यूक्रेन: समझौते के बाद हुई झड़पों में 17 की मौत

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Image caption यूक्रेन की राधानी किएफ़ में शोक मनाता एक व्यक्ति

यूक्रेन की राजधानी किएफ़ में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई ताज़ा झड़पों में कम से कम सत्रह लोगों की मौत हो गई है.

बुधवार को देर रात तक चली बातचीत और सरकार और विपक्षी दलों के बीच समझौते के बावजूद गुरुवार को सुबह अचानक हिंसा भड़क गई.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इस दौरान गोलियाँ चलने की भी आवाज़ें सुनी गईं हैं लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ये गोलियाँ किसने चलाईं. प्रदर्शनकारी पेट्रोल बम फेंक रहे थे, वहीं पुलिस प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें कर रही थी.

यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच और विपक्षी दल के नेताओं से बात करने के लिए यूरोपीय संघ के तीन विदेश मंत्री गुरुवार को राजधानी किएफ़ पहुँचे हैं.

जर्मनी, पोलैंड और फ्रांस के विदेश मंत्रियों ने बीबीसी संवाददाता को बताया कि वे यूक्रेन के विपक्षी दल के प्रतिनिधियों से मिल चुके हैं और अब वे यूक्रेन के राष्ट्रपति से मिलेंगे.

यूरोपीय संघ यूक्रेन पर पाबंदी के बारे में बाद में बातचीत करेगा.

किएफ़ में मौजूद बीबीसी संवाददाता केविन बिशप ने बताया कि उन्होंने होटल यूक्रेन के आगंतुक कक्ष के बाहर पाँच शव देखे. दूसरे देशों से पहुँचे मीडियाकर्मी इसी होटल में रुके हुए हैं.

यूक्रेन के राष्ट्रपति की वेबसाइट पर प्रकाशित एक संदेश विपक्ष पर हिंसा शुरू करने का आरोप लगाते हुए कहा गया है, "शांति समझौते और बातचीत की बात केवल मैदान में स्थित चरमपंथियों को संगठित और हथियारबंद करने के लिए समय पाने का तरीका है."

सुरक्षा कारण

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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मैदान स्थित मुख्य विरोध कैंप में रात भर आग जलती रही. मंगलवार सुबह वहाँ मौजूद बीबीसी संवाददाताओं ने बताया कि वहाँ पर गोलियाँ भी चलीं. एक घायल व्यक्ति का उपचार भी किया जा रहा है.

मैदान चौराहे की तरफ दो वाहनों में जाते हुए हथियार बंद लोग देखे जा सकते थे.

गुरुवार को मृतकों के लिए श्रद्धांजलि दिवस घोषित किया गया है.

नवंबर में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद से मंगलवार का दिन सबसे हिंसक रहा. मंगलवार को मरने वालों की संख्या नवंबर के बाद से अब तक सबसे ज़्यादा रही है.

यूक्रेन में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की शुरुआत नवंबर में तब हुई थी जब राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच ने रूस के साथ संबंधों को तरजीह देते हुए यूरोपीय यूनियन के साथ एक समझौते को ख़ारिज़ कर दिया था.

इसके बाद से ही सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी राजधानी कीएफ़ की सड़कों पर उतरे हुए हैं. बीच में कुछ समय के लिए उन्होंने सरकारी इमारतों पर भी नियंत्रण कर लिया था.

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