लापता विमान: परिजनों को अब भी इंतज़ार है...

  • 27 मार्च 2014
इमेज कॉपीरइट AP

लापता हुए मलेशियाई विमान में सवार यात्रियों के सगे संबंधियों को जब यह सूचना मिली है कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है और सभी यात्रियों की मौत हो चुकी है तो उन पर मानों दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. बीते 16 दिनों से अपने परिजनों की आस लगाए लोगों के लिए यह कभी नहीं भूल पाने वाले हादसे के तौर पर बदल गया.

जब एमएच 370 विमान के लापताहोने की ख़बर आई थी, तब प्रहलाद श्रीसथ उत्तर कोरिया के अपने घर से बीजिंग के लिए यात्रा कर रहे थे और उसके बाद वे अपनी पत्नी के बारे में मालूम करने के लिए मलेशिया पहुंचे.

उनकी पत्नी क्रांति श्रीसथ रसायन विज्ञान की प्रोफेसर और दो बच्चों की मां थीं. वे गैर सरकारी संगठन में काम कर रहे अपने पति से मिलने प्योंगयांग आ रही थीं.

दिन बीतते रहे और जब कोई ख़बर नहीं मिल रही थी तो अनिश्चितता भरे माहौल में श्रीसथ के परिवार वालों ने प्रहलाद को भारत बुला लिया.

उम्मीद भी, दुख भी

यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेनिसोटा की एमिरेट्स प्रोफेसर पाउलिन बोस ऐसे ही दुख का सामना करने वाले लोगों को दुख से उबरने में मदद करती हैं.

ऐसा दुख जिसमें अपने परिजन को खोने का आपके पास कोई सबूत नहीं होता, कोई अवशेष नहीं, इसके चलते लोगों को उम्मीद होती है कि एक दिन वो ज़िंदा लौट आएगा.

बोस कहती हैं, "ऐसे दुख पर लोग एकदम से शोक संतप्त नहीं होते है, बल्कि वे सन्न रह जाते हैं. आम तौर पर समाज के लोग सोचते हैं कि वे दुखी हैं लेकिन वास्तविकता में उन्हें भरोसा होता है कि परिजन एक दिन लौट आएंगे या फिर वे सोचते हैं कि वे शायद कभी नहीं लौटें."

पाउलिन बोस ऐसे नुकसान के साथ रहने के तौर तरीकों पर एक किताब लिख चुकी हैं जिसका नाम है- एम्बिगुएस लॉस: लर्निंग टू लिव विथ अनरिजॉल्वड ग्रीफ.

इमेज कॉपीरइट AP

हालांकि अब ख़बर आ चुकी है कि मलेशियाई विमान दक्षिण हिंद महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है और कोई जीवित नहीं बचा है. इसके बावजूद अपने परिजनों को खो चुके लोग इसे आसानी से स्वीकार नहीं कर पाएंगे.

संशय कायम रहता है

प्रोफेसर पाउलिन बोस बताती हैं, "अगर उन लोगों को यह मालूम भी हो जाए किविमान के अवशेष महासागरमें मिल गए हैं तो भी उन्हें अंतिम संस्कार के लिए परिजनों के शव तो नहीं मिलेंगे. जब तक उन्हें डीएनए सबूत नहीं मिल जाते तब तक उनका संशय कायम रहेगा."

आम लोग अपने परिजनों के शव को देखकर ही उनके गुजरने के प्रति निश्चिंत हो पाते हैं. बिना किसी शारीरिक सबूत को देखे उनका दुख जटिल हो जाता है. वैसे किसी शख्स की मौत उनके परिजनों के लिए हमेशा दुखद होती है लेकिन उनके अंतिम संस्कार के दौरान परिवार वाले और परिजन अपने दुख को थोड़ा हलका कर लेते हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP

लेकिन मलेशियाई विमान हादसे की तरह ही जब लोगों को यह मालूम नहीं चलता कि वास्तविकता में क्या हुआ था तो सगे-संबंधी अपने-अपने ढंग से सोचते हैं. विमान हादसे की ख़बर से पहले क्रांति के 16 साल के बेटे सहित उनके परिजनों को उम्मीद थी कि विमान का अपहरण कर लिया गया है और क्रांति अभी भी जीवित होंगी.

