बंदियों पर अमरीका के लिए करज़ई के सुर तीखे

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Image caption अमरीका का कहना है कि कुछ रिहा हुए बंदी फिर चरमपंथ की राह ले चुके हैं

अफ़ग़ानिस्तान की कड़ी सुरक्षा वाली बगराम जेल से 65 बंदियों को रिहा कर दिया गया है. अमरीका ने इस फ़ैसले को 'काफ़ी अफ़सोसजनक' बताया है.

काबुल में अमरीकी दूतावास की ओर से कहा गया है कि जिन लोगों को रिहा किया गया है उनमें से कुछ बंदी अफ़ग़ान नागरिकों और अफ़ग़ान तथा अमरीकी नेतृत्त्व में वहाँ तैनात फ़ौज के सैनिकों की हत्या के लिए ज़िम्मेदार थे.

अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने पिछले साल बगराम का ज़िम्मा सँभाला है और उसका कहना है कि उन बंदियों के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं थे.

अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि ये रिहाई 'अमरीका के लिए चिंता की बात नहीं' है.

तुर्की की राजधानी अंकारा में एक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद करज़ई ने कहा कि अमरीका को उनके देश की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए.

काबुल से बीबीसी संवाददाता डेविड लॉइन के अनुसार गुरुवार सुबह से ही जेल के दरवाज़े से छह-छह बंदियों के ग्रुप निकलने शुरू हो गए थे.

करज़ई ने उस जेल को 'तालिबान पैदा करने वाला कारख़ाना' करार दिया है.

'अफ़ग़ान सरकार होगी ज़िम्मेदार'

आज ये जेल परवान हिरासत केंद्र के तौर पर जानी जाती है. वहाँ से निकलते हुए कुछ बंदी हँस रहे थे तो कुछ मुस्कुरा रहे थे.

अमरीकी सरकार ने कहा है, "अफग़ान सरकार अपने फ़ैसले के लिए ख़ुद ज़िम्मेदार होगी."

मगर राष्ट्रपति करज़ई ने इस आलोचना को ख़ारिज किया.

एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए करज़ई ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान एक संप्रभु देश है. अगर अफग़ान न्यायिक व्यवस्था क़ैदियों को रिहा करने का फ़ैसला करती है तो ये अमरीका के लिए चिंता का विषय न तो है और न ही होना चाहिए."

अमरीकी सेना की ओर से कहा गया है कि जब से उस जेल की कमान अफ़ग़ानों के नियंत्रण में गई है उस समय से रिहा हुई कुछ बंदी 'पहले ही लड़ाई में लौट चुके हैं. इसके बाद अगर कुछ और बंदी रिहा होते हैं तो वे भी चरमपंथ की ओर ही जाएँगे.'

बीबीसी संवाददाताओं के अनुसार ये अमरीका और अफ़ग़ान रिश्तों के और बुरे होने का संकेत है. संवाददाताओं का कहना है कि ये एक राजनीतिक फ़ैसला था जो ख़ुद राष्ट्रपति करज़ई ने लिया है.

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