ऑपरेशन ब्लू स्टार: ब्रिटेन सरकार से जांच की मांग

  • 21 फरवरी 2014
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ब्रिटेन में सिख संगठनों ने ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन की भूमिका की व्यापक सार्वजनिक जांच की मांग की है.

ब्रिटेन के सिख फ़ेडरेशन और ब्रिटिश सिख काउंसिल के समर्थन से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को लिखे एक खुले पत्र में कहा गया है कि इस मामले में अभी बहुत से गंभीर सवालों के जवाब बाकी हैं.

सिख फ़ेडरेशन के दबिंदरजीत सिंह ने कहा कि इस बारे में संसद में दिया गया विदेश मंत्री विलियम हेग का बयान गुमराह करने वाला है.

हालांकि ब्रिटेन सरकार अपने बयान पर कायम है.

कैमरन ने जनवरी में कैबिनेट सेक्रेटरी सर जेरमी हेवुड को ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटिश सरकार की संलिप्तता के दावों की जांच का काम सौंपा था.

हेग ने इस महीने के शुरू में इस जाँच की रिपोर्ट संसद में पेश की थी जिसमें उन्होंने इस बात की पुष्टि की थी कि भारत सरकार ने एक सैन्य अधिकारी से इस मामले में सलाह मांगी थी.

जेरमी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सलाह के तौर पर संबंधित सैन्य अफसर ने कहा था कि मंदिर पर कार्रवाई आख़िरी विकल्प रहनी चाहिए वहीं जानमाल के कम से कम नुक़सान के लिए हेलिकॉप्टरों के इस्तेमाल की सलाह दी गई थी.

हेग ने संसद में कहा कि भारतीय सरकार का अभियान "सलाह से अलग तरह से किया गया", क्योंकि इसमें हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं हुआ.

'रिपोर्ट सच से परे'

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दबिंदरजीत सिंह का कहना है, ''इस बारे में हर किताब कहती है कि वास्तव में हेलिकॉप्टर गनशिपों का इस्तेमाल हुआ था. इन्हें चार, पाँच और छह जून 1984 को इस्तेमाल किया गया था. इसलिए ये तथ्य संसद में कही गई बातों से अलग हैं.''

उन्होंने कहा, ''इसलिए न केवल विदेश मंत्री और उनकी रिपोर्ट भ्रामक है बल्कि ये सच से परे है.''

ये जाँच पिछले महीने तब शुरू की गई थी जब ये कहा गया कि सार्वजनिक हुए गोपनीय दस्तावेज़ों में कहा गया कि ऑपरेशन ब्लू स्टार की योजना में मार्गरेट थैचर सरकार भी शामिल थी.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इसमें 575 लोग मारे गए थे लेकिन हेग का कहना है कि "दूसरी रिपोर्टों के अनुसार गोलीबारी में कम से कम तीन हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए, जिनमें श्रद्धालु भी शामिल थे."

हेग ने ये भी कहा था कि ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन के शामिल होने का असर "सीमित" था.

हालांकि सिंह का दावा है कि इसमें जिन टैंकों का इस्तेमाल हुआ था वो ब्रिटिश कंपनियों ने बनाए थे और भारतीय सेना के अधिकारी इंग्लैंड आए थे ताकि विशेष दस्तों के लिए प्रशिक्षण के बारे में पता किया जा सके.

उन्होंने कहा, ''सवाल ये है कि ब्रिटेन ने उन्हें ट्रेनिंग की पेशकश क्यों दी? उन्होंने उस विशेष दस्ते का स्वागत क्यों किया, जिसने सिखों के ख़िलाफ़ अभियान को अंजाम दिया.''

'सीमित मदद'

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उनका कहना है कि कैबिनेट सेक्रेटरी की जाँच बहुत सीमित दायरे में की गई. रिपाोर्ट में कहा गया है कि सलाह दी गई थी लेकिन वो ये नहीं बताती कि किस परिप्रेक्ष्य में सलाह दी गई. उन्होंने सवाल उठाया कि ब्रितानी सरकार ने किसी भी तरह की सैन्य सहायता क्यों उपलब्ध कराई?

हालांकि हेग ने लेबर सांसद जॉन मैकडोनल की इस मामले में व्यापक सार्वजनिक जांच की मांग को खारिज कर दिया था.

उन्होंने कहा, "दुनियाभर में सिख समुदाय अब भी इस दर्द और घटना से हुई पीड़ा से उबर नहीं पाया है.''

ब्रिटिश सरकार के एक प्रवक्ता ने पत्र में लगाए गए आरोपों पर कहा, ''कैबिनेट सेक्रेटरी की रिपोर्ट में पाया गया कि ब्रिटेन ने भारत सरकार की जो मदद की वो आरंभिक स्तर पर पूरी तरह सलाह आधारित और सीमित थी.''

उन्होंने कहा, ''तत्कालीन सरकार ने मंदिर परिसर में भारतीय सेना को ऑपरेशन संबंधी सैन्य सलाह उपलब्ध कराने के लिए एक सैन्य सलाहकार भेजा था. लेकिन ये सलाह भी एक बार ही दी गई थी."

प्रवक्ता ने कहा, ''ब्रिटेन ने इसके अलावा भारत को ऑपरेशन ब्लू स्टार में ट्रेनिंग या साजोसामान के रूप में कोई सैन्य सहायता नहीं दी थी. वास्तविक ऑपरेशन भी भारत सरकार ने ब्रिटिश सैन्य अफ़सर के सुझाव से अलग तरह से क्रियान्वित किया.''

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