प्रह्लाद के छोटे भाई सतीश श्रीसथ ने कुछ दिन पहले हमें बताया, "हममें किसी भी दुखद समाचार को झेलने की ताकत नहीं है." सतीश ने ही क्रांति के लिए इस विमान की ऑनलाइन टिकट खरीदी थी.

वे कहते हैं, "मैं ने अगर टिकट दूसरे रूट का लिया होता तो ऐसा नहीं होता. मुंबई की जगह पुणे, पुणे से दिल्ली और दिल्ली से बीजिंग का टिकट लेने पर वह बच जाती."

पाउलिन बोस बताती हैं कि वे अपने उपचार के दौरान सबसे पहले परिजनों को यही समझाने की कोशिश करती हैं कि उन सबका हादसे से कोई लेना देना नहीं है, उनकी कोई ग़लती नहीं है.

परिवार की चिंता

9/11 के दिन वर्ल्ड ट्रेड टॉवर पर हमले या एशियाई देशों में आई सुनामी तूफ़ान जैसी आपदाओं के दौरान लोग अपने परिजनों को खोते हैं. कई बार तो ऐसा भी होता है कि कोई किसी काम से घर से बाहर निकला और फिर उसका पता ही नहीं चलता.

वेलेरी नेट्टल्स का 16 साल का बेटा डेमिन इस्ले, ऑफ़ वाइट द्वीप से लापता से हो गया था. इस हादसे को बीते 17 साल हो चुके हैं. वे अपने दुख के साथ रहना सीख चुकी हैं. वे बताती हैं कि वे एक ही समय में दो दुनिया में होती है.

एक दुनिया ऐसी जिसमें उन्हें अपने बेटे के बारे में कुछ मालूम नहीं है, तो दूसरी वो दुनिया जहां रोजमर्रा की चुनौतियां हैं.

वह कहती हैं, "मैं हमेशा सोचती थी कि मेरे बेटे को कुछ हो गया तो मैं मर जाऊंगी, लेकिन आप कुछ नहीं जानते."

डेमिन को आख़िरी बार उनके घर के पास ही दोस्तों के साथ मछली और चिप्स की दुकान पर देखा गया था. डेमिन के साथ क्या हुआ, इसे लेकर तमाम आशंकाएं जताई जा रही हैं- कुछ कहते हैं कि वो समुद्र में गिर गया जबकि उनकी मां सहित कई लोगों को आशंका है कि उसकी हत्या ड्रग्स डीलरों ने कर दी.

साल 2013 में पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए जरूरी सूचना देने के लिए 20 हज़ार पाउंड के इनाम की घोषणा की है.

बाक़ी रहती है उम्मीद

वेलेरी को कई बार यह सपना आया कि उनके पति और छोटे बेटे ने मिलकर डेमिन को तलाश लिया है. अपने लापता परिजनों के बारे में सपने देखना आम बात है. इन सपनों में दो ही बात होती है- या तो लापता शख़्स की मौत हो जाती है या फिर लापता शख़्स कहीं दूर ख़ुशी-ख़ुशी अपना जीवनयापन कर रहा होता है.

इमेज कॉपीरइट AP

वेलेरी नेट्टल्स अब टेक्सास में रहती हैं, उन्होंने मलेशियाई विमान के हादसे से जुड़ी ख़बरों को ध्यान से देखा है. वे कहती हैं, "इतने अगर-मगर की आशंकाएं जताई जा रही थीं जो दुख को बढ़ा रही थीं."

वेलेरी यह मानती हैं कि ऐसे दुख को भुलाना आसान नहीं होता है. वे कहती हैं कि उन्हें आज भी इंतज़ार और उम्मीद है, शायद बेटे के मिल जाने की, लेकिन वह कहती हैं- मैं नहीं जानती कि किसका इंतज़ार है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार