मेरे दोस्त डेनियल पर्ल को किसने मारा?

असरा नोमानी, डेनियल पर्ल की मित्र

डेनियल पर्ल के अपहरण और उसके बाद उनकी हत्या के मामले में शेख मोहम्मद पर जब मुकदमा चल रहा था, उसी समय मैं शेख मोहम्मद से मिलने ग्वांटानामो बे गई.

उन्हें देखकर मुझे करीब एक दशक पहले की वो घटना फिर याद आ गई.

देखते ही मुझे डेनियल पर्ल की हत्या वाला वीडियो मेरे सामने आ गया, जिसमें चाकू लिए ये व्यक्ति मेरे मित्र का गला काट रहा था.

अदालत में एक ऐसा क्षण भी आया जब मैंने महसूस किया कि मैं शेख मोहम्मद की आँख देखने नहीं आई थी बल्कि उसके उन हाथों को देखना चाहती थी जिन्होंने पर्ल की हत्या की थी.

मैंने कैमरे में उसके उन हाथों को कैद करना चाहा और अदालत में जब उसने एक पेंसिल उठाने के लिए हाथ बढ़ाए तो उसी वक्त मैंने उसके हाथों की तस्वीर खींच ली.

हत्यारे का सुराग

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दरअसल इस मामले में अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के अधिकारियों ने डेनियल पर्ल की हत्या के वीडियो में दिखाए गए हत्यारे और आधुनिकतम तकनीक से मोहम्मद की जांच की और पाया कि पर्ल को शेख मोहम्मद ने ही मारा है.

इस तकनीक को वेन मैचिंग तकनीक कहा जाता है जिसके जरिए हाथ की नसों में समानता को ढूंढा जाता है.

मैं खालिद शेख मोहम्मद के हाथ की उन नसों को देखने की कोशिश कर रही थी जिनके ज़रिए पर्ल के असली हत्यारे के रूप में उसकी पहचान हो सकी थी.

जिस खालिद शेख मोहम्मद नाम के व्यक्ति ने ही डेनियल पर्ल को मारा और उसी ने ग्यारह सितंबर की घटना को अंजाम दिया.

कराची में कई हफ्ते पर्ल के हत्यारों की तलाश में भटकने के बाद मैं अमरीका चली गई थी, लेकिन वहां भी मैं अपने इस मकसद में लगी रही.

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पर्ल प्रोजेक्ट

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इसी मकसद से साल 2007 में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की एक टीम के साथ मैंने पर्ल प्रोजेक्ट पर काम किया और उसमें हम पूरी छानबीन के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि पर्ल की हत्या कंधार विमान अपहरण के बाद रिहा किए गए पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिक उमर शेख ने नहीं, बल्कि खालेद शेख मोहम्मद ने की है.

पहले अमरीकी अधिकारी इस मामले में कार्रवाई नहीं कर रहे थे लेकिन बाद में शेख मोहम्मद ने भी पर्ल की हत्या की बात स्वीकार कर ली और उन्हें बाद में गिरफ्तार कर ग्वांटानामो बे भेज दिया गया.

दरअसल, हम लोग नौ सितंबर की घटना के हमलावरों की तलाश में निकले थे. हमारे साथ कई और पत्रकार भी. 23 जनवरी 2002 को हम लोग कराची पहुंचे थे.

डेनी के साथ मेरी कई यादें जुड़ी हैं. उसका मुस्कराता चेहरा हमेशा सामने आ जाता है. जब आखिरी बार वो हमसे अलग हुए थे तो ड्राइवर से मैंने कहा था कि इनका ख़याल रखना. दरअसल डेनी उस व्यक्ति से मिलने जा रहा था जो एक विद्यार्थी था और उसका दावा था कि वो शेख़ मोहम्मद से मिल चुका है.

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गर्भावस्था

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जब डेनी आए नहीं तो हम लोग सारी रात नहीं सोए और अगले दिन मैं अपने मित्र कामरान के साथ डेनी का पता लगाने गई और कराची पुलिस से मदद माँगी. हम लोग बहुत परेशान थे, उस वक्त मैं गर्भवती भी थी.

डेनियल की तलाश में मैंने पांच हफ्ते वहां बिताए. उनकी तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी, कराची की सड़कों पर हम लोग मोटरसाइकिल से भी घूमे, उनके ईमेल्स चेक किए. हम हर उस जगह गए जहां हमें लगता था कि डेनी के बारे में कुछ पता लग सकता है.

कुछ दिनों के बाद इंटरनेट पर डेनियल की मौत का भयानक वीडियो आया तो मैं उसे देखना चाहती थी लेकिन मैंने खुद को रोक लिया और करीब एक साल के बाद इसे देखा.

ग्वांटानामो बे से वापस लौटने के बाद मैं उस तरह शोक में नहीं डूबी जिस तरह से पर्ल की हत्या के बाद हो गई थी. वहां से लौटने के बाद मैंने कोशिश की कि मैं अपना जीवन सामान्य तरीके से जिऊं और अपने परिवार, अपने दोस्तों के साथ वक्त बिताऊं.

(डेनियल पर्ल एक अमरीकी पत्रकार थे. वाल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डेनियल पर्ल का अपहरण उस समय किया गया था जब वे साल 2002 में एक स्टोरी को लेकर कराची में थे. अपहरण के बाद उनकी हत्या कर दी गई. उनकी लाश कराची के बाहरी इलाके में मिली थी.)

(असरा नोमानी डेनियल पर्ल की मित्र और उनकी सहयोगी थीं. डेनियल की हत्या के बाद उन्होंने ये ठान लिया था कि वो उनके हत्यारों का किसी भी कीमत पर पता लगाएंगी. बीबीसी संवाददाता मैथ्यू के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि किस तरह से उन्होंने ग्वांटानामो बे में शेख मोहम्मद का सामना किया.)

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