डेनमार्क चिड़ियाघर में एक जिराफ़ को बचाने की मुहिम

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डेनमार्क की राजधानी और देश के सबसे अधिक आबादी वाले शहर कोहेनहेगन के एक चिड़ियाघर में युवा होते एक जिराफ़ की जान पर बन आई है.

चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि यूरोपीय नियमों के मुताबिक़, मारियस नाम के इस जिराफ़ को चिड़ियाघर के भीतर प्रजनन की अनुमति नहीं है और उसके लिए कोई नया ठिकाना भी नहीं मिल रहा है.

अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले कि मारियस जवान होकर प्रजनन का प्रयास करे, उसे मारना होगा.

लेकिन देश के पशुप्रेमी इस तर्क से सहमत नहीं हैं और मारियस को बचाने की मुहिम चला रहे हैं.

कोपेनहेगन में मौजूद बीबीसी संवाददाता मैल्कम ब्रबेंट का कहना है कि मारियस की उम्र अभी 18 महीने है और वह पूरी तरह से स्वस्थ है, लेकिन उसे यह नहीं पता कि रविवार उसकी ज़िंदगी का आख़िरी दिन हो सकता है.

मांस का क्या करेंगे

चिड़ियाघर के वरिष्ठ अधिकारी बेंग्ट होल्स्ट का कहना है कि मारियस की प्रजाति के और जिराफ़ पहले से ही चिड़ियाघर में मौजूद हैं.

वह मारियस को मारे जाने के लिए तर्क देते हैं कि आबादी पर नियंत्रण के इरादे से कोपेनहेगन में हर साल 700-800 हिरणों को मार दिया जाता है.

योजना के मुताबिक़ मारियस को बोल्ट गन से मारा जाना है. मारियस को जहर का इंजेक्शन नहीं दिया जाएगा क्योंकि इससे उसका मांस दूषित हो सकता है.

एक स्थानीय अख़बार के मुताबिक़, होल्स्ट का कहना है कि कई किलोग्राम मांस को फेंकना बड़ी बेवक़ूफ़ी होगी, मांस का कुछ हिस्सा शोध के लिए इस्तेमाल होगा, बाकी शेरों और दूसरे मांसहारी जानवरों का भोजन बन जाएगा.

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