सीरियाई वार्ता बेनतीजा, ब्राहिमी ने माफ़ी माँगी

  • 15 फरवरी 2014
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सीरियाई शांति वार्ता का दूसरा दौर बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गया है. कई दिन से चल रही इस बातचीत में कोई प्रगति नहीं हो पाई.

संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत लख्दर ब्राहिमी ने सीरियाई लोगों से माफ़ी मांगी है और कहा है कि वो तीसरे दौर की बातचीत की तारीख़ भी तय नहीं कर पाए हैं.

ब्राहिमी ने बताया कि सीरियाई सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के एजेंडे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें एक अंतरिम सरकार के गठन की बात भी कही गई है.

हालांकि उन्होंने ये उम्मीद नहीं छोड़ी है कि सीरियाई सरकार और विपक्ष फिर से बातचीत करेंगे.

ब्राहिमी ने कहा बिना किसी मक़सद के मुलाक़ात करने से बेहतर होता कि दोनों दलों ने इस बात पर विचार करते वे शांतिवार्ता चाहते हैं या नहीं.

जिनेवा में मौजूद बीबीसी संवाददाता के मुताबिक वार्ता के शुरुआती दौर में हुए समझौते के तहत अंतरिम प्रशासन के गठन के संबंध में दोनों पक्षों ने अलग-अलग मायने निकाल लिए थे.

विद्रोहियों और सीरियाई सरकार के बीच गतिरोध को ख़त्म करने के उद्देश्य से यह वार्ता हो रही थी.

शांतिवार्ता को उस समय झटका लगा था जब दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर आरोप लगाए थे और सरकार की ओर से कहा गया था कि विद्रोहियों की मांगें वास्तविक नहीं हैं.

सीरिया में मार्च 2011 से जारी गृह युद्ध में एक लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

वहीं हिंसा के कारण लगभग 95 लाख लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

बेनतीजा बातचीत

इससे पहले ब्राहिमी ने कहा था कि अमरीका और रूस के अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे हालात बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे.

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Image caption संघर्ष के कारण लाखों परिवारों को घर छोड़ना पड़ रहा है.

संवाददाताओं का कहना है कि सीरिया में बहुत से लोगों को लगता है कि दो दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के कारण ऐसी कोई भी उम्मीद बेमानी है.

अब तक की वार्ता में सिर्फ़ होम्स शहर में संयुक्त राष्ट्र की मदद पहुंचाए जाने और फंसे हुए लोगों को बाहर निकाले जाने पर ही रज़ामंदी हो सकी है.

छह दिन पहले शुरू हुई वार्ता इसके सिवा और कुछ भी हासिल करने में नाकाम रही है. राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार और विद्रोहियों के बीच फ़ासला कम नहीं हो सका.

सीरिया सरकार विद्रोहियों के ख़िलाफ़ लड़ाई ज़ारी रखने पर ज़ोर दे रही है जबकि विद्रोहियों का कहना है कि चुनाव होने तक अंतरिम प्रशासन देश की कमान संभाले.

सीरियाई अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति बशर अल असद को हटाए जाने का सवाल ही नहीं उठता.

वहीं विद्रोहियों के प्रवक्ता का कहना है कि सरकारी पक्ष संवेदनशीलता दिखाने में नाकाम रहा.

हिंसा जारी

संवाददाताओं के मुताबिक 22 जनवरी को जिनेवा में शांति-वार्ता का पहला दौर शुरू होने के बाद से अब तक सीरिया में पाँच हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों की प्रमुख वेलेरी एमोज़ ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आग्रह किया था कि सीरिया में मानवीय मदद पहुंचाने के रास्ते खुलवाए जाए.

सीरिया में मदद पहुँचाए जाने के मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भी गतिरोध है. सीरिया में लाखों लोग अपना घर छोड़ने के लिए मज़बूर हैं.

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