मिलिए चुनाव लड़ने वाले तोते से

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Image caption तोता (फ़ाइल फ़ोटो)

पहले सिर्फ़ मर्द चुनाव लड़ते थे, फिर महिलाएं भी आगे आईं और इन दोनों के बाद किन्नरों ने भी चुनावों में अपनी क़िस्मत आज़माई. लेकिन जो तोते कभी भविष्यफल लिखी चिट्ठी उठाते थे, अब चुनाव भी लड़ने लगे हैं.

हैरानी में डालने वाली यह ख़बर बेलारूस की है जहां एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने स्थानीय चुनावों में अपने तोते को मैदान में उतारने की हिम्मत दिखाई.

इसके लिए उन्होंने अपने तोते का एक चुनावी प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भी कराया है.

तोते के मालिक केंस्टांटसिन का कहना है कि तोते को किसी नेता की तरह कार की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन फिर भी वह किसी नेता की तरह ज़रूरी राजनीतिक काम तो कर ही सकता है.

केंस्टांटसिन, ज़रूरी राजनीतिक काम का उदाहरण देते हुए कहते हैं, जैसे- किसी बटन को दबाना.

कंधा तोते का, निशाना व्यवस्था पर

केंस्टांटसिन के तोते का नाम याशा है.

लेकिन तोते को चुनाव लड़ाकर केंस्टांटसिन आख़िर क्या साबित करना चाहते हैं.

वे कहते हैं, ''मैं ऐसा करके बेलारूस की राजनीति की उपयोगिता बताना चाहता हूं.''

लेकिन बाद में उन्होंने अपने तोते को चुनाव लड़ाने के लिए जो दस्तावेज़ चुनाव आयोग में जमा कराए थे, उन्हें वापस ले लिया.

शायद किसी जुर्माने से बचने के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ा. यानी याशा अब चुनावी मैदान में नहीं है.

केंस्टांटसिन को इसका मलाल नहीं है. तभी तो वे कहते हैं, ''तोता इस चुनावी मैदान से हट गया क्योंकि पार्षद बनना कोई बड़ी प्रतिष्ठा की बात तो है नहीं.''

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