हॉलीवुडः ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों का फ़ॉर्मूला युग ख़त्म?

  • 4 जनवरी 2014
हॉलीवुड के प्रख़्यात निर्देशक स्टीवन स्पिलबर्ग
Image caption हॉलीवुड में ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों के फार्मूले का श्रेय स्टीवन स्पीलबर्ग को दिया जाता है.

हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों का फ़ॉर्मूला सालों तक भले कामयाब रहा हो, पर अब उसका दौर ख़त्म होता दिख रहा है.

2013 में भले ही 1977 जैसी स्टार वॉर और 2009 की अवतार जैसी तकनीकी कीर्तिमान गढ़ने वाली फ़िल्में नहीं बनीं, इसके बावज़ूद वह लोकप्रिय फ़िल्मों का साल रहा.

पूरे साल बनीं 26 फ़िल्मों का बजट 100 मिलियन डॉलर से अधिक था और हर फ़िल्म को हॉलीवुड के नामचीन स्टूडियो से रिलीज़ किया गया. दुनियाभर के बॉ़क्स ऑफ़िस पर धूम मचाने वाली फ़िल्मों ने दसियों बिलियन डॉलर का कारोबार किया, जो 2012 के 35 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड के काफ़ी क़रीब है.

इनमें से कुछ ने बेहद ख़राब प्रदर्शन किया. द लोन रेंजर के अभिनेता जॉनी डेप की फ़िल्म ने 250 मिलियन डॉलर की कमाई के साथ फ़िल्म की लागत निकाल ली. 1.2 बिलियन डॉलर की कमाई के साथ आयरन मैन-थ्री अब तक की सर्वाधिक कमाई करने वाली पाँचवीं फ़िल्म बन गई.

अप्रत्याशित सफलता की कहानियों के बावजूद हॉलीवुड सफल फ़िल्मों के बढ़ते बजट को लेकर काफ़ी चिंतित है.

हॉलीवुड में टूटन और मंदी

Image caption 'स्टार वार्स' फ़िल्मों की श्रंखला की सातवीं कड़ी का निर्माण हो रहा है.

2013 में हॉलीवुड फ़िल्मों के प्रख्यात निर्माता और निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने कहा था, "हॉलीवुड अभी आतंरिक रूप से टूटन और संभावित मंदी का सामना कर रहा है."

उनके मुताबिक़ तीन-चार या लगभग आधा दर्ज़न बड़े बजट की फ़िल्मों की नाकामी का असर हॉलीवुड के पूरे परिदृश्य में बदलाव लाने वाला है.

हॉलीवुड में ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों के फ़ॉर्मूले का श्रेय स्टीवन स्पीलबर्ग को दिया जाता है. 1975 में जब उनकी फ़िल्म जॉज़ बनी, तो हॉलीवुड ने महसूस किया कि साल में दर्ज़न भर फ़िल्में बनाने के मुक़ाबले कुछ बड़े बजट की फ़िल्मों का निर्माण फ़ायदे का सौदा है. इस तरह से हॉलीवुड फ़िल्मों के एक व्यावसायिक मॉडल का निर्माण हुआ.

80 और 90 के दशक में हॉलीवुड में अधिग्रहण की लहर के बाद छह 'मुख्य' हॉलीवुड स्टूडियो ने शक्तिशाली मीडिया समूहों का मिश्रित रूप ग्रहण कर लिया. इससे उनको बड़े बजट की फ़िल्में बनाने में सहूलियत मिली. उन्होंने एक साथ अपना लाभ बढ़ाने और ख़तरे कम करने का रास्ता खोज लिया.

हॉलीवुड के बड़े स्टूडियोज़ ने ख़तरे कम करने के लिए फ़िल्म निर्माण करने वाली दर्ज़नभर छोटी कंपनियों को अपने साथ जो़ड़ा. इससे फ़िल्म के फ्लॉप होने की संभावनाओं में कमी हो जाती है.

इस गठजोड़ से फ़िल्मों के सफल होने की संभावना काफ़ी हद तक सुनिश्चित हो जाती है. ब्रिटिश फ़िल्म के ताज़ा शोध में जॉन सेज़विक और माइक पोकोर्नी ने पाया कि पिछले बीस सालों में सफ़ल फ़िल्मों के मुनाफ़े में भरोसेमंद बढ़ोत्तरी हुई है.

