एक अमरीका जो सिर्फ़ पीछे की सोचता है!

एरिजोना में प्रदर्शऩ करते समलैंगिक इमेज कॉपीरइट AP
Image caption अमरीका के एरिज़ोना में धार्मिक स्वतंत्रता प्रस्ताव के विरोध में राज्य के समलैंगिकों ने प्रदर्शन किया. बाद में इस प्रस्ताव को रोकना पड़ा

एक समलैंगिक किसी दुकान पर जाए कुछ खरीदने, क्या दुकानदार को ये आज़ादी है कि वह उसे सामान बेचने से इनकार कर दे?

अमरीका के एरिज़ोना राज्य में स्थानीय विधायकों ने कुछ गुटों के दबाव में प्रस्ताव पारित कर दिया कि धार्मिक स्वतंत्रता उस दुकानदार को आज़ादी देती है कि वह समलैंगिक व्यक्ति के साथ व्यापार नहीं करे क्योंकि समलैंगिकता उसकी धार्मिक भावनाओं पर चोट करती है.

ज़ाहिर था पूरे देश में हंगामा मच गया. टीवी चैनलों पर बहस तीखी हो गई. अख़बारों के पन्ने रंगने लगे. किसी ने कहा धर्म ख़तरे में है, तो दूसरा पक्ष था कि किसी इंसान के सेक्सुअल रुझान को उसकी आस्था के ख़िलाफ़ नहीं देखा जाना चाहिए.

बात और बढ़ती इसके पहले एरिज़ोना की गवर्नर ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करके इसे क़ानून बनने से रोक दिया.

समलैंगिकता पर रोज हंगामा

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption एरिज़ोना में धार्मिक स्वतंत्रता प्रस्ताव के विरोध में समलैंगिकों ने एक सभा की. राज्य के गवर्नर ने इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी.

समलैंगिकता एक ऐसी बहस है जो हर दूसरे-तीसरे दिन यहां किसी न किसी कोने में सिर उठा ही लेती है.

पिछले दिनों नेशनल फ़ुटबॉल लीग के एक उभरते सितारे ने सार्वजनिक रूप से घोषित कर दिया कि वह समलैंगिक हैं. हंगामा तब भी मचा. दलील ये भी दी गई कि लॉकर रूम में ज़्यादातर खिलाड़ी बेरोकटोक कपड़े बदलते हैं, उन खिलाड़ियों की इज़्ज़त ख़तरे में हैं. खिलाड़ी जिस तरह के व्यायाम करते हैं खेल से पहले उस दौरान वहां किसी समलैंगिक का होना उन्हें अटपटा लग सकता है.

दलील को ज़्यादातर लोगों ने नकार दिया. लेकिन उस खिलाड़ी की मुश्किलें खत्म हो गई हों ऐसा नहीं है.

सेलिब्रिटी की चर्चा ज्यादा

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption अमेरिका की नेशनल फुटबाल लीग के उभरते सितारे सैम ने जब सार्वजिनक तौर पर घोषित किया कि वह समलैंगिक हैं, तब हंगामा मच गया

जब भी वह मैदान पर उतरता है कमेंटेटर दर्शकों को ये याद दिलाना नहीं भूलते कि समलैंगिक खिलाड़ी मैदान पर उतर रहा है.

जब भी कोई दुनिया के सामने ऐलान करता है कि वह समलैंगिक है वो एक बड़ी घटना की तरह पेश होती है. अगर वह कोई सेलिब्रिटी है तो टीवी और अख़बारों में चर्चा होती है, अगर वह आम इंसान है तो उसके घर-परिवार में हंगामा मचता है. अंग्रेज़ी मे इसे कमिंग आउट या पर्दे से बाहर निकलना कहा जाता है.

मुझे लगता है कि जब कोई फ़ौजी कुछ बड़ा करता है तो उसकी तारीफ़ होती है, जब कोई खिलाड़ी दूसरों को पीछे छोड़ता है तो उसे वाहवाही मिलती है लेकिन उस वक़्त कोई ये नहीं कहता है उसकी यौन रुचि किस तरह की है. तो समलैंगिकों के साथ ये विशेष बर्ताव क्यों?

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption वर्ष 2011 में ओबामा ने एक कानून को खत्म कर फौज में समलैंगिकों की जिंदगी को आसान बना दिया

अमरीकी फ़ौज में बरसों तक ये क़ानून था कि अगर पता चल जाए कि महिला या पुरूष सैनिक समलैंगिक है तो उन्हें फ़ौज छोड़ना होगा. नियम था डोन्ट आस्क, डोन्ट टेल- यानि न हम पूछेंगे न तुम बताओ.

बराक ओबामा ने 2011 में ये क़ानून ख़त्म कर दिया तो फ़ौज में समलैंगिकों की ज़िंदगी थोड़ी आसान हुई.

सामाजिक सोच

कुछ साल पहले मैं घोर रूढ़वादी कहे जाने वाले राज्य टेक्सस गया था और मुझे पता चला कि उस राज्य में अमरीका का सबसे बड़ा समलैंगिक चर्च है. वहां अपने बच्चों के साथ आए समलैंगिक जोड़ों ने मुझसे और अन्य पत्रकारों से पूछा कि क्या आपको लगता है कि हम इन बच्चों को किसी और पारंपरिक परिवार के मुक़ाबले कम प्यार देते हैं?

उनका कहना था कि इन बच्चों को यही लगता है कि उनके दो पिता हैं या फिर दो मां हैं. लेकिन जैसे-जैसे ये बड़े होते जाते हैं तो सामाजिक सोच उनके लिए मुश्किलें पैदा करने लगती है.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption टेक्सस में समलैंगिकों के लिए एक बड़ा चर्च है

देखा जाए तो ये भेदभाव उन मामलों से बहुत अलग नहीं है जहां गोरे दुकानदार ने काले ग्राहक को सामान बेचने से मना कर दिया, या किसी हिंदू ने अपना मकान किराए पर देने से इसलिए मना किया क्योंकि किराएदार मुसलमान था.

नागरिक अधिकारों की स्वतंत्रता हो या या मज़हबी आज़ादी इन्हें बड़ी आसानी से तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है.

ईंट और गारे की दीवार जब बरसों पुरानी हो जाती है तो ढहने लगती है. लेकिन वो दीवार जो कभी मज़हब की बुनियाद पर तो कभी पूर्वाग्रहों के चट्टानों से दिलों के अंदर बनती वो तभी टूटती हैं जब कोई उन्हें तोड़ना चाहे.

अमरीका में अब एक बड़ा तबका है जो समलैंगिकता की बहस को पीछे छोड़ चुका है, लेकिन एक ताक़तवर तबका अभी भी है जिसकी पीछे देखने की लत छूटती ही नहीं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें . आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार