जन्म के दिन ही 'मर जाते हैं दस लाख बच्चे'

वैश्विक बाल मृत्यु

29 लाख

2012 में जन्म के 28 दिनों के भीतर हुई शिशुओं की मौतें

10 लाख

2012 में सिर्फ़ एक दिन ज़िंदा रहे शिशु

  • 51% सहारा के दक्षिणवर्ती अफ़्रीकी क्षेत्रों में हुए ऐसे जन्म जहाँ दाई मौजूद नहीं थी

  • 66 लाख शिशु पाँच साल की उम्र से पहले ऐसी वजहों से मर गए जो टाला जा सकता था

  • दक्षिण सूडान में 1-2 साल के सिर्फ़ 2% बच्चों का टीकाकरण हुआ है

घर में नए सदस्य की किलकारी का इंतज़ार सभी को बेसब्री से रहता है, लेकिन चैरिटी संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में हर साल दस लाख से अधिक बच्चे एक दिन से ज़्यादा जीवित नहीं रह पाते हैं.

मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर जन्म के समय प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद हों तो इनमें से आधी मौतों को टाला जा सकता है. समय से पहले जन्म और जन्म के समय होने वाली जटिलताएं भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.

"एंडिंग न्यूबॉर्न डेथ्स" नाम से जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक सूडान जैसे संघर्ष के दौर से गुज़र रहे देशों में हालात भयावह हैं. हालात को इस बात से समझा जा सकता है कि वहां करीब एक करोड़ की आबादी के लिए महज़ तीन सौ दाई मौजूद हैं.

गर्भ में मौत

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सेव द चिल्ड्रन के मुताबिक हर साल चार करोड़ महिलाएं किसी प्रशिक्षित कर्मचारी की मदद के बगैर बच्चे को जन्म देती हैं. संस्था ने सरकारों से इस स्थिति को बदलने के लिए कहा है. संस्था का कहना है कि बच्चे को जन्म देने की जटिल प्रक्रिया भी इन मौतों की एक वजह है.

शोध में यह भी पाया गया कि करीब 12 लाख बच्चे जन्म के समय ही मर जाते हैं. ये मौतें गर्भ की जटिलताओं और इंफ़ेक्शन और हाइपरटेंशन की वजह से होती हैं.

लाखों नवजात बच्चों की जान बचाने के लिए सेव द चिल्ड्रन ने दुनिया के प्रमुख नेताओं से ब्लूप्रिंट तैयार करने को कहा है. इसके तहत प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान देने और गर्भावस्था और जन्म से जुड़ी सभी सेवाओं को मुफ़्त करने की बात कही गई है.

बाल मृत्यु दर के मोर्चे पर पिछले एक दशक के दौरान काफी सुधार आया है, लेकिन नवजात शिशुओं की मौत को रोकने के लिए बिना देरी किए कदम उठाने की ज़रूरत है.

जोखिम

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रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में आधी हिस्सेदारी नवजात शिशुओं की है.

सेव द चिल्ड्रन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी जस्टिन फोर्सिथ ने बताया, "किसी भी बच्चे के लिए उसका पहला दिन सबसे अधिक जोखिम भरा होता है और बड़ी संख्या में माताएं अपने बच्चों को घर के फर्श पर ही जन्म देती हैं. हमें ऐसी डरावनी कहानियां सुनने को मिलती हैं जब गर्भवती मां को किसी प्रशिक्षित दाई की मदद पाने के लिए कई घंटों का सफर करना पड़ता है और कई बार इस सफर का अंत एक त्रासदी के रूप में होता है."

उन्होंने कहा, "ये एक अपराध है क्योंकि अगर सुरक्षित जन्म के इंतज़ाम किए जाएं तो इनमें से ज़्यादातर मौतों को टाला जा सकता है."

हर साल चार करोड़ महिलाएं किसी प्रशिक्षित कर्मचारी की मदद के बिना बच्चों को जन्म देती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इथोपिया में सिर्फ़ 10% जन्म प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारी की मदद से होते हैं वहीं ग्रामीण अफ़ग़ानिस्तान के कुछ इलाकों में तो 10,000 लोगों पर सिर्फ़ एक दाई है.

कांगो या सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक जैसे देशों में आपातकालीन सेवाओं की कीमत काफी अधिक है. ऐसी रिपोर्ट भी आती हैं कि भुगतान नहीं कर पाने की स्थिति में माताओं को महीनों तक जेल जैसे हालात में रखा जाता है.

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