(पढ़ेंः इसराइल के जासूस थे हॉलीवुड फ़िल्म निर्माता)

मुनाफ़े का कारोबार

Image caption हॉलीवुड में बड़े बजट की फ़िल्मों का मुनाफ़ा भी बढ़ रहा है.

80 के उत्तरार्ध में केवल 50 फ़ीसदी फ़िल्म स्टूडियो लाभ की स्थिति में थे, लेकिन 2009 में 90 फ़ीसदी फ़िल्म स्टूडियो मुनाफ़ा कमा रहे हैं. फ़िल्मों की असफलता दुर्लभ हो गई है.

नए फ़ॉर्मूले से फ़िल्म स्टूडियो अपने निवेश पर शानदार कारोबार कर रहे हैं. फ़िल्मों के जानकार प्रोफ़ेसर सेज़विक कहते हैं, ''हॉलीवुड फ़िल्मों का कारोबार मुनाफ़े के संदर्भ में बेहतर हुआ है. आप जितना अधिक निवेश करते हैं, आपको तुलनात्मक रूप से उतना ज़्यादा लाभ होता है. यह नया मॉडल अप्रत्याशित रूप से सफल है."

स्टूडियो की इस सफलता का रहस्य आय के नए स्रोतों की तलाश में छिपा है. हॉलीवुड के शुरुआती दिनों में आय का सौ फ़ीसदी हिस्सा टिकटों की बिक्री से आता था. जो अब महज़ 20 प्रतिशत रह गया है. बाक़ी की आय टेलीविज़न की लाइसेंसिंग, डीवीडी की बिक्री, सौदों और विज्ञापन के समझौतों से आती है.

स्क्रीन ट्रैफ़िक नामक पुस्तक के लेखक और कॉनकार्डिया विश्वविद्यालय मांट्रियल में कम्युनिकेशन स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर चार्ल्स ऑकलैंड कहते हैं, "यह फ़िल्में वास्तव में फ़िल्म नहीं है."

(पढ़ेंः अभिनेता मनोज कुमार की हॉलीवुड को 'चुनौती')

नया फ़ॉर्मूला

Image caption आयरन मैन-थ्री अब तक की सर्वाधिक कमाई करने वाली पाँचवीं फ़िल्म है.

उनका कहना है, "वास्तव में यह एक व्यावसायिक मॉडल है, जो विभिन्न उद्योगों के अलग-अलग उत्पादों को आपस में जोड़ता है और कारोबार के वित्तीय प्रदर्शन को बेहतर बनाता है."

दूसरा क़दम अमरीका के घरेलू बाज़ार के दायरे के बाहर संभावनाएं खोजना है, जहाँ वास्तव में फ़िल्म के दर्शक नहीं बढ़ रहे हैं. इसके लिए चीन जैसे विकाससील बाज़ारों तक पहुंच बढ़ाई जा रही है.

आयरन मैन थ्री की कमाई का दोतिहाई हिस्सा अमरीका के बाहर से था. इस फ़िल्म के चीनी संस्करण में चीनी अभिनेताओं और उत्पादों की चार मिनट की अतिरिक्त फुटेज़ जोड़ी गई थी.

अंततः हॉलीवुड फ़िल्म स्टूडियो ने फ़िल्मों के कारोबार सफल बनाने का हुनर सीख लिया है. नए निर्देशकों और मौलिक विचारों से जुड़ा किसी तरह का ख़तरा लेने के बज़ाय सफल फ़ॉर्मूले पर काम कर रहे हैं.

हॉलीवुड जाँचे-परखे फ्रेंचाइज़ी का सहारा ले रहा है, फ़िल्मों के रीमेक बन रहा है और किताबों के अडॉप्शन पर काम कर रहा है. चार्ल्स ऑकलैंड कहते हैं कि फ्रेंचाइजी वाली व्यवस्था से ख़राब फ़िल्मों के निर्माण को प्रोत्साहन मिलता है. यह एक तरह के 'सौंदर्यबोध की विपन्नता' को दर्शाता है.

लेकिन फ्रेंचाइज़ी से होने वाले कारोबारी फ़ायदे को देखते हुए भविष्य में हॉ़लीवुड की रणनीति में किसी बदलाव की संभावना काफ़ी कम है.

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