यूक्रेन: सरकार संघर्ष विराम पर राज़ी

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Image caption वोलोडिमिर ज़माना की बर्ख़ास्तगी की कोई वजह नहीं बताई गई

यूक्रेन में राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच ने कहा है कि वह हिंसा ख़त्म करने के इरादे से विपक्षी नेताओं के साथ संघर्ष विराम और बातचीत के लिए राज़ी हो गए हैं.

बीते दो दिनों में राजधानी कीएफ़ में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कम से कम 26 लोग मारे जा चुके हैं.

इससे पहले, यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच की वेबसाइट पर दी जानकारी में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने देश की सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख कर्नल जनरल वोलोडिमिर ज़माना को बर्ख़ास्त कर दिया है. उनकी जगह नए सेना प्रमुख की तैनाती की गई है.

सेना प्रमुख की बर्ख़ास्तगी की यह ख़बर ऐसे समय आई है जब देश की राजधानी कीएफ़ में बीते साल नवंबर में आरंभ हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन चरम पर पहुंच गए हैं.

इससे पहले देश की सुरक्षा सेवा ने कहा है कि वह देश में बढ़ते 'चरमपंथी ख़तरे' से निपटने के लिए देशव्यापी 'चरमपंथी निरोधक' मुहिम आरंभ कर रही है.

ऐसे संकेत भी मिले हैं कि देश भीतर पहली बार सशस्त्र बलों की तैनाती की जा सकती है.

ओबामा की चेतावनी

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यूक्रेन को यह सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है कि सेना को ऐसे मामलों में दख़ल नहीं देना चाहिए जिनका समाधान असैन्य तरीके से किया जा सकता है.

दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए ओबामा ने कहा है कि अमरीका और उसके यूरोपीय सहयोगी यूक्रेन के हालात पर नज़र रख रहे हैं.

नैटो के आला सैन्य कमांडर ने भी यूक्रेन के नेताओं से कहा है कि वह सेना का इस्तेमाल नहीं करें और नए सैन्य नेतृत्व के साथ बातचीत करें.

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इसबीच जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने भी कहा है कि यूक्रेन में बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं.

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यूक्रेन में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की शुरुआत नवंबर में तब हुई थी जब राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच ने रूस के साथ संबंधों को तरजीह देते हुए यूरोपीय यूनियन के साथ एक समझौते को ख़ारिज़ कर दिया था.

नियंत्रण

इसके बाद से ही सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी राजधानी कीएफ़ की सड़कों पर उतरे हुए हैं. बीच में कुछ समय के लिए उन्होंने सरकारी इमारतों पर भी नियंत्रण कर लिया था.

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इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था लेकिन बाद में संसद में आम माफ़ी पर सहमति बनने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था.

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तब उम्मीद जताई गई थी कि रिहाई के कदम से प्रदर्शनों का सिलसिला ख़त्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

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एक दिन पहले ही संविधान में कुछ बदलावों के मुद्दे पर विपक्षी कार्यकर्ताओं ने संसद की ओर मार्च निकालना चाहा था.

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच ज़बरदस्त झड़पों में दोनों ओर से कम से कम 26 लोग मारे जा चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून समेत जर्मनी और अमरीका ने यूक्रेन में जारी गतिरोध और हिंसा पर चिंता जताई है.

वहीं रूस इस पूरे घटनाक्रम के लिए पश्चिमी देशों और यूरोपीय ढ़ांचे को ज़िम्मेदार बताता रहा है. रूस कहता रहा है कि यह यूक्रेन का अंदरुनी मामला है और विदेशी ताक़तों में इसमें दख़ल नहीं देना चाहिए.

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