अमरीका: अल्पसंख्यक सैनिक सम्मानित

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अमरीका ने मंगलवार को देश की तरफ से बहादुरी से तीन लड़ाइयों में लड़ने के लिए अपने 24 अल्पसंख्यक नस्ल के सैनिकों को लंबे वक़्त के बाद सम्मानित किया है.

सरकार ने माना है कि यह सम्मान बहुत पहले देना चाहिए था. इन चौबीस सैनिकों में से केवल तीन ही अब ज़िंदा बचे हैं.

बराक ओबामा ने इन्हें मेडल पहनाकर सम्मानित किया. साथ ही शेष लोगों को मरणोपरांत सम्मानित किया गया है.

सैनिकों को वीरता के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान देने में किसी भी तरह की पूर्वाग्रह को नजरअंदाज़ करने के मकसद से गठित समिति की समीक्षा के बाद सैनिकों को सम्मान दिया गया है.

यह सम्मान भेदभाव के शिकार हुए सैनिकों को 12 साल की पेंटागन समीक्षा के बाद दिया जा रहा है.

सम्मान पाने वालों में दूसरे विश्व युद्ध, कोरिया और वियतनाम की लड़ाई में भाग लेने वाले हिस्पैनिक, अफ्रीकी-अमरीकी और यहूदी नस्ल के सैनिक शामिल हैं.

मंगलवार दोपहर में श्री ओबामा ने व्हाइट हाउस में हुए एक समारोह में जीवित बचे सैनिकों, मृत सैनिकों के परिवार वालों और दोस्तों का स्वागत किया.

"आज हमारे पास रिकार्ड ठीक करने का मौका है, " ओबामा ने कहा. " कोई भी देश सही नहीं होता है. लेकिन यहाँ अमरीका में हम अपनी कमियों से मुक़ाबला करते हैं और कभी-कभी अतीत के इस तरह के दर्दनाक सच्चाई का सामना भी करते है कि इन सैनिकों में से कुछ देश के लिए लड़े लेकिन हमेशा उन्हें बराबरी के साथ नहीं देखा गया. "

सम्मान पाने वाले तीन जीवित सैनिकों में- वियतनाम की लड़ाई में शामिल जोस रोडेला, मेल्विन मॉरिस और सैंटियागो इरेविया शामिल है.

क़ानून में संशोधन

Image caption लेनेरो एलवार्डो के पिता को मरणोपराणत सम्मानित किया गया.

ओबामा की बगल में खड़े होकर लंबे समय तक उन्हें सराहा गया. सम्मान पाने के वक़्त उनके चेहरे गंभीर थे.

जोस रोडेला वियतनाम में 1 सितम्बर 1969 को स्ट्राइक फोर्स की एक विशेष बल के कंपनी कमांडर थे.

उनकी कंपनी के साथ 18 घंटे चली लड़ाई में कंपनी के 11 सैनिक मारे गए थे और 33 अन्य घायल हो गए थे.

लड़ाई के दौरान घायल होने के बावजूद रोडेला लड़ाई के मैदान में डटे रहे.

वियतनाम में घायल हुए सेवानिवृत्त प्रथम श्रेणी सार्जेंट मेल्विन मॉरिस ने सम्मान समारोह से पहले बीबीसी को बताया कि राष्ट्रपति के साथ खड़ा होना "एक भावुक पल" होगा.

उन्होंने कहा. "यह देर से मिलने के बावजूद कभी नहीं होने से बेहतर है."

मेल्विन मॉरिस को 1969 में वियतनाम में घायल होने के बावजूद साहसिक प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया है.

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