खुफ़िया निगरानी कार्यक्रम पर रोक लगेगी: ओबामा

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अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मित्र देशों और उनकी सरकारों की ख़ुफ़िया निगरानी को रोकने का एलान किया है.

अमरीकी इलेक्ट्रॉनिक ख़ुफ़िया तंत्र में भारी बदलाव की घोषणा करते हुए ओबामा ने कहा कि अभी जिस तरह से ये कार्यक्रम चलाया जा रहा है, उस पर रोक लग जाएगी.

ओबामा ने ये भी एलान किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) करोड़ों अमरीकियों के फ़ोन रिकॉर्ड से जुटाई गई जानकारी अपने पास नहीं रख सकेगी.

ये जानकारी कहां जमा रहेगी, इस पर उन्होंने फ़िलहाल कुछ भी नहीं कहा है. लेकिन खुफ़िया अधिकारियों और अमरीकी एटॉर्नी जनरल को 60 दिनों का समय दिया गया है कि वो इस पर अपनी राय दें.

आलोचना

माना जा रहा है कि जिस तरह के सुधार का एलान ओबामा ने किया है, वो कई अमरीकी अधिकारियों की उम्मीद से कहीं ज़्यादा है.

अमरीकी ख़ुफ़िया तंत्र से जुड़े कई पूर्व अधिकारियों ने ओबामा के इन कदमों की तीखी आलोचना की है और कहा है कि इससे अमरीका की सुरक्षा को धक्का लगेगा.

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Image caption एनएसए कॉन्ट्रेक्टर एडवर्ड स्नोडन ने ख़ुफ़िया कार्यक्रम की जानकारी लीक की थी.

ओबामा ने इस पूरे तंत्र में सुधार के लिए एक समिति बनाई थी जिसने पिछले महीने अपनी रिपोर्ट में कई सुझाव दिए थे. उन्हीं सुझावों को आधार बनाते हुए ओबामा ने ये एलान किए हैं

उन्होंने कहा कि अमरीका की ये ज़िम्मेदारी बनती है कि ख़ुफ़िया जानकारी जुटाने की उसकी जो काबिलियत है, उसका दुरूपयोग नहीं हो.

उन्होंने कहा, ''मैं दुनिया के लोगों को बताना चाहता हूं कि अमरीका उन आम लोगों की बिल्कुल निगरानी नहीं करता है जिनसे अमरीका को कोई ख़तरा नहीं है.''

तनाव

लीक हुई जानकारी की वजह से अमरीका को देश के अंदर ही नहीं अपने मित्र देशों के सामने भी शर्मिंदगी उठानी पड़ी जब पता चला कि उन देशों के नेताओं पर भी निगरानी रखी जा रही थी.

यूरोपीय देशों ख़ासकर जर्मनी के साथ अमरीका के रिश्तों में इस लीक की वजह से काफ़ी तनाव आया.

इस भाषण में उन्होंने अपने मित्र देशों के नेताओं की चिंताओं को भी दूर करने की कोशिश की.

उनका कहना था, ''मैं अपने मित्र देशों और साझेदार देशों के नेताओं से कहना चाहूंगा कि अगर किसी विषय पर मुझे उनकी सोच के बारे में जानना होगा तो मैं फ़ोन उठाकर उनसे बात कर लूंगा, न कि उनकी ख़ुफ़िया निगरानी करूंगा.''

ओबामा ने अपने भाषण में एनएसए कॉन्ट्रेक्टर एडवर्ड स्नोडेन का भी ज़िक्र किया जिन्होंने रूस में पनाह ले रखी है और जिनकी लीक की हुई जानकारी से ही ये पूरा हंगामा शुरू हुआ.

उनका कहना था कि स्नोडेन ने जिन दस्तावेज़ों को सनसनीख़ेज़ तरीके से लीक किया, उनकी वजह से कई अमरीकी कार्यक्रमों पर आने वाले कई सालों तक असर पड़ेगा.

नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने जहां इन सुधारों का स्वागत किया है, वहीं उनका कहना है कि कई ऐसे पहलू हैं जिन पर और ठोस सुधार लागू किए जा सकते थे और अगर ऐसा नहीं हुआ तो इस पूरे कार्यक्रम पर ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ेगा.

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