पड़ता है.

पोत पर मौजूद बीबीसी संवाददाता अन्ना होलीगन के अनुसार, रासायनिक हथियारों को सौंपने में देर होने से वैश्विक समुदाय का निराशा होना तय है.

उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय सहमति और राष्ट्रपति बसर अल असद के सहयोग के बावजूद सीरिया में काम करना कितना जटिल है.

इससे पहले, सोमवार को इटली के पूर्व पर्यावरण मंत्री फोर्जा इतालिया ने इस दावे का खंडन किया कि सीरिया के रासायनिक हथियार सिसली में उतारे जाएंगे.

रासायनिक हथियार विरोधी संगठनों ने हाल ही में सीरिया से हथियार सौंपने के कार्य में तेज़ी लाने की अपील की थी.

आर्गेनाइजेशन फॉर प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल विपन (ओपीसीडब्ल्यू) ने कहा था कि रासायनिक दुष्प्रभावों से बचने के लिए सारे उपाय किए गए हैं.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सीरिया की राजधानी दमिश्क के पास अगस्त में हुए रासायनिक हमले पर कड़ा विरोध जताया था. इसके बाद अमरीका और रूस के बीच इसे लेकर समझौता हुआ.

अमरीका और कई पश्चिमी देशों का आरोप है कि इस रासायनिक हमले में सैकड़ों लोग मारे गए थे. इन देशों ने सीरिया की बशर अल असद सरकार को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया था. मगर बशर अल असद ने हमले के लिए सीरिया में लड़ रहे विद्रोहियों को ज़िम्मेदार बताया था.

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