चिड़ियाघरों में क्यों मारे जाते हैं स्वस्थ जानवर

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कोपेनहेगन चिड़ियाघर में हाल ही में एक सेहतमंद जिराफ को गोली मार दी गई और उसके टुकड़े कर वहां के शेरों को खिला दिया गया. वह भी दर्शकों के सामने. दुनिया सन्न रह गई.

मगर कुछ लोग इसे एक सामान्य प्रक्रिया मान रहे हैं. उनका कहना है कि यूरोप में हर साल चिड़ियाघर के हजारों सेहतमंद जानवरों के साथ यही होता है.

चिड़ियाघर के वैज्ञानिक निदेशक बेंग्ट होल्स्ट कहते हैं, "यह तो रोज की बात है."

कोपेनहेगन चिड़ियाघर में हाल के वर्षों में मारे गए जानवरों में नन्हें जिराफ मेरियस सहित तेंदुए, बाघ, शेर, भालू, हिरण और हिप्पोज भी शामिल हैं.

यूरोप के कई अन्य चिड़ियाघरों में भी जानवरों को मारने की खबरें आई हैं.

डेनिश चिड़ियाघर में मेरियस को मारे जाने के मात्र एक हफ्ते पहले दो शेरों को गोली मार दी गई.

चिड़ियाघर के रखवाले माइकल सोरेनसन ने बताया, "यहां चिड़ियाघर में करीब 2,000 जानवर हैं. पिछले दस सालों की तुलना में ये संख्या कम है."

बाकी यूरोप का हाल?

सभी चिड़ियाघरों के बारे में जान पाना अक्सर बेहद मुश्किल होता है, लेकिन 'चिड़ियाघर और एक्वेरियम यूरोपीय संघ' (इएजेडए) के सदस्यों में शामिल 340 चिड़ियाघरों को संस्था के विभिन्न प्रजनन कार्यक्रमों का पालन करना होता है. संघ में हर प्रजाति के लिए एक रिकार्ड बुक होती है जिसमें जानवरों के जन्म, अनुवांशिक संरचना, और मृत्यु जैसी हर तरह की जानकारी दर्ज होती है.

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इएजेडए मारे गए जानवरों की जानकारी सार्वजनिक नहीं करते. निदेशक लेसले डिकी के आकलन के मुताबिक हर साल यूरोप के चिड़ियाघरों में, चाहे वो जिराफ हो या मेढक का बच्चा, अनचाहे प्रजनन को रोकने के लिए तकरीबन 3,000 से 5,000 तक की संख्या में जानवरों को मारा जाता है ताकि यूरोपीय चिड़ियाघरों में उनकी संख्या को निर्धारित रखा जा सके.

संघ इसे न्यायोचित बताते हुए कहता है कि कई बार इस बात का खतरा रहता है कि वे अपने परिवार में ही प्रजनन कर लें. इससे पैदा होने वाले बच्चे अस्वस्थ हो सकते हैं या उन्हें गंभीर बीमारी हो सकती है.

मारे जा रहे जानवरों की असली संख्या जानना मुश्किल है क्योंकि कुछ चिड़ियाघर इनकी मौत का स्पष्ट रिकार्ड नहीं रखते, और कुछ तो इएजेडए के सदस्य भी नहीं होते.

अब संख्या चाहे जो हो, लेकिन ये तो तय है कि इस तरह से मारे जाने वाले जानवरों की तादाद बढ़ रही है.

गर्भनिरोधक?

कोपेनहेगन चिड़ियाघर के वैज्ञानिक निदेशक बेन्ट होलस्ट कहते हैं, "आज से 20 साल पहले जिराफ का प्रजनन उस संख्या में नहीं होता था जितना आज हो रहा है. इसलिए मजबूरन हमें ये कदम उठाना पड़ता है."

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वे आगे कहते हैं, "हम चिड़ियाघर का आकार बड़ा नहीं कर सकते. ऐसे में हमारे सामने ये सवाल उठता है कि जानवरों की अधिक संख्या को सीमित कैसे किया जाए. तब हमें ये फैसला लेना पड़ता है."

लेकिन इस बात के प्रमाण हैं कि यूरोप में अन्य प्रजातियों के प्रजनन का कार्यक्रम भी सफलतापूर्वक चल रहा है, बल्कि दौड़ रहा है.

इएजेडए के ईयरबुक 2007/2008 (उपलब्ध ताजा संस्करण) बताता है कि 'जनन और मौत' जैसी नीतियां बौने दरियाई घोड़े जैसे जानवरों के साथ उपयोग की जानी चाहिए.

अधिक संख्या की समस्या बंदर और बबून्स सहित कई प्रजातियों के साथ पेश आती है.

इसलिए जब तक यूरोप के चिड़ियाघर जानवरों की अधिक संख्या पर लगाम लगाने के लिए गर्भनिरोधक जैसे अमरीकी तरीके का इस्तेमाल नहीं करते, जानवरों की हत्या का सिलसिला जारी रहेगा.

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