अफ़ग़ानिस्तानः सोशल मीडिया के निशाने पर राष्ट्रपति चुनाव

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अफ़ग़ानिस्तान में जैसे-जैसे राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रचार तेज़ हो रहे हैं, सोशल मीडिया लड़ाई का मैदान बनता जा रहा है. चर्चित सोशल साइटों पर न केवल उम्मीदवारों की चर्चा हो रही है बल्कि उन्हें निशाना भी बनाया जा रहा है.

राष्ट्रपति पद के लिए प्रमुख उम्मीदवारों के नाम की फ़हरिस्त में पूर्वी नंगरहर प्रांत के गर्वनर गुल अगहा शेरज़ई का नाम उल्लेखनीय है.

गुल अगहा शेरज़ई द्वारा इस इलाक़े में चलाया गया शहरी पुनर्निमाण कार्यक्रम काफ़ी सफल रहा था. कार्यक्रम की सफलता का आलम ये है कि लोग अब उन्हें "बुलडोज़र" पुकारते हैं.

शेरज़ई ने अपना चुनावी चिह्न भी 'बुलडोज़र' ही रखा है. इसका मक़सद ये है कि अनपढ़ मतदाता भी आसानी से मतपत्र में उन्हें ढूंढ लें.

सोने का सिंहासन

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Image caption सोने के सिंहासन पर बैठे हुए एक प्रत्याशी की तस्वीर वेबसाइट पर खूब शेयर की जा रही है.

जनवरी में चुनाव प्रचार के लिए शेरज़ई की एक तस्वीर फ़ेसबुक पर डाली गई. इस तस्वीर में वे सोने के एक लंबे-चौड़े सिंहासन पर बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं.

तस्वीर में उनके सहयोगियों को चांदी की कुर्सियों पर बैठे हुए दिखाया गया है.

शेरज़ई और उनके सहयोगियों की इस ऑनलाइन तस्वीर पर सोशल मीडिया के लोगों ने ख़ूब मज़े लिए.

एक फ़ेसबुक यूज़र ने बताया, "तस्वीर देख कर ऐसा लगता है कि ये कोई चुनावी सभा नहीं बल्कि शादी का समारोह हो."

सोशल मीडिया पर जिन लोगों पर पर निशाना साधा जा रहा है उनमें शेरज़ई अकेले नहीं हैं.

वोदका की बोतलें

इस बार अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्याशियों के समर्थन और विरोध के लिए सोशल मीडिया का जितना उपयोग अभी हो रहा है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया.

राष्ट्रपति पद के प्रमुख उम्मीदवार मानते हैं कि ऑनलाइन जोक के ज़रिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. कुछ तो ये मानते हैं कि चुनाव प्रचार करने वाले लोग अपने प्रतिद्वंद्वी की छवि ख़राब करने के लिए उनकी खिल्ली उड़ाने से भी पीछे नहीं हट रही.

पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह 2009 के पिछले चुनाव में राष्ट्रपति करज़ई के साथ बेहद क़रीबी मुक़ाबले के बाद दूसरे स्थान पर रहे थे.

एक तस्वीर में वे अपने एक सहयोगी के साथ बातें करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

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Image caption फेसबुक पर शेयर की गई एक और प्रत्याशी की तस्वीर को निशाना बनाया गया.

पहली नज़र में ये तस्वीर सामान्य नज़र आती है, मगर दूसरी ही नज़र में ये समझ में आ जाता है कि ये एक मनगढ़ंत तस्वीर है. क्योंकि छवि ख़राब करने के लिए उन दोनों के बीच मेज़ पर वोदका की दो बड़ी बोतलें रखी दिखाई गईं हैं.

ऑनलाइन खिंचाई

फ़ेसबुक पर जिन प्रत्याशियों की ऑनलाइन खिंचाई की जा रही है उसके अगले शिकार हैं पूर्व वित्त मंत्री अशरफ़ घनी अहमदज़ई.

उनकी हज तीर्थयात्रा से जुड़ी एक तस्वीर फ़ेसबुक पर डाली गई है जो लोगों में नाराज़गी का विषय बन रही है. क्योंकि इस तस्वीर को जानबूझकर इस ऐंगल से खींचा गया है जिसके कारण वे मक्का के पवित्र स्थल, काबा की ओर पीठ किए हुए नमाज़ पढ़ते दिखाई दे रहे हैं.

चुनाव अभियान के कई और पहलू सोशल मीडिया पर सुर्ख़ियों में हैं. इनमें चुनाव प्रचार के दौरान समर्थकों और विरोधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले नारे भी शामिल हैं.

चुनाव अभियान के दौरान अब्दुल्लाह का नारा है- "पुरुष अपना वादा निभाते हैं". सोशल मीडिया ने इस नारे को महिलाओं के लिए अपमानजनक बताया.

काबुल सहित अन्य शहरों में अलग-अलग जगहों पर इस नारे वाले पोस्टर चिपकाए गए. आलोचना के बाद इन्हें हटा लिया गया.

वर्तनी की परेशानी

एक और नारे ने ऑनलाइन मसख़रों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. ये नारा दिया है पूर्व विदेश मंत्री ज़लमई रसूली के समर्थकों ने.

मधुरभाषी रसूल का एक कार्टून बनाया गया है. इस कार्टून में उन्हें गिटार बजाते हुए एक रॉक स्टार के रूप में पेश किया गया है. क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान उनका प्रिय शब्द रहा, 'साज़िंदगी'.

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Image caption 'पुरुष वादा निभाते हैं' के नारे वाले पोस्टर को सोशल मीडिया पर काफी आलोचना का सामना करना पड़ा.

'साज़िंदगी' का मतलब पुनर्निमाण होता है, इसके अलावा इसे संगीत बैंड के रूप में भी जाना जाता है.

इसके अलावा पोस्टर में ग़लत वर्तनी लिखे जाने के कारण भी कई प्रत्याशियों पर टिप्पणी की जा रही है. ऐसे ही एक मामले में क़यूम करज़ई पर भी शामत आई.

उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान काग़ज़ के एक टुकड़े से जब लड़खड़ाती ज़ुबान में भाषण पढ़ा तो यूज़र्स ने इसका मज़ाक़ उड़ाते हुए प्रतिक्रिया दी.

एक फ़ेसबुक यूज़र ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा जो व्यक्ति सही भाषण नहीं दे सकता वो देश की अगुआई क्या ख़ाक करेगा.

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