समुद्र से निकले और धरती पर ग़ायब हुए 'वह'

  • 23 फरवरी 2014
यूनानी देवता अपोलो, कांस्य प्रतिमा, गाज़ा इमेज कॉपीरइट

प्यार और कविता के यूनानी देवता अपोलो की प्राचीन कांस्य प्रतिमा कुछ दिन तक ईबे पर बिक्री के लिए दिखने के बाद अचानक गायब हो गई है.

पिछली गर्मियों में ग़ज़ा के समुद्र तट पर मिली यह प्रतिमा करीब 2,500 साल पुरानी बताई जा रही है और बेशकीमती है.

जॉदात अबु ग़ुरब एक भवन निर्माता थे लेकिन 2007 में इज़्राइल ने ग़ज़ा पट्टी में इमारती सामान की आपूर्ति रोक दी तो वह अपने पिता की तरह ही मछुआरे बन गए.

उनके पास एक छोटी नाव है इसलिए वह बहुत दूर नहीं जाते और छोटी मछलियां ही पकड़ते हैं. लेकिन पिछले अगस्त में दीयर अल-बालाह के इस 29 साल के युवक के जाल में कुछ अनोखी चीज़ फंस गई.

उस दिन उनके चाचा भी मछलियों का शिकार कर रहे थे लेकिन जल्द ही लौट गए थे. ग़ुरब ने काम जारी रखा था.

'बीवी ने चेहरा ढक लिया'

इमेज कॉपीरइट Reuters

वह बताते हैं, "मैं समुद्र में अपनी छोटी नाव और पतवार के साथ अकेला रह गया था. मैंने घंटों इंतज़ार किया लेकिन मुझे कल्पना नहीं थी कि समुद्र की गहराइयों में किस्मत ने मेरे लिए क्या छुपाकर रखा है."

उन्होंने कहा, "कई बार लहरें समुद्र के तल की ओर चलती हैं और छोटी मछलियां भोजन की तलाश में वहां जाती हैं. मैंने तट से थोड़ी सी दूरी, बस 100 मीटर, पर मछलियों का जमावड़ा देखा. मैंने नाव खेकर वहां जाकर देखा कि रेत में एक आदमी की आकृति है, जो रेत में आधा फंसा हुआ था."

पहले-पहल ग़ुरब डर गए. वह पानी को घूरते रहे लेकिन आदमी की शक्ल पहचान में नहीं आई. फिर वह पानी में कूद गए और इस मूर्ति को छुआ तो यह पत्थर जैसी महसूस हुई.

वह कहते हैं, "मैंने इसे हिलाने की कोशिश की ताकि यह सुनिश्चित हो जाए कि यह एक मूर्ति है, लेकिन यह बहुत भारी थी. इसका रंग सुनहरा था इसलिए लग रहा था कि यह सोना है."

ग़ुरब ने उस जगह पर निशान बनाया और अपने रिश्तेदारों को लेने के लिए दौड़े. वह लौटे और साथ ही डुबकी लगाई- ग़ुरब का अनुमान है कि वह करीब 4 मीटर नीचे थी.

"हम लोग पानी के अंदर इसे एक या दो मीटर तक खींचते और फिर दोबारा कोशिश करने से पहले सांस लेने के लिए ऊपर आते."

इमेज कॉपीरइट
Image caption पीला रंग देखकर ग़ुरब को लगा था कि मूर्ति सोने की है. उनकी योजना इसे मिस्र में बेचने की थी.

चार घंटे की मेहनत के बाद वह उस चीज़ को पानी से बाहर निकालने में कामयाब हो गए. यह एक नंगे आदमी की प्रतिमा थी. उन्होंने उसे एक ठेले में लादा और ग़ुरब के घर ले आए.

ग़ुरब हंसते हुए कहते हैं, "मेरी बीवी ने जब घर में उस प्रतिमा को नंगा पड़े हुए देखा तो उसने अपना चेहरा ढक लिया और मुझसे उसे ढकने को कहा."

'कुछ नहीं मिला'

ग़ुरब के चाचा, आतेफ़, ने सुझाव दिया कि उस प्रतिमा को काटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बेचा जाए.

वह कहते हैं, "जब मैंने मूर्ति के सिर का पीला रंग देखा तो सोचा कि यह सोने की बनी हुई है. लेकिन मेरे एक बेटे ने सुझआव दिया कि इसकी एक उंगली काटकर उसे बाज़ार में ले जाकर जांच करवाई जाए."

"हमें याद आया कि हमारा एक रिश्तेदार पड़ोस में ही सोना बेचने का काम करता है. हमने उसे बुलाया और उसने इसकी जांच करके बताया कि यह कांसे का बना हुआ है."

लेकिन उसने यह भी कहा कि कांसे की प्रतिमा सोने से बनी मूर्ति से भी कीमती हो सकती है.

ग़ुरब ने सोचा कि इस मूर्ति को तस्करी करके मिस्र ले जाए और बेच दे. लेकिन ग़ज़ा में हमास के सत्ता में आने के बाद इज़्राइल और मिस्र को धोखा देने के लिए खोदी गई तस्करों की सुरंग को मिस्र की सेना ने पिछली गर्मियों में बंद कर दिया था.

पड़ोसियों ने सवाल पूछने शुरू कर दिए तो ग़ुरब ने अपने एक रिश्तेदार, जो कि हमास की सैन्य शाखा- इज़्ज़ अल-दिन अल क़स्साम ब्रिगेड- में एक कमांडर था, से मूर्ति को छुपाने में मदद मांगी.

वह कहते हैं, "जो लोग मूर्ति को ले गए उन्होंने कहा कि वह उसे बेचने के बाद मुझे बढ़िया राशि देंगे लेकिन हमें अभी तक कुछ नहीं मिला है."

कुछ वक्त तक यह ईबे पर बिक्री के लिए उपलब्ध थी, जहां इसकी कीमत 500,000 डॉलर (करीब 3.10 करोड़ रुपए) मांगी गई थी. लेकिन फिर यह ग़ायब हो गई.

'स्थिति की चिंता'

इमेज कॉपीरइट

हमास के पर्यटन और दुर्लभ वस्तुओं (एंटीक) के मंत्रालय के एक अधिकारी अहमद एलबुर्क़ कहते हैं कि उन्होंने आखिरी बार उस मूर्ति को अक्टूबर में देखा था.

उन्हें उसकी स्थिति की चिंता है. वह कहते हैं कि उसका रंग बदलता हुआ लग रहा है और उसकी एक आंख निकाल ली गई है.

वह कहते हैं कि लॉवर (पेरिस स्थित दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय) के 500 किलो और 1.75 मीटर की इस प्रतिमा को उधार लेने के अनुरोध का अभी अध्ययन किया जा रहा है.

हमास पुलिस ने ये मूर्ति देखने की मेरी अर्ज़ी ठुकरा दी.

ग़ज़ा पट्टी के उत्तर में रहने वाले लोगों का कहना है कि यह मूर्ति अब भी चरमपंथियों के पास ही है, जिन्होंने उसे हमास सरकार को सौंपने से इनकार कर दिया है.

लेकिन पक्का पता किसी को नहीं है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार