अदालत ले जाते समय मुशर्रफ़ को 'दिल की परेशानी'

Image caption मुशर्रफ का कहना है कि उनके खिलाफ मुकदमा राजनीति से प्रेरित है.

पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ़ को उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह के मुकदमे के लिए अदालत ले जाते समय 'दिल में दर्द' की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया है.

अधिकारियों ने अदालत को बताया कि 70 वर्षीय मुशर्रफ़ को रावलपिंडी स्थित सेना के कार्डियोलॉजी अस्पताल भेजा गया है. यह तीसरा मौका है जब पूर्व राष्ट्रपति अदालत के सामने पेश नहीं हुए हैं. इससे पहले सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मुशर्रफ़ अदालत नहीं गए थे.

मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा उनके वर्ष 2007 के एक फ़ैसले के ख़िलाफ़ है, जिसमें उन्होंने देश में आपातकाल लागू करने के आदेश दिए थे. जबकि पूर्व राष्ट्रपति इन आरोपों से इनकार करते हैं. उनका कहना है कि उनके ख़िलाफ़ लगाए गए सारे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं.

मुशर्रफ़ पाकिस्तान के पहले पूर्व सैन्य शासक हैं, जिनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुक़दमा चलाया जा रहा है और यदि उन्हें दोषी पाया जाता है, तो उन्हें मौत या फिर आजीवन कारावास की सज़ा हो सकती है.

पूर्व राष्ट्रपति पर इसके अलावा हत्या और न्यायपालिका के काम में अवरोध डालने के आरोप भी हैं.

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मुशर्रफ़ को किस तरह की दिल की परेशानी है. उनके एक सहयोगी ने एएफ़पी समाचार एजेंसी को बताया की 'उनकी हालत ख़राब है'.

'बीमारी संदेहास्पद'

जबकि इस्लामाबाद स्थित विशेष अदालत में मौजूद बीबीसी के एम इलियास खान ने कहा, "पाकिस्तान में बहुत से लोगों का मानना है कि उनकी बीमारी की खबरें संदेहास्पद हैं क्योंकि अपने बचाव में वह ये तरीका अपनाते हैं, जिसके बारे में बचाव दल का कहना है कि इससे उन्हें अदालत के समक्ष पेश होने से छूट मिलती रही है."

पूर्व राष्ट्रपति का पिछले एक वर्ष का अधिकांश समय वर्ष 1999 से 2008 के दौरान उनके सत्ता से संबंधित मामलों को लेकर लगाए गए आरोप में नजरबंद रहते हुए गुजरा है. हालांकि मुशर्रफ़ को अभी इन सभी मामलों में ज़मानत मिली हुई है.

दूसरी ओर, मुशर्रफ़ को इस बात का ख़तरा है कि यदि वह अदालत में पेश नहीं हुए तो उन्हें फिर से हिरासत में लिया जा सकता है. अदालत में उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है.

Image caption अदालत दे सकती है मुशर्रफ़ को हिरासत में लेने के आदेश

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अदालत बृहस्पतिवार को मुशर्रफ़ को हिरासत में लेने का आदेश दे सकती है.

आरोप

बचाव पक्ष का तर्क है कि मुशर्रफ़ को पाकिस्तान में न्याय नहीं मिल सकता है क्योंकि मौजूदा प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ उनके मुवक्किल के ख़िलाफ़ हैं. मुशर्रफ़ ने वर्ष 1999 में बगावत कर शरीफ़ से सत्ता छीनी थी. वह 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे, जिसके बाद लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के कारण उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

इसके तुरंत बाद मुशर्रफ़ ने देश छोड़ दिया था और दुबई तथा लंदन में स्वनिर्वासन का जीवन बिता रहे थे. जबकि 2013 में पाकिस्तान वापसी के साथ उन्हें उम्मीद थी की वह आम चुनाव में अपनी पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन उन्हें अयोग्य करार दे दिया गया था.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तानियों का मानना है कि नवाज़ शरीफ़ की सरकार देश में चल रही समस्याओं से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए मुशर्ऱफ के खिलाफ मुकदमे का इस्तेमाल कर रही है.

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