ट्विटर, दिनार और 'धोखा'

  • 16 फरवरी 2014
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बीबीसी ट्रेंडिंग की जांच में पता चला है कि अमरीका में सबसे बड़े ट्विटर ट्रेंड में से एक - #वीआरदपीपल (#wearethepeople) में इराकी दिनार को लेकर कुछ ऐसे दावे भी किए गए हैं जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष "पूरी तरह फ़र्ज़ी" मानता है.

ये हैशटैग बहुत बड़ा दिखाई देता है. 26 जनवरी को शुरू होने के बाद से अब तक #वीआरदपीपल हैशटैग के साथ चालीस लाख से ज़्यादा ट्वीट हो चुके हैं. पहली नज़र में ऐसा लगता है कि जो लोग इस हैशटैग का इस्तेमाल कर रहे हैं वे बैंकों और व्यवस्था के विरोधी हैं - ठीक ऑक्यूपाई मूवमेंट की तरह.

लेकिन कई ट्वीट में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया है जो किसी बाहरी व्यक्ति की समझ से परे है. और अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ जार्गन या कठिन शब्द दिखाई पड़ते हैं.

लेकिन ऐसा है नहीं. एक बड़ा ट्विटर अकाउंट जो इस हैशटैग के साथ ट्वीट कर रहा है वो @THE_TNT_TEAM है. इसके ढाई लाख से ज़्यादा फॉलोअर हैं. लेकिन इस खाते पर किए टेस्ट से पता चलता है कि इनमें से 65% से 80% फॉलोअर फ़र्ज़ी हैं. लेकिन जो असली फॉलोअर हैं वो इसमें पूरी तरह डूबे हुए हैं. इस ग्रुप के चैट फ़ोरम के आंकड़ों से पता चलता है कि रोज़ाना करीब 25,000 लोग लॉगइन करते हैं.

'ख़तरनाक विचार'

तो मामला आखिर है क्या?

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Image caption अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि दिनार को लेकर किए जा रहे दावे पूरी तरह फ़र्ज़ी हैं.

इस ट्रेंड के पीछे जो व्यक्ति है वो ख़ुद को "टीएनटी टोनी" बुलाना पसंद करते हैं. टीएनटी टोनी अमरीकी नागरिकों को इराकी दिनार में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. टीएनटी टोनी का कहना है कि इराकी दिनार का पुनर्मूल्यन कभी भी हो सकता है, ऐसे में जो लोग दिनार ख़रीदेंगे वो रातों रात अमीर हो जाएंगे. टीएनटी टोनी नियमित रूप से फॉलोअर्स को दिनार के बारे में ताज़ा सूचनाएं देते हैं.

बीते कुछ महीनों में वो ज़्यादा सक्रिय हुए हैं, उनका कहना है कि पुनर्मूल्यन को लेकर एक गुप्त करार हो चुका है और मुद्रा की ये दर "खास" लोगों को ही पता है. कुल मिलाकर उनका दावा है कि इस बारे में एक वैश्विक मुद्रा षडयंत्र रचा जा रहा है.

हालांकि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बीबीसी ट्रेंडिंग को बताया कि जो दावे किए जा रहे हैं वे "पूरी तरह फ़र्ज़ी" हैं. हार्वर्ड विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ़ इकनॉमिक्स के जिन आला अर्थशास्त्रियों से हमने बात की उन्होंने इन विचारों को "पूरी तरह बकवास" और "ख़तरनाक" बताकर खारिज कर दिया. इन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इराकी दिनार साल 2010 से ही स्थिर है और अगर इसका पुनर्मू्ल्यन होता भी है तो डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत बढ़ेगी नहीं बल्कि कम होगी.

टीएनटी टोनी ने इस रिपोर्ट के लिए सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया.

बिखरे परिवार

अमरीका में दिनार का कारोबार बैंकों में नहीं होता, इसलिए दिनार की ख़रीद-फ़रोख़्त एक "दिनार डीलर" के ज़रिए होती है जो मोटा कमीशन लेता है. अब जब तक कि 'दिनार डीलर्स' और उसमें निवेश को प्रोत्साहित कर रहे लोगों में किसी तरह की लेनदेन न हो रही हो तब तक ये पूरी तरह वैध है. टीएनटी टोनी के मामले में हमें कुछ ऐसा नज़र नहीं आया जिससे लगे कि वो क़ानून से बाहर रहकर काम कर रहे हैं.

टीएनटी टोनी उन लोगों में से एक हैं जो जो दिनार में निवेश को लेकर ऑनलाइन फ़ोरम पर सलाह और ताज़ा "गुप्त जानकारी" देते हैं. अमरीका में इसका इतिहास काफ़ी लंबा है. बीबीसी ट्रेंडिंग ऐसे कई लोगों के संपर्क में है जिन्होंने दिनार में निवेश किया, इस उम्मीद में कि उन्हें एक हज़ार गुना तक मुनाफ़ा होगा.

मार्कस कर्टिस साल 2010 से अब तक इराकी दिनार में 3,000 डॉलर से ज़्यादा निवेश कर चुके हैं.

वो कहते हैं, "मैंने ज़िंदगी के दो साल इन फ़ोरम में लोगों से बातें करते हुए और ऐसी चीज़ें सीखने में लगा दिए जो सच नहीं थी."

अब कर्टिस दिनार का प्रचार कर रहे लोगों के ख़िलाफ़ अभियान चलाते हैं. वो कहते हैं कि कई परिवार इसलिए बिखर गए या लोगों को इसलिए घर बेचने पड़े क्योंकि दिनार पर क्षमता से ज़्यादा ख़र्च कर दिया गया."

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