जब मची थी व्हिस्की की लूट

व्हिस्की गैलोर इमेज कॉपीरइट

क़रीब 73 साल पहले स्कॉटलैंड के पास डूबे एसएस पॉलिटिशियन जहाज़ के किस्से आज भी दुनिया भर में 'व्हिस्की गैलोर' के रूप में जिंदा हैं. इस पर फ़िल्में भी बन चुकी हैं और चर्चित नाटक खेले जाते हैं. व्हिस्की गैलोर की सच्ची कहानी को जानना भी कुछ कम दिलचस्प नहीं.

तीन फरवरी 1941. एसएस पॉलिटिशियन नाम का विशालकाय मालवाहक जहाज़ इंग्लैंड के लीवरपूल से चला. ये जहाज़ अपनी एक ख़ास यात्रा पर था.

दूसरे विश्व युद्ध के दिन थे. 8000 टन माल ढोने की क्षमता वाले जहाज़ पर लदी थीं 30,000 माल्टा व्हिस्की बोतलें. एसएस पॉलिटिशियन को किंगस्टन, जमैका से होते हुए न्यू ओरलियंस पहुंचना था.

पूरी दुनिया पर विश्व युद्ध का असर साफ़ था. सामान की कमी थी. शराब भी बाज़ार से गायब हो चुकी थी.

तमाम इलाक़ों में ये राशन से मिल रही थी. फिर माल्टा व्हिस्की तो क्वालिटी के लिहाज से सबसे बेहतरीन व्हिस्कीमानी जाती थी.

डूब गया जहाज़

जहाज़ का पहला दिन ठीक बीता. दूसरा दिन भी सही रहा. पाँच फरवरी 1941 को वह जब स्कॉटलैंड की पश्चिमी खाड़ी को पार कर रहा था, तभी ये खाड़ी से टकराया और डूबने लगा. जहां ये हादसा हुआ वो जगह स्कॉटलैंड के हैब्रिडीन में एरिस्के थी.

इमेज कॉपीरइट

जहाज़ डूबने लगा तो लोगों को जबरदस्त आवाज़ सुनाई पड़ी. प्रत्यक्षदर्शी जान कैंपल नोमेल कहते हैं, ''ऐसी आवाज़ हमने पहले कभी नहीं सुनी थी. हम समुद्र की ओर दौड़े और जहाज़ को डूबते हुए देखा. जहाज़ से व्हिस्की के डिब्बे गिर रहे थे.''

वह याद करते हैं, ''हर किसी में जहाज़ तक पहुंचने की होड़ लग गई. लोग छोटी नौकाएं लेकर जहाज़ तक पहुंचे और व्हिस्की की बोतलों को बटोरने लग गए.''

उन्होंने कहा, ''जिसे देखो वही नाव में व्हिस्की की बोतलें भर रहा था, दूसरे विश्व युद्ध का समय था. व्हिस्की का अकाल था. विश्वास नहीं हो रहा था कि व्हिस्की की बोतलें ऐसे भी बरस सकती हैं. लूट मची हुई थी.''

आला दर्जे की व्हिस्की

दूसरे विश्व युद्ध के उन दिनों में शराब की कालाबाज़ारी हो रही थी. राशनिंग में जो व्हिस्की मिलती थी, वो भी खराब क्वालिटी वाली. जहाज़ से गिरी व्हिस्की की बोतलें तो आला दर्जे की थीं, माल्टा व्हिस्की की बोतलें.

कस्टम को पता लगा. उन्होंने तुरंत बोतलें बटोरने और घर ले जाने पर रोक लगा दी. लोग कहां मानने वाले थे. फिर शुरू हुई द्वीप पर रहने वाले लोगों के घरों, दुकानों और ऑफिसों की तलाशी. ये अभियान जमकर चला.

कस्टम के लोग सघन तलाशी ले रहे थे. कुछ ने बोतलें उन्हें दे दीं. कुछ ने इन्हें छिपाने के ढेर सारे जतन किए. किसी ने चिमनी में छिपाया तो किसी ने बिस्तर के नीचे और गार्डन में ज़मीन के नीचे भी.

19 लोगों को पकड़ा गया. उन्हें जेल की सज़ा हुई. तब भी कस्टम को बहुत कम बोतलें मिल पाईं.

इमेज कॉपीरइट

कुछ तो इन्हें ख़त्म करने में लग गए. कई दिन और कई रात व्हिस्की में डूबे रहे. उन दिनों पूरा द्वीप एक अलग खुमारी में डूबा मिलता था.

एरिस्के निवासी क्रॉम्पटन मैकेजीं ने इस पूरे वाकये पर ''व्हिस्की गैलोर'' नाम से उपन्यास लिखा जिस पर वर्ष 1949 में इसी नाम से फिल्म भी बनी. जो काफ़ी चर्चित रही.

कॉम्पटन मैकेंज़ी से साल 1966 में बीबीसी की बात हुई थी. उन्होंने कहा, ''पूरा वाकया बहुत अजीब था. सब व्हिस्की बोतलों को छोटी-बड़ी नावें लेकर लूटने-तलाशने में लगे थे.''

अब भी मांग

बकौल उनके, ''एरिस्गो के लिए ये समुद्र से आया उपहार था. जब कस्टम वालों ने इन्हें ढूंढना शुरू किया तो लोगों ने अजीबोगरीब तरीक़े से छिपाने की कोशिश की.''

मैकेंज़ी ने कहा, ''हालत ये थी कि कुछ लोगों ने इसे गटर तक में छिपा दिया. नालियों में बेतहाशा व्हिस्की बहाई गई. कई लोगों ने इसे बेशकीमती समझकर किसी तरह सुरक्षित रखने की कोशिश की.''

अब भी इन दुर्लभ माल्टा व्हिस्की बोतलों की खूब मांग है. जिन लोगों ने इन्हें जतन से सुरक्षित छिपाया, वो अब मालामाल हो रहे हैं, ये बोतलें बहुत ऊंची क़ीमतों पर बिक रही हैं. ''व्हिस्की गैलोर'' दौर की एक बोतल 18 हजार पाउंड तक की बिकी.

स्कॉटलैंड की पश्चिमी खाड़ी में व्हिस्की गैलोर के किस्से आज भी जीवित हैं. लोग इन्हें तरह तरह से सुनाते हैं. इस पर तमाम नाटक खेले जाते हैं. फ़िल्में भी बनीं. कुल मिलाकर ''व्हिस्की गैलोर'' इतिहास की एक चर्चित और यादगार घटना बन चुकी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार