पाकिस्तान: आ गया नेताओं का 'झूठ पकड़' मीटर

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पाकिस्तान के प्रमुख शहर लाहौर के दक्षिण में मुख्य सड़क छोड़कर आप जैसे ही मुड़ेंगे आपको लगेगा कि आप 50 साल पीछे चले गए हैं.

यहाँ की सितारा कॉलोनी नंबर दो में लगा सीवर का पानी और छोड़े गए बुलडोजर इस बात को झुठलाते हुए नज़र आएंगे कि लाहौर पाकिस्तान के विकसित शहरों में से एक है.

यह दृश्य यहाँ के नेताओं के वादों का भी प्रमाण है, जो अब भी पूरे नहीं हुए हैं. लेकिन हाल में ही शुरू हुई एक नई वेबसाइट 'ट्रूथ ट्रैकर' इस बात का पता लगाएगी कि विकास के कितने वादे पूरे हुए हैं.

संकरी गलियां

सितारा कॉलोनी नंबर दो संकरी गलियों की भूलभूलैया है. यहां छोटी दुकानों, सड़कछाप दुकानदारों और गधा गाड़ियों की हमेशा हलचल रहती है. इसके बाज़ार के उस पार रिहायशी इलाक़ा है.

टूटी-फूटी सड़कें, कई जगह बजबजाता सीवर का पानी और हाल में हुई बरसात का पानी लोगों का इंतज़ार कर रहा है.

विशालकाय बुलडोज़र और अन्य मशीनें पास में ही बेकार पड़ी हैं. निर्माण कार्य अब भी ठप पड़ा हुआ है.

तारीक महमूद सितारा कॉलोनी में पिछले 10 साल से रह रहे हैं. वह कहते हैं कि हर चुनाव प्रचार में नेता सड़क और सीवर की व्यवस्था ठीक करने का आश्वासन देते हैं. लेकिन चुनाव जीत जाने के बाद वे पीछे मुड़कर नहीं देखते.

वो कहते हैं, '' आप सड़क पर पानी को देख रहे हैं, वह पिछले डेढ़ साल से यहां लगा हुआ है. यहां तक कि पीने का पानी भी पीने लायक नहीं है.''

वो बताते हैं, "चुनाव के दौरान हम विभिन्न उम्मीदवारों को यहाँ लेकर आते हैं. वो सभी समस्याओं के समाधान का वादा करते हैं. लेकिन उसके बाद कुछ नहीं होता है. अब जब हम अपने सांसद के पास अपनी समस्याएं लेकर जाते हैं, तो वो भी झूठे आश्वासन देते हैं. वो यह नहीं सोचते हैं कि हम भी इंसान हैं, यह सही है या ग़लत."

पाकिस्तान में इस तरह की समस्याएं आम बात है. लेकिन लगता है कि अब वादे तोड़ने वाले नेताओं के लिए यह कठिन समय होने वाला है.

वेबसाइट की शुरुआत

यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी (यूपीआई) ने ट्रूथ ट्रैकर के नाम से एक नई वेबसाइट शुरू की है. यह यूपीआई की एक ग़ैर लाभकारी संस्था है.

इसका लक्ष्य है, चुनाव के दौरान और उसके बाद नेताओं की ओर से किए गए वादों पर नज़र रखना.

पाकिस्तान में फैले 25 संवाददाताओं की एक टीम नेताओं के चुनाव घोषणापत्रों, चुनाव के दौरान दिए गए भाषणों, राजनीतिक दलों के बेवसाइटों और मीडिया में उनकी कवरेज का विश्लेषण कर मतदाताओं से किए गए वादों का पता लगाएगी.

ट्रूथ ट्रैकर के वरिष्ठ संपादक मुबाशर बुखारी कहते हैं कि यह सब जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है.

वो कहते हैं, ''इसका मतलब यह हुआ कि हम वादों का पता लगाते रहेंगे और नेताओं को अपने मतदाताओं से किए वादों के बारे में बार-बार याद दिलाते रहेंगे. हम यह भी बताते रहेंगे कि कोई वादा क्यों नहीं पूरा हुआ और उसमें क्या बाधा आ रही है.''

किसने क्या वादा किया, यह पता लगाने के लिए विभिन्न पार्टियों के चुनाव चिन्हों का उपयोग किया जाएगा, जैसे कि शेर प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ की पीएमएल (एन) का चुनाव निशान है तो क्रिकेट बैट क्रिकेटर इमरान ख़ान की पार्टी तहरीके-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) का.

बेवसाइट पर वादों को पांच भागों में बांटा गया है: टूटे हुए, पूरे हुए, जिन पर काम हो रहा है, जिन पर काम शुरू नहीं हुआ है और जिनसे समझौता किया गया है.

प्रधानमंत्री का वादा

उदाहरण के लिए देख सकते हैं कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पिछले साल हुए चुनाव में कम आय वर्ग के लोगों को घर उपलब्ध कराने का वादा किया था. लेकिन इस वादे को पूरा करने के लिए अभी तक कुछ नहीं किया गया है. ट्रूथ ट्रैकर ने इसे उन वादों की श्रेणी में रखा है जिनपर काम नहीं शुरू हुआ है.

उसी चुनाव में इमरान ख़ान की पीटीआई ने शपथ लेने के तीन महीने के भीतर स्थानीय चुनाव कराने का वादा किया था.

ट्रूट ट्रैकर के मुताबिक़ इमरान ख़ान ने स्थानीय चुनाव न कराने के लिए पूर्ववर्ती सरकार की बार-बार आलोचना की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार सत्ता में लोगों की भागीदारी की इच्छुक नहीं है.

इस वेबसाइट ने गणना करके यह बताया है कि पीटीआई के नेताओं ने उत्तरी-पश्चिमि प्रांत खैबर पख्तूनख्वाह में पिछले साल 30 मई को सत्ता संभाली थी. इस तरह 90 दिन की समय सीमा 31 अगस्त को ही पूरी हो चुकी है लेकिन स्थानीय चुनाव कराने का वादा अभी भी पूरा नहीं हुआ है. ट्रूथ ट्रैकर ने इसे तोड़े गए वादों की श्रेणी में रखा है.

एक और उदाहरण है, पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ ने बिजली संकट का समाधान करने के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का इस्तेमाल करने की बात कही थी.

पंजाब सरकार ने दक्षिण-पूर्वी रेगिस्तानी इलाक़े चोलिस्तान में सौर ऊर्जा संयंत्र बनाने का काम शुरू किया है. ट्रूथ ट्रैकर ने इसे उन वादों की श्रेणी में रखा है जिन पर काम हो रहा है.

सामाजिक विश्लेषक रसूल बख़्श रईस का मानना है कि ट्रूथ ट्रैकर जैसे प्रयासों से जवाबदेही बढ़ेगी. उनका मानना है कि यह किसी भी लोकतंत्र के लिए बहुत ज़रूरी है.

साक्षरता की कमी

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वो कहते हैं, ''पाकिस्तान में नेता जब सत्ता में होते हैं तो उनका नज़रिया अलग-अलग होता है. इसलिए उनसे सवाल करने के लिए लोगों को पांच साल तक इंतज़ार नहीं करना चाहिए. इसे नियमित आधार पर किया जाना चाहिए.''

वो कहते हैं, ''अब यह इस तरह की वेबसाइट के रूप में सूचना प्रौद्योगिकी के ज़रिए हो सकता है.''

वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पाकिस्तान जैसे कम पढ़े-लिखे देश में बहुत कम लोग नेताओं के प्रदर्शन पर नज़र रखने के लिए ट्रूथ ट्रैकर जैसी वेबसाइट पर जाएंगे और नेता इन टूटे हुए वादों के साथ बच निकलेंगे.

सितारा कॉलोनी के तारीक महमूद बहुत नाउम्मीद हैं.

वो कहते हैं, ''स्थानीय चुनाव होने वाले हैं. लेकिन इसमें हमारी कोई दिलचस्पी नहीं है. इसका कोई मतलब नहीं है, हम जानते हैं कि कुछ नहीं बदलने वाला.''

लेकिन मुबाशर बुखारी को उम्मीद है कि ट्रूथ ट्रैकर से बदलाव आएगा. वो कहते हैं, ''यह सच है कि बहुत से लोग इससे अब भी अनजान हैं. लेकिन बहुत से नेताओं को यह पता है कि उन पर नज़र रखी जा रही हैं.''

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