राष्ट्रपति असद को लेकर सीरिया शांति-वार्ता में तनातनी

  • 23 जनवरी 2014
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Image caption शांति-वार्ता का आयोजन स्थल

सीरिया में जारी गृह-युद्ध को ख़त्म करने के लिए स्विटज़रलैंड के मॉन्गट्रेए में अंतरराष्ट्रीय शांति वार्ता आरंभ हो चुकी है. लेकिन जो संघर्ष गोला-बारूद और हिंसा की शक़्ल में सीरिया में जारी है, वही संघर्ष वार्ता के दौरान प्रतिनिधियों के बयानों में भी नज़र आया है.

सीरिया के विदेश मंत्री वालिद मुअल्लेम ने सम्मेलन का शुरुआती भाषण देते हुए कहा कि सीरिया का नेता कौन होगा, इसका फ़ैसला केवल सीरिया के लोग ही कर सकते हैं.

वालिद मुअल्लेम जब अपनी बात कह रहे थे, तब बीच में कई बार ऐसा हुआ जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने उन्हें बीच में बार-बार टोका.

इस टोकाटाकी ने शुरु में ही यह संकेत दे दिया था कि शांति सम्मेलन, शांति से सम्पन्न नहीं होगा.

ईरान को इस सम्मेलन के लिए पहले आमंत्रित किया गया और बाद में न्यौता वापस ले लिया गया था.

संयुक्त राष्ट्र में सीरिया के राजदूत बशर जाफ़री ने ईरान की ग़ैर-मौजूदगी पर कहा गया कि इसकी वजह से बातचीत संतुलित नहीं हो सकती.

उन्होंने कहा, ''आज जितने भी प्रतिनिधियों को मंच से अपनी बात रखने का मौका मिला, उनमें से किसी ने भी सीरिया में राजनीतिक संवाद को बढ़ावा नहीं दिया. ये एक तरह के भड़काऊ भाषण थे. यहां ईरान के प्रतिनिधि नहीं है और बाकी देशों के प्रतिनिधि सीरिया की सरकार का विरोध कर रहे हैं.''

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Image caption संयुक्त राष्ट्र में सीरिया के राजदूत बशर जाफ़री

इस पर सीरिया में मुख्य विपक्षी सीरियन नेशनल काउंसिल के प्रवक्ता मोन्ज़र एकबिक ने बीबीसी से कहा कि सीरिया की सरकार बातचीत के लिए गंभीर नहीं है.

उन्होंने कहा, ''सीरिया के भविष्य में राष्ट्रपति बशर अल असद की कोई भूमिका नहीं हो सकती है. असद जब तक सत्ता में हैं, तब तक सीरिया संकट का कोई समाधान नहीं हो सकता. हम यहां लोकतंत्र की तरफ़ बढ़ने की बात कर रहे हैं.''

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वहीं अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने कहा कि नई सरकार में राष्ट्रपति बशर अल असद के लिए कोई जगह नहीं होगी.

जॉन कैरी ने कहा, ''ये संभव नहीं है कि जो व्यक्ति अपने ही लोगों पर बर्बर कार्रवाई करे, वो शासन करने की वैधानिकता हासिल कर ले. एक आदमी और उसका समर्थन करने वाले लोग, एक पूरे देश को बंधक बनाकर नहीं रख सकते हैं.''

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इस शांति वार्ता के आयोजन में अहम भूमिका निभाने वाले संयुक्त राष्ट्र के वार्ताकार लख़्दर ब्राहिमी को ये समझ नहीं आ रहा है कि जिनीवा में शुक्रवार को जब बातचीत आगे बढ़ेगी, तब वे सीरिया के दोनों पक्षों को एक मंच पर ला भी पाएंगे या नहीं.

लख़्दर ब्राहिमी का कहना है, ''मैं कल दोनों पक्षों से अलग-अलग मिलूंगा और आगे की दिशा तय करने की कोशिश करूंगा. हम बस इतना चाहते हैं कि सीरिया में ख़ूनी जंग ख़त्म हो जाए.''

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वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून का कहना है कि एक मुश्किल प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है.

उन्होंने कहा, ''मॉन्गट्रेए में हमने आज एक छोटा ही सही, क़दम आगे बढ़ाया है. शुक्रवार को जब सीरिया के दोनों पक्ष बात करेंगे, तब हम और एक क़दम आगे बढ़ जाएंगे.''

उन्होंने कहा, ''आगे की राह कठिन है लेकिन इसे आसान बनाया जा सकता है. अभी बहुत देर नहीं हुई है. सीरिया के लिए लोकतांत्रिक भविष्य तलाशा जा सकता है.''

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सीरिया दरअसल बीते तीन वर्षों से गृह-युद्ध की चपेट में हैं जहां राष्ट्रपति बशर अल असद सत्ता से हटना नहीं चाहते और विपक्ष उन्हें सत्ता से हटाए बिना चैन की सांस लेने को राज़ी नहीं है.

इस दौरान लड़ाई में एक लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और लाखों लोग सीरिया में विस्थापित हुए हैं.

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