9/11 के बाद क्या संदेश देना चाहते थे ओसामा?

  • 20 मार्च 2014
अबू गैथ, ओसामा बिन लादेन का दामाद इमेज कॉपीरइट Reuters

अमरीकी अधिकारियों के अनुसार अल-क़ायदा के प्रवक्ता रहे एक व्यक्ति ने बताया है कि ओसामा बिन लादेन 9/11 की घटना के बाद 'दुनिया को एक संदेश' देना चाहते थे.

लादेन के दामाद 48 वर्षीय सुलेमान अबू ग़ैस पर न्यूयॉर्क में चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने का मुक़दमा चल रहा है. अबू ग़ैस ने बुधबार को अपने बचाव में यह बयान दिया.

उन्होंने अमरीकियों की हत्या की साज़िश रचने के आरोप से इनकार किया और उनके वकीलों ने कहा कि उनके मुवक्किल को हमले के बारे में कोई पूर्व जानकारी नहीं थी.

यह अमरीका की नागरिक अदालत में चल रहा एक हाई प्रोफ़ाइल मामला है.

कुवैती इमाम अबू ग़ैस ने अदालत को बताया कि वह जून 2001 में अफ़ग़ानिस्तान पहुँचे थे. उनके अनुसार वह वहां की नई इस्लामी सरकार को समझने की गंभीर इच्छा के साथ पहुंचे थे.

उस समय अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का नियंत्रण था.

मुलाक़ात

अबू ग़ैस ने कहा कि 11 सितबंर 2001 की रात ओसामा बिन लादेन ने अपना एक सहयोगी भेजकर उन्हें अफ़ग़ानिस्तान के एक पहाड़ी क्षेत्र में मिलने के लिए बुलाया था.

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Image caption अमरीकी पर 9/11 पर हमले के बाद ओसामा की अबू गैथ से मुलाकात हुई थी.

उन्होंने कहा, "मैं देखना चाहता था कि वह मुझसे क्या चाहते थे?"

अबू ग़ैस ने कहा ओसामा बिन लादेन ने उनसे कहा था, "क्या आपको ख़बर है क्या हुआ? यह हमने ही किया है."

इसके बाद बिन लादेन ने अबू ग़ैस से पूछा, "क्या लगता है, अब आगे क्या होगा?"

अबू ग़ैस ने अदालत में बताया कि उन्होंने कहा, "अमरीका आपको जान से मारने तक चैन नहीं लेगा और तालिबान की सरकार गिरा देगा."

उसके बाद बिन लादेन ने कहा, "मैं दुनिया को एक संदेश देना चाहता हूँ. मैं चाहता हूँ कि आप इस संदेश को लोगों तक पहुंचाओ."

अभियोजन पक्ष ने अपनी दलील में कहा कि अबू ग़ैस ने अपने 'शब्दों की ताक़त' का इस्तेमाल 11 सितंबर 2011 हमले के बाद चरमपंथियों को अमरीका के ख़िलाफ़ लामबंद किया था.

हमले के लिए प्रेरित

इससे पहले असिस्टेंट अमरीकी अटॉर्नी निकोलस लेविन ने कहा था कि अबू ग़ैस ने अल-क़ायदा के कैंपों में चरमपंथियों को हमले के लिए प्रेरित किया था.

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अभियोजन पक्ष ने कहा कि अबू ग़ैस ने 11 सितंबर 2011 हुए हमलों के बाद अल-क़ायदा के प्रोपेगेंडा वीडियो में आने पर सहमति जताई थी और अमरीका पर और हमले करने करने का आह्वान किया था.

अबू ग़ैस ने बताया कि वो वीडियो 'शेख़ ओसामा के उपदेशों पर आधारित था, जिसका उद्देश्य इस्लाम की शिक्षाओं को बताना और मुस्लिमों को उत्पीड़न से लड़ने के लिए प्रोत्साहित करना था.

उन्होंने इन आरोपों से भी इनकार किया कि उन्हें दिसंबर 2001 में रिचर्ड रेड के शू-बम से हवाई हमले करने के बारे में पहले से जानकारी थी. यह हमला नाकाम रहा था.

अबू ग़ैस को साल 2013 में तुर्की में गिरफ़्तार किया गया था और मुक़दमे का सामना करने के लिए न्यूयॉर्क लाया गया था. अगर अबू ग़ैस के ख़िलाफ़ लगे आरोप साबित हो जाते हैं तो उनको आजीवन कारावास की सज़ा हो सकती है.

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