बच्चों के यौन शोषण पर यूएन की सुनवाई शुरू

  • 16 जनवरी 2014
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जिनेवा स्थित एक संयुक्त राष्ट्र पैनल ने रोमन कैथोलिक पादरियों द्वारा हज़ारों बच्चों के यौन शोषण पर वेटिकन अधिकारियों की एक रिपोर्ट पर सुनवाई शुरू कर दी है.

वेटिकन इसके पहले यह कहते हुए इस बारे में कोई जानकारी देने से इनकार किया था कि इन मामलों की ज़िम्मेदारी उन देशों की न्यायपालिकाओं की है जहां ये यौन शोषण हुए हैं.

पादरियों द्वारा बच्चों के यौन शोषण के मामले में पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं देने के लिए वेटिकन की आलोचना की गई.

पीड़ितों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि इस सुनवाई से चर्च अपनी 'गोपनीयता' की नीति का अंत करने को प्रेरित होगा.

पोप फ्रांसिस ने कहा है कि यौन शोषण के मामलों से निपटना चर्च की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ज़रूरी है.

पिछले महीने पोप फ्रांसिस ने घोषणा की थी कि चर्च में होने वाले बच्चों के यौन शोषण का मुक़ाबला करने के लिए वेटिकन एक समिति का गठन करेगा. उन्होंने पीड़ितों को मदद की पेशकश भी की थी.

पोप ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वेटिकन क़ानून को भी और सख़्त बनाया. उन्होंने नाबालिगों के साथ होने वाले अपराधों की परिभाषा को व्यापक बनाया और उसमें बच्चों के यौन शोषण को शामिल किया.

दी होली सी, वेटिकन सिटी के सदस्यों को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की समिति के समक्ष इस मसले पर सफाई देनी पड़ेगी.

कैथोलिक चर्च पर आरोप लगे थे कि दुनिया भर में उसके पादरियों ने बड़ी संख्या में बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार किया.

वेटिकन की विधाई संस्था दी होली सी ने ' संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौते' पर दस्तख़त किए हैं जिसके तहत वो बच्चों के संरक्षण और सही देखभाल के लिए कानूनी रूप से बाध्य है.

सवालों का सामना

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उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र की बाल अधिकार समिति (यूएनसीआरसी) विस्तृत सवाल-जवाब करेगी. ऐसा पहली बार होगा कि दी होली सी सार्वजनिक मंच पर अपना बचाव करेगा.

दी होली सी पर आरोप है कि उसने पीड़ितों के बजाय बच्चों से यौन संबंध बनाने वाले पादरियों का बचाव किया जिसकी वजह से हजारों बच्चों को यौन शोषण का शिकार होना पड़ा.

पिछले साल जुलाई में संयुक्त राष्ट्र समिति ने वेटिकन से अनुरोध किया था कि वो वर्ष 1995 के बाद से सामने आए यौन शोषण के सभी मामलों की विस्तृत जानकारी दे.

दी होली सी से यह भी पूछा जाएगा कि क्या यौन अपराधों के दोषी पादरी, नन और साधुओं को दोषी पाए जाने के बाद भी बच्चों के संपर्क में रहने दिया गया, ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ क्या कानूनी कार्रवाई की गई और क्या शिकायत करने वालों की आवाज़ दबाई गई?

दी होली सी ने अपनी सफ़ाई में इस बात पर जोर दिया कि वो रोमन कैथोलिक चर्च से 'पृथक और भिन्न' हैं और वो पुरोहित वर्ग की धार्मिक गतिविधियों तब तक उद्घाटन नहीं करते जब तक जिस देश में चर्च स्थित है उस देश के अधिकारी उसकी मांग न करें.

दी होली सी ने जोर देकर कहा कि उसने पादरियों के चयन के मापदंड को बदलने के साथ ही चर्च के कानून की समीक्षा की है ताकि पादरी अनुशासन में रहें.

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