यूक्रेन के हवाई ठिकानों पर रूसी सेनाओं का हमला

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क्राइमिया में मौजूद रूसी सेनाओं ने यूक्रेन के नियंत्रण वाले आखिरी सबसे बड़े सैन्य ठिकाने को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

रूसी सैनिकों ने क्राइमिया के शहर सेवेस्तोपोल के पास स्थित बेलबेक एयरबेस तक पहुंचने के लिए बख़्तरबंद गाड़ियों और ग्रेनेड्स का इस्तेमाल किया.

इस जगह पर यूक्रेन के सैनिकों ने रूसी सैनिकों के आगे समर्पण करने से इंकार कर दिया था. इस हमले में कम से कम एक यूक्रेनियाई सैनिक घायल हो गया.

रूस का नियंत्रण

इससे पहले रूस समर्थक विद्रोहियों ने पश्चिमी क्राइमिया में मौजूद एक यूक्रेनियाई नौसैनिक ठिकाने पर हमला किया था. ये नौसैनिक ठिकाना भी अब पूरी तरह से रूसी सेनाओं के पूर्ण नियंत्रण में है.

यूक्रेन संकट : क्या रूस का कोई दावा बनता है

इस बीच, यूरोपीय संघ में रूस के राजदूत व्लादिमिर शिज़ोव ने कहा है कि रूस ने क्राइमिया पर नियंत्रण करने की कोई पूर्व योजना नहीं बनाई थी.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि रूस को ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि यूक्रेन के कुछ हिस्सों में अव्यवस्था की स्थिति थी और क्राइमिया में बहुसंख्यक लोगों की मांग थी कि रूस का वहां नियंत्रण हो.

उन्होंने कहा, "ये उन कार्रवाइयों की प्रतिक्रिया थी जो कि यूक्रेन के दूसरे हिस्सों में चल रही थीं. और ये पूरी तरह से क्राइमिया के लोगों की इच्छा थी कि वो रूस के साथ मिलना चाहते हैं. इसलिए साठ साल से चल रही असामान्य स्थिति को पटरी पर लाना जरूरी था."

रूस ज़िम्मेदार?

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Image caption जनमत संग्रह में क्राइमिया ने रूस के पक्ष में मतदान किया है

हालांकि यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख की केथरीन एश्टन का कहना है कि इस संकट के लिए यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराना ग़लत है. ब्रसेल्स में उन्होंने कहा कि यूक्रेन में लोकतंत्र है और रूस को लोकतांत्रिक संस्थाओं को काम करने देना चाहिए था.

उनका कहना था, "रूसी विदेश मंत्री के साथ मेरी जो बात हुई है उससे मुझे नहीं लगता कि मेरी बात को उन्होंने अन्यथा लिया होगा. मैंने रूस को स्पष्ट कर दिया कि यदि वो लोग चरमपंथ से चिंतित हैं तो उन्हें याद रखना होगा कि यूक्रेन में संसद काम कर रही है."

शनिवार को रूस के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रतिबंध लगाने का यूरोपीय संघ का फ़ैसला बेहद दुखद और वास्तविकता से दूर है.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि ब्रसेल्स की ओर से प्रतिबंधित सूची में नामों की संख्या 21 से बढ़ाकर 33 किए जाने के बाद रूस को हक़ है कि वह इसके बारे में 'उचित प्रतिक्रिया' दे. इस सूची में जिनके नाम हैं, उनकी संपत्ति ज़ब्त करने और यात्रा पर पाबंदी लगाने जैसे प्रतिबंध लगाए गए हैं. इस सूची में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम भी शामिल है.

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