अमरीका में बंद होगा बेरोज़गारी भत्ता

अमरीकी संसद
Image caption अमरीकी संसद में इन दिनों शीतकालीन अवकाश चल रहा है

अमरीका में एमरजेंसी फ़ेडरल प्रोग्राम यानी आपात संघीय कार्यक्रम की समय सीमा ख़त्म होने के बाद दस लाख से भी ज़्यादा नागरिक बेरोज़गारी भत्ते से वंचित हो जाएंगे.

अमरीकी संसद का शीतकालीन अवकाश शुरू होने से पहले इस योजना को विस्तार देने पर सांसदों में सहमति नहीं बन पाई.

पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने साल 2008 में मंदी शुरू होने के समय यह योजना चलाई थी.

इस योजना के तहत बेरोज़गारों को 73 सप्ताह तक हर महीने औसतन 1166 डॉलर का वज़ीफ़ा मिलता था.

व्हाइट हाउस का कहना है कि इस योजना से लाखों परिवारों की ग़रीबी दूर करने में मदद मिली लेकिन कई रिपब्लिकन सांसदों का तर्क है कि इस योजना पर सालाना 25 अरब डॉलर ख़र्च बहुत ज़्यादा है.

दो महीने पहले अमरीकी संसद में बजट पर गतिरोध के कारण सरकार को अपने कामकाज को आंशिक रूप से बंद करना पड़ा था.

नवीकरण का प्रयास

इस बीच राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विश्वास दिलाया है कि जनवरी की शुरुआत में संसद सत्र के शुरू होते ही वह इस योजना के नवीकरण का प्रयास करेंगे.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जोश अर्नेस्ट ने कहा, "राष्ट्रपति ने कहा है कि उनका प्रशासन संसद को इस मामले में जल्दी काम करने को कहेगा ताकि इस आपात आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता से सुलझाया जा सके."

अमरीकी अधिकारियों के मुताबिक़ इस योजना के समाप्त होने से क़रीब 13 लाख लोग बेरोज़गारी भत्ते से वंचित हो जाएंगे.

इसी तरह अगले साल प्रांतों में भी लाखों लोग इससे प्रभावित होंगे क्योंकि कई प्रांतों में इस योजना की अवधि छह महीने बाद समाप्त हो जाएगी.

इस योजना का मकसद ऐसे अमरीकी नागरिकों को वित्तीय मदद मुहैया कराना था, जिनकी नौकरी मंदी के दौरान छूट गई और वे नई नौकरी नहीं ढूंढ़ पा रहे थे.

बेरोज़गारी की दर

Image caption राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि संसद शुरू होते ही वह इस योजना के नवीकरण के लिए ज़ोर लगाएंगे

अमरीकी श्रम विभाग के मुताबिक़ नवंबर में अमरीका में बेरोज़गारी की दर सात प्रतिशत थी जो कि पिछले पाँच वर्षों में सबसे कम है.

लेकिन बेरोज़गारी की दीर्घकालीन दर देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक समस्या बनी हुई है. अमरीका में फ़िलहाल क़रीब 41 लाख लोग छह महीने या उससे भी अधिक समय से बेरोज़गार हैं.

इस मुद्दे पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों के बीच अकसर राजनीतिक बहस होती रहती है. कांग्रेस के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन सांसदों का दबदबा है जबकि ऊपरी सदन सीनेट में डेमोक्रेट्स का वर्चस्व है.

संघीय सरकार के ख़र्चे को लेकर दोनों सदनों के बीच असहमति के कारण संसद 30 सितंबर को ख़त्म हुए वित्त वर्ष से पहले बजट पारित करने में नाकाम रही थी.

आख़िरकार दोनों पक्षों के बीच अक्तूबर में कामबंदी को ख़त्म करने और संघीय सरकार की क़र्ज की सीमा को बढ़ाने को लेकर सहमति बनी थी.

(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार