पाक: चरमपंथी ठिकानों पर हवाई हमले, 6 की मौत

  • 22 फरवरी 2014
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Image caption दो ठिकानों पर की गई कार्रवाई

पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तून ख़्वाह प्रांत के जिले हंगू में गनशिप हैलीकॉप्टरों ने संदिग्ध चरमपंथियों के ठिकाने पर गोलाबारी की है, जिसमें कम से कम छह चरमपंथियों के मारे जाने की ख़बर है.

सैन्य सूत्रों के अनुसार ये कार्रवाई शनिवार की सुबह जिला हंगू की तहसील टल में दो अलग-अलग ठिकानों पर हुई.

पाकिस्तान सरकार और तालिबान के प्रतिनिधियों की बातचीत में गतिरोध के बीच ये कार्रवाई हो रही है.

सरकार ने देश में कई बरसों से जारी चरमपंथी गतिविधियों को ख़त्म करने के लिए पिछले दिनों तालिबान से बातचीत शुरू की लेकिन दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर बातचीत के लिए गंभीर न होने का आरोप लगा रहे हैं.

बमबारी जारी

सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा बलों को गोपनीय जानकारी मिली थी कि हंगू और औरगजई एजेंसी के सरहदी इलाक़े तोरा उड़ी में स्थित चरमपंथियों के एक ठिकाने में किसी बड़ी कार्रवाई की तैयारी हो रही है, जिसके बाद उनके ठिकाने को गनशिप हैलीकॉप्टरों से निशाना बनाया गया.

सैन्य सूत्रों ने बताया कि टल के इलाक़े दरसमंद में भी चरमपंथियों के एक ठिकाने के निशाना बनाया गया है.

स्थानीय सूत्रों के अनुसार दोनों कार्रवाईयों में कम से कम छह चरमपंथी मारे गए हैं, जिसमें कुछ अहम कमांडर भी शामिल हैं, लेकिन अभी तक मरने वाले किसी कमांडर का नाम सामने नहीं आया है.

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Image caption तालिबान चरमपंथी कई बरस से पाकिस्तान के लिए चुनौती बने हुए हैं

दुआबा पुलिस स्टेशन के एसएचओ खान अल्ला खान ने बीबीसी को बताया कि इलाके में बदस्तूर गनशिप हैलीकॉप्टरों की बमबारी जारी है.

उन्होंने कहा कि तोरा उड़ी के इलाके में चरमपंथी कमांडर गुल जमान के मकान को निशाना बनाया गया है, जिनकी पुलिस को अलग-अलग मामलों में तलाश है.

पुलिस को अनुमति नहीं

एसएचओ ने कहा कि इलाके को सुरक्षा बलों ने घेरे में लिया हुआ है, जहां पुलिस को जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है.

ये ताजा कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब सरकार और तालिबान के बीच बातचीत गतिरोध का शिकार है और दोनों पक्ष एक दूसरे पर दबाव बढ़ा रहे हैं.

शांति वार्ता में गतिरोध उस समय आया जब तालिबान चरमपंथियों ने अर्धसैनिक बल एफ़सी के उन 23 जवानों के सिर कलम कर दिए जो उनकी क़ैद में थे.

सरकार ने कहा कि इस घटना के बाद बातचीत को आगे बढ़ाना मुनासिब नहीं होगा. सरकार चाहती है कि चरमपंथी बिना शर्त हमले बंद करें, जबकि तालिबान अपने सदस्यों के ख़िलाफ़ जारी कार्रवाइयों का हवाला देते हुए ऐसा करने को राज़ी नहीं हैं.

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