खिलौना जानकर हल्के में ना लें

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बच्चा जिन खिलौनों से खेलता है, क्या वे खिलौने उसके भविष्य की दिशा तय करते हैं.

ये सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि ब्रिटेन की एक मंत्री ने इस मामले को गंभीरता से उठाया है.

राज खोलते हैं खिलौने...

शिक्षा मंत्री एलिज़ाबेथ ट्रूस ने आग़ाह किया है कि खिलौने किसी बच्चे के करियर को प्रभावित कर सकते हैं.

उन्होंने ख़ास तौर पर ऐसे खिलौनों के प्रति सावधान किया है जिनमें लड़के-लड़की का फ़र्क साफ़ होता है.

ये खिलौने ट्रेन, कार, गुड़िया और किचन-सेट या टी-सेट ऐसी किसी भी शक़्ल में हो सकते हैं.

एलिज़ाबेथ ट्रूस का दावा है कि लड़के-लड़की में फ़र्क करने वाले खिलौने ख़ासतौर पर लड़कियों के करियर को प्रभावित करते हैं.

लेकिन सवाल ये भी उठता है कि गुड़िया या किचन-सेट से खेलने वाली बच्ची ज़रूरी तो नहीं कि बड़ी होकर साधारण गृहिणी ही बनें.

इसी तरह ये भी ज़रूरी नहीं है कि जो बालक बचपन में बस, कार, ट्रेन या मोटरसाइकिल से खेले, वो बड़ा होकर इंजीनियर या ट्रेन चालक बन जाए.

चिंता का सबब

लेकिन एलिज़ाबेथ ट्रूस अभिभावकों को सावधान करते हुए कहती हैं कि कुछ ख़ास तरह के खिलौनों की वजह से लड़कियां विज्ञान और गणित जैसे विषयों से दूर हो जाती हैं.

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ऑफिस फॉ़र नेशनल स्टेटिस्टिक्स या ओएनएस के आंकड़ें बताते हैं कि ब्रिटेन में 80 प्रतिशत विज्ञान, शोध, इंजीनियरिंग और तकनीकी पेशेवर पुरुष हैं.

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इसी तरह चिकित्सा और देखभाल से जुड़े अन्य सेवा-क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों का 82 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है.

इतना ही नहीं, प्रशासनिक और सचिवालय संबंधी रोजग़ार में महिलाओं का हिस्सा 78 प्रतिशत है.

असल मुद्दा

आलोचकों का कहना है कि खिलौनों से जुड़ा क़ारोबार, लड़के-लड़कियों के लिए बनाए जाने वाले खिलौनों में फ़र्क करता है.

वे कहते हैं कि लड़कियों के लिए गुड़िया, रसोई का सामान जैसे खिलौने बनाए जाते हैं, वहीं लड़कों के लिए 'स्टाइल' और 'एक्शन से भरपूर खिलौने जैसे रेसिंग कार वगैरह बनाए जाते हैं.

इस रवैये का विरोध करने वाले महिलावादी और अन्य समूहों का कहना है कि यही खिलौने किसी बच्चे की रुचि को सीमित करने में अपनी भूमिका अदा करते हैं. यह रुचि इस बात पर निर्भर करती है कि बच्चा लड़का है या लड़की.

खिलौनों का बच्चों के करियर पर पड़ने वाले असर के बारे में रोहेम्पटन यूनिवर्सिटी में शिक्षा विषय की प्रोफेसर बेकी फ्रांसिस कहती हैं, ''अलग-अलग तरह के खिलौने अलग-अलग तरह के संदेश देते हैं.''

वह कहती हैं, ''खिलौने एक तरह से संदेश देते हैं कि लड़कों के लिए सही क्या है और क्या लड़कियों के लिए सही है. खिलौनों में शिक्षा के अलग-अलग पहलू छिपे होते हैं. ये बहुत अहम होते हैं जो बाद में उनके करियर पर भी असर डाल सकते हैं.''

वह इस बारे में अपने एक अध्ययन का भी हवाला देती हैं. इस अध्ययन में उन्होंने पाया कि लड़कों मारधाड़, मशीनी और इसी तरह के अन्य खिलौने दिए जाते हैं, जबकि लड़कियों के लिए 'स्त्री-स्वभाव के अनुरूप' खिलौने चुने जाते हैं.

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