क्रिकेट से काफ़ी कुछ सीखा सत्या नडेला ने

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क्रिकेट के प्रशंसक सत्या नडेला के माइक्रोसॉफ़्ट के सीईओ घोषित होते ही पिछले पांच महीने से इस पद के लिए चल रही तलाश पूरी हो गई. बिल गेट्स और स्टीव बॉमर के बाद नडेला माइक्रोसॉफ्ट का सीईओ बनने वाले तीसरे व्यक्ति बन गए हैं.

माइक्रोसॉफ़्ट के प्रमुख बिल गेट्स ने सीईओ के रूप में उनके नाम की घोषणा करते हुए कहा, "माइक्रोसॉफ़्ट के सामने आज पहले से कहीं ज़्यादा चुनौतियाँ हैं लेकिन हमारे सामने ढेरों मौके भी हैं और मुझे खुशी है कि उन मौकों को हासिल करने के लिए हमें एक मज़बूत नेता मिला है."

नया पद ग्रहण करते हुए नडेला ने माइक्रोसॉफ़्ट के सभी कर्मचारियों को एक ईमेल लिखा.

इस मेल में उन्होंने यह भी बताया कि ‘मैं कौन हूँ.’ उन्होंने अपने बारे में कहा, “ मैं 46 साल का हूँ. 22 सालों से शादी-शुदा हूँ, मेरे तीन बच्चे हैं.....जो लोग मुझे जानते हैं वे कहते हैं कि मेरी पहचान मेरी जिज्ञासा और सीखने की उत्कंठा हैं. मैं जितनी किताबें पढ़ सकता हूँ उससे कहीं ज्यादा किताबें खरीदता हूँ. मैं जितने ऑनलाइन कोर्से कर सकता हूँ उससे कहीं ज्यादा कोर्सों में दाखिला लेता हूँ.....परिवार, जिज्ञासा और ज्ञान की भूख ही मुझे परिभाषित करते हैं.”

पिछले 22 वर्षों से माइक्रोसॉफ़्ट के लिए काम कर रहे सत्या नडेला भारतीय मूल के अमरीकी हैं और आंध्र प्रदेश का हैदराबाद उनका गृह नगर है.

क्रिकेट पसंद

क्रिकेट खेलना उनको काफ़ी पसंद था. वह अपनी स्कूल टीम के सदस्य भी रहे.

नडेला इस बारे में कहते हैं, "मुझे लगता है कि क्रिकेट से मैंने टीम में खेलने और नेतृत्व के बारे में सीखा और मेरे पूरे करियर में वो मेरे साथ रहा."

उन्हें टेस्ट क्रिकेट देखना पसंद है. वह कहते हैं, "दुनिया में कोई भी खेल इतने लंबे समय तक नहीं खेला जाता. मुझे ये काफ़ी पसंद है. ये बिल्कुल किसी रूसी नॉवेल पढ़ने जैसा है."

सीईओ बनने से पहले वह माइक्रोसॉफ़्ट के क्लाउड एंड एंटरप्राइज़ इकाई के वाइस प्रेसीडेंट थे. जुलाई, 2013 से ही नडेला कंपनी के कम्प्यूटिंग प्लेटफॉर्म्स, डेवेलपर टूल्स और क्लाउड सर्विसेज़ से जुड़ी ज़िम्मेदारी निभा रहे थे.

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Image caption सत्या नडेला का पैतृक गांव आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले में हैं.

साल 1967 में जन्मे सत्या की शिक्षा भारत और अमरीका में हुई है. उन्होंने अपना करियर सन माइक्रोसिस्टम से शुरू किया था.

वह साल 1992 में माइक्रोसॉफ़्ट से जुड़े और तेज़ी से सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने लगे. उन्हें कंपनी की बड़ी ज़िम्मेदारियाँ दी गईं और बिंग सर्च इंजन की टीम उन्हीं की कमान में थी.

माइक्रोसॉफ़्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उन्होंने कर्नाटक के मंगलौर विश्वविद्यालय से साल 1988 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली. उसके बाद उन्होंने अमरीका के विस्कॉन्सिन-मिलवॉकी विश्वविद्यालय से कम्प्यूटर साइंस में स्नातकोत्तर किया फिर शिकागो विश्वविद्यालय से एमबीए किया.

सत्या नडेला के पिता बीएन युगांधर भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं. युगांधर साल 2004 से 2009 तक भारत के योजना आयोग के सदस्य थे.

सत्या इस वक़्त अमरीका के बेलेव्यू में रहते हैं.

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