थाईलैंड में हुए चुनाव अवैध क़रार

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थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने देश में दो फ़रवरी को हुए आम चुनावों को अवैध क़रार दिया है.

बैंकाक में व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री यिंगलक चिनावाट ने मध्यावधि चुनाव कराए थे.

सत्ताधारी दल को इन चुनावों में जीत की उम्मीद थी लेकिन विपक्षी पार्टियों ने इसका बहिष्कार किया और प्रदर्शनकारियों ने मतदान प्रक्रिया को बाधित किया जिससे ये चुनाव पूरे नहीं हो सके.

अदालत ने कहा कि मतदान असंवैधानिक था क्योंकि ये उसी दिन पूरे देश में नहीं हो सका.

कई संसदीय क्षेत्रों में चुनाव इसलिए नहीं हो पाए क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने उम्मीदवारों के पंजीकरण को बाधित किया था.

लॉ विभाग के एक लेक्चरर ने कई बिंदुओं के आधार पर इन चुनावों को अदालत में चुनौती दी थी. जूरी के छह सदस्यों ने इन चुनावों को अवैध क़रार देने के फ़ैसले पर सहमति जताई जबकि तीन इसके ख़िलाफ़ थे.

विरोधियों का आरोप

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ये स्पष्ट नहीं है कि नए चुनाव कब कराए जाएंगे. थाईलैंडमें नवंबर 2013 के बाद से सरकार विरोधी प्रदर्शनों में तेज़ी आई थी.

सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी मुख्यतौर पर शहरी और मध्यवर्ग से ताल्लुक़ रखते हैं और चाहते हैं कि यिंगलक सरकार की जगह गैर-निर्वाचित ''जन परिषद'' ले.

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री यिंगलकके भाई और बहिष्कृत नेता थाकसिन चिनावाट सरकार को नियंत्रित कर रहे हैं. उनका ये भी कहना है कि चिनावाट परिवार के धन ने देश की राजनीति को दूषित कर दिया है.

यिंगलक और उनकी सत्ताधारी फेऊ थाई पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी काफ़ी लोकप्रिय है. इसके बावजूदथाईलैंडमें जबरदस्त ध्रुवीकरण है.

वर्ष 2006 में सैन्य विद्रोह में थाकसिन सरकार का तख़्ता पलट दिया गया था, इसके बाद से ही इस दक्षिण पूर्वी देश में राजनीतिक उथल-पुथल की स्थितियां बनी हुई हैं.